निश्चित तौर पर हनुमा विहारी एक असाधारण प्रतिभा के धनी खिलाड़ी हैं। अपने छोटे से टेस्ट करियर में उन्होंने यह साबित भी किया कि उनकी बल्लेबाजी में धैर्य, तकनीक के साथ-साथ बड़े स्कोर करने की भी क्षमता है। इंग्लैंड के खिलाफ उसी की धरती पर अपना इंटरनेशनल डेब्यू करने वाले आंध्र प्रदेश के इस खिलाड़ी को अब भारतीय टेस्ट टीम के मध्यक्रम का स्थायी सदस्य कहा जा सकता है।
वेस्टइंडीज के खिलाफ जारी टेस्ट सीरीज के पहले मैच में 32 और 93 रन बनाकर हाथ लगी निराशा को दूसरे और आखिरी मैच में हनुमा ने 111 और नाबाद 53 रन बनाकर निश्चित तौर पर कम किया गया। इस पारी के साथ ही हनुमा विहारी सचिन तेंदुलकर, सुनील गावस्कर, पॉली उमरीगर और टाइगर पटौदी के स्पेशल क्लब में भी शामिल हो गए।
दरअसल, हनुमा विहारी एशिया के बाहर एक ही टेस्ट में शतक और अर्धशतक जड़ने वाले 5वें भारतीय बल्लेबाज बन गए हैं। ये कारनामा उन्होंने नंबर 6 पर बल्लेबाजी करते हुए किया। भारत की ओर से आखिरी बार यह कारनामा सचिन तेंदुलकर ने साल 1990 में किया था। तब सचिन ने इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में खेले गए टेस्ट मैच में नंबर 6 पर बल्लेबाजी करते हुए पहली पारी में 68 और दूसरी पारी में नाबाद 119 रन की पारी खेली थी।
विहारी और सचिन से पहले यह कारनामा पॉली उमरीगर (56 और 172*) साल 1962 में वेस्टइंडीज के खिलाफ, नवाब पटौदी (64 और 148) साल 1967 में इंग्लैंड के खिलाफ, एमएल जेसिम्हा (74 और 101) साल 1968 में इंग्लैंड के खिलाफ कर चुके हैं। विहारी अब तक 5 टेस्ट में 1 शतक और 3 अर्धशतक की मदद से कुल 456 रन बना चुके हैं।
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हनुमा विहारी
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गौरतलब है कि 25 साल के हनुमा विहारी वेस्टइंडीज दौरे पर खेली जा रही 2 मैचों की टेस्ट सीरीज में अब तक 96.33 की औसत से 289 रन बना चुके हैं जिसमें 1 शतक और 2 अर्धशतक शामिल हैं। विहारी ने अपने टेस्ट करियर का पहला शतक दूसरे टेस्ट की पहली पारी में जड़ा था, जिसे उन्होंने अपने स्वर्गीय पिता को समर्पित किया था। दिलचस्प बात यह है कि विहारी ने सभी बड़ी पारियां विदेशी धरती पर खेली हैं।