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Team India: BCCI की 10 सूत्रीय नीति पर आया हरभजन सिंह का बयान, बोले- ये नियम पहले भी थे, हमें भटकाया जा रहा
Fri, 17 Jan 2025 11:33 PM IST
Mayank Tripathi
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Mayank Tripathi
Updated Fri, 17 Jan 2025 11:33 PM IST
सार
भारत को हाल ही में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 1-3 से शिकस्त मिली थी। इसके बाद बीसीसीआई ने समीक्षा बैठक की और 10 सूत्री फरमान जारी कर दिया। इस पर बात करते हुए हरभजन सिंह ने पीटीआई से कहा- मैं मीडिया में रिपोर्ट की गई यात्रा नीति के बारे में पढ़ रहा था तो मुझे अपने खेल के दिनों से कुछ भी अलग नहीं मिला।
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हरभजन सिंह
- फोटो : BCCI
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विस्तार
भारतीय टीम के लगातार गिरते प्रदर्शन में सुधार के लिए गुरुवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने 10 सूत्रीय नीति पेश की। इसमें घरेलू क्रिकेट को अनिवार्य बनाने के अलावा दौरों पर परिवारों और निजी कर्मचारियों की उपस्थिति पर पाबंदी लगाई गई है। बोर्ड ने यह कदम टीम में अनुशासन और एकजुटता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया है। अब इस मामले पर पूर्व भारतीय गेंदबाज हरभजन सिंह ने बात की। उन्होंने कहा कि हाल ही में जारी 10 सूत्रीय नीति वास्तव में उनके खेलने के दिनों से ही लागू है और वह जानना चाहते थे कि इसमें कब और किसने बदलाव किया। उनका मानना है कि ये दिशानिर्देश हाल में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम को मिली शर्मनाक हार से ध्यान भटकाने का कदम हो सकते हैं।
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भज्जी को याद आए पुराने दिन
भारत को हाल ही में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 1-3 से शिकस्त मिली थी। इसके बाद बीसीसीआई ने समीक्षा बैठक की और 10 सूत्री फरमान जारी कर दिया। इस पर बात करते हुए हरभजन सिंह ने पीटीआई से कहा- मैं मीडिया में रिपोर्ट की गई यात्रा नीति के बारे में पढ़ रहा था तो मुझे अपने खेल के दिनों से कुछ भी अलग नहीं मिला। आखिरी बार जब मैंने केंद्रीय अनुबंधित क्रिकेटर के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था तब भी इसी तरह के नियम थे।
भज्जी का कहना है कि 10 सूत्री नीति में कुछ चीजें ऐसी हैं जो उनके दौर में भी थीं। उन्होंने आगे कहा- नई 10 सूत्री नीति में कम से कम नौ चीजें तो हमारे समय थी ही। इसमें दौरे के समय परिवार की मौजूदगी, एक ही होटल में ठहरना, अभ्यास का समय, यह सब शामिल है। मेरा सवाल यह है कि जब यह सारे नियम हमारे समय में भी थे तो इसे किसने और कब बदला? इसकी जांच होनी चाहिए।
भारत को हाल ही में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 1-3 से शिकस्त मिली थी। इसके बाद बीसीसीआई ने समीक्षा बैठक की और 10 सूत्री फरमान जारी कर दिया। इस पर बात करते हुए हरभजन सिंह ने पीटीआई से कहा- मैं मीडिया में रिपोर्ट की गई यात्रा नीति के बारे में पढ़ रहा था तो मुझे अपने खेल के दिनों से कुछ भी अलग नहीं मिला। आखिरी बार जब मैंने केंद्रीय अनुबंधित क्रिकेटर के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था तब भी इसी तरह के नियम थे।
भज्जी का कहना है कि 10 सूत्री नीति में कुछ चीजें ऐसी हैं जो उनके दौर में भी थीं। उन्होंने आगे कहा- नई 10 सूत्री नीति में कम से कम नौ चीजें तो हमारे समय थी ही। इसमें दौरे के समय परिवार की मौजूदगी, एक ही होटल में ठहरना, अभ्यास का समय, यह सब शामिल है। मेरा सवाल यह है कि जब यह सारे नियम हमारे समय में भी थे तो इसे किसने और कब बदला? इसकी जांच होनी चाहिए।
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'हम लोग मुद्दे से भटक रहे हैं'
हरभजन के भारतीय टीम के पूर्व साथी इरफान पठान ने भी इसी तरह के विचार साझा किए। हरभजन ने कहा कि इन समय इन चीजों की जगह चर्चा केवल क्रिकेट पर ही होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, हम लोग मुद्दे से भटक रहे हैं। हम (ऑस्ट्रेलिया में ) 1-3 से इसलिए नहीं हारे क्योंकि पत्नियां और दोस्त दो महीने से वहां थे। हम इसलिए नहीं हारे क्योंकि कोई खिलाड़ी टीम से अलग यात्रा कर रहा था।
उन्होंने आगे कहा, हम हारें क्योंकि हमने खराब क्रिकेट खेला। हम घरेलू मैदान पर भी अच्छी बल्लेबाजी करने में नाकाम रहे। हमारी टीम में ऐसे खिलाडी शामिल थे जो बेहद ही खराब फॉर्म में थे। इस स्थिति से निपटने के लिए कुछ सुधार किये जा रहे हैं? या फिर मैदान के बाहर की इन्हीं बातों पर चर्चा हो रही है।
हरभजन के भारतीय टीम के पूर्व साथी इरफान पठान ने भी इसी तरह के विचार साझा किए। हरभजन ने कहा कि इन समय इन चीजों की जगह चर्चा केवल क्रिकेट पर ही होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, हम लोग मुद्दे से भटक रहे हैं। हम (ऑस्ट्रेलिया में ) 1-3 से इसलिए नहीं हारे क्योंकि पत्नियां और दोस्त दो महीने से वहां थे। हम इसलिए नहीं हारे क्योंकि कोई खिलाड़ी टीम से अलग यात्रा कर रहा था।
उन्होंने आगे कहा, हम हारें क्योंकि हमने खराब क्रिकेट खेला। हम घरेलू मैदान पर भी अच्छी बल्लेबाजी करने में नाकाम रहे। हमारी टीम में ऐसे खिलाडी शामिल थे जो बेहद ही खराब फॉर्म में थे। इस स्थिति से निपटने के लिए कुछ सुधार किये जा रहे हैं? या फिर मैदान के बाहर की इन्हीं बातों पर चर्चा हो रही है।
'कुछ बिंदुओं पर फिर से गौर करने की जरूरत है'
भारत के बेहतरीन स्पिनरों में से एक हरभजन ने इसके बाद अपने खेल के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि कुछ बिंदुओं पर फिर से गौर करने की जरूरत है क्योंकि उनका उल्लंघन किया जा रहा था। मैंने कभी भी सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ या अनिल कुंबले को सिर्फ इसलिए मुंबई, कोलकाता या बेंगलुरु के लिए रवाना होते नहीं देखा क्योंकि कोई मैच तीन दिन में खत्म हो गया है और अगला मुकाबला एक सप्ताह बाद है। वे सभी टीम के साथ रहते थे और एक साथ अगले मैच स्थल जाते थे। आपको खिलाड़ियों को यह बताने की ज़रूरत क्यों है कि आपको टीम बस से यात्रा करनी होगी? यह एक नियम है। अगर कोई नियम तोड़ रहा है, तो उस व्यक्ति की जांच की जानी चाहिए।
हरभजन ने किसी विशेष खिलाड़ी या कोच के निजी दल पर रोक लगाने का समर्थन करते हुए कहा कि बीसीसीआई कुछ अच्छे बावर्ची को टीम के साथ यात्रा करने के लिए रख सकती है। उन्होंने कहा, बीसीसीआई के पास पैसे की कमी नहीं है। आपको व्यक्तिगत बावर्ची ले जाने की आवश्यकता क्यों है। फुटबॉल विश्व कप में बड़ी टीमें अपने स्वयं के बावर्ची रखती हैं जो खिलाड़ियों की आहार आवश्यकताओं का ख्याल रखते हैं। यह कोई बड़ी बात नहीं है।
भारत के बेहतरीन स्पिनरों में से एक हरभजन ने इसके बाद अपने खेल के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि कुछ बिंदुओं पर फिर से गौर करने की जरूरत है क्योंकि उनका उल्लंघन किया जा रहा था। मैंने कभी भी सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ या अनिल कुंबले को सिर्फ इसलिए मुंबई, कोलकाता या बेंगलुरु के लिए रवाना होते नहीं देखा क्योंकि कोई मैच तीन दिन में खत्म हो गया है और अगला मुकाबला एक सप्ताह बाद है। वे सभी टीम के साथ रहते थे और एक साथ अगले मैच स्थल जाते थे। आपको खिलाड़ियों को यह बताने की ज़रूरत क्यों है कि आपको टीम बस से यात्रा करनी होगी? यह एक नियम है। अगर कोई नियम तोड़ रहा है, तो उस व्यक्ति की जांच की जानी चाहिए।
हरभजन ने किसी विशेष खिलाड़ी या कोच के निजी दल पर रोक लगाने का समर्थन करते हुए कहा कि बीसीसीआई कुछ अच्छे बावर्ची को टीम के साथ यात्रा करने के लिए रख सकती है। उन्होंने कहा, बीसीसीआई के पास पैसे की कमी नहीं है। आपको व्यक्तिगत बावर्ची ले जाने की आवश्यकता क्यों है। फुटबॉल विश्व कप में बड़ी टीमें अपने स्वयं के बावर्ची रखती हैं जो खिलाड़ियों की आहार आवश्यकताओं का ख्याल रखते हैं। यह कोई बड़ी बात नहीं है।