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Amar Ujala Samvad: आमिर सोहेल से लेकर एमएस धोनी तक, अमर उजाला संवाद में वेंकटेश प्रसाद ने सुनाए कई किस्से

Mon, 07 Aug 2023 07:59 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: शक्तिराज सिंह Updated Mon, 07 Aug 2023 07:59 PM IST
सार

अमर उजाला संवाद चंडीगढ़ में 'मन की जीत' सत्र में पूर्व भारतीय क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद भी शामिल हुए। उन्होंने भारतीय क्रिकेट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान उन्होंने भारत-पाकिस्तान मैच में आमिर सोहेल के साथ टक्कर की कहानी भी सुनाई।

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former Indian Pacer Venkatesh prasad in amar ujala samvad Punjab
वेंकटेश प्रसाद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय क्रिकेट में कई जोड़ियां मशहूर रही हैं। बल्लेबाजों में सचिन-गांगुली, सचिन-सहवाग, रोहित-धवन की जोड़ियां इसमें शामिल रहीं। स्पिन गेंदबाजी में तो एक दौर में बेदी-प्रसन्ना-चंद्रशेखर और वेंकटराघवन की चौकड़ी का जादू चलता था। तो एक दौर कुंबले-हरभजन का रहा। मौजूदा दौर में अश्विन-जडेजा का सिक्का चलता है। ऐसे ही तेज गेंदबाजी में भारत की सबसे मशहूर जोड़ियों में एक थी श्रीनाथ और वेंकटेश प्रसाद की जोड़ी। इस जोड़ी में शामिल रहे वेंकटेश प्रसाद ने आज अमर उजाला संवाद में शिरकत की।
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वेंकटेश प्रसाद से सवाल: आप दो दिन पहले ही 50 के हुए हैं, जन्मदिन कहां मनाया?
जवाब:
मैं अभी-अभी एयरपोर्ट से आया हूं। आपके धैर्य के लिए शुक्रिया। चंडीगढ़ में होना हमेशा खुशी की बात होती है। यहां मैच के लिए काफी बार आए हैं। मैंने यहां काफी मैच खेले हैं। भारतीय टीम को भी कोचिंग दी है। बेंगलुरु में बहुत ज्यादा ट्रैफिक है। यह शहर काफी खूबसूरत है। यहां का खाना भी काफी अच्छा है। मैं तो अब 50 साल का हो गया हूं। मैं वेजिटेरियन हूं फिर भी मैदान पर आक्रमक था। हमारा यह रवैया था।
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वेंकटेश प्रसाद से सवाल: आमिर सोहेल से जुड़ा किस्सा सुनाइए
जवाब:
वह मैच बेंगलुरु में हो रहा था। वह विश्व कप का क्वार्टर फाइनल था। हारते तो बाहर हो जाते। उस मैच में नवजोत सिंह सिद्धू ने 80 के करीब रन बनाए थे। वह जब बल्लेबाजी के लिए आए तो आराम से रन बना रहे थे। ऐसा लग रहा था कि 40 ओवर में मैच समाप्त हो जाएगा। पिच से उनको मदद मिल रही थी। उस समय कुछ तो करना था। आमिर सोहेल, सईद अनवर, एजाज उनकी टीम में थे। वह अच्छी साझेदारियां कर रहे थे। उन्होंने मेरी गेंद पर कवर में बाउंड्री लगाई।

मैंने जब स्टेडियम में दर्शकों को देखा तो वह पूरी तरह शांत थे। उन परिस्थितियों में दर्शक चाह रहे थे कि हम चढ़कर खेलें। आमिर सोहेल ने तभी मुझे एक चौका मारा और फिर मेरे तरफ आए। उन्होंने जिस तरफ गेंद को मारा था उस तरफ बल्ला दिखाया। उन्होंने कहा कि मैं उसी तरफ फिर से चौका मारूंगा। हालांकि, इस बात से वह अभी मुकर जाते हैं। मैं जब वापस गेंदबाजी करने जा रहा था तो उस बात के बारे में सोच रहा था। मैं सोच रहा था कि जो हो गया वह हो गया। अब जो होने वाला है उसके बारे में ध्यान देना। मैं अगली गेंद किधर डालूंगा इसके बारे में सोच रहा था। मैंने सोचा कि अपनी क्षमता के अनुसार काम करूंगा। चाहे वह कुछ भी करे। मैंने स्टंप पर गेंद डालने का मन बनाया। उन्होंने पहले की तरह शॉट लगाने का फैसला किया और वह क्लीन बोल्ड हो गया। वहां से मैच बदल गया। आपको एग्रेसन दिखाना चाहिए, लेकिन कंट्रोल में रहना चाहिए। अपने आप पर विश्वास होना चाहिए। आपको मानसिक रूप से मजबूत होना चाहिए।

वेंकटेश प्रसाद से सवाल: पाकिस्तान के खिलाफ आपका प्रदर्शन अच्छा कैसे होता था?
जवाब: भारत-पाकिस्तान का मैच मतलब काफी ज्यादा दबाव होना। मुझे नहीं पता कि पाकिस्तान के खिलाफ कैसे अच्छा प्रदर्शन होता था, लेकिन वनडे और टेस्ट में भी मेरा बेस्ट प्रदर्शन इसी टीम के खिलाफ है।

वेंकटेश प्रसाद से सवाल: ट्विटर पर टीम इंडिया के मैनजमेंट की धुलाई कर रहे हैं। आपने टीम पर सवाल उठाए।
जवाब: मैं किसी को नीचा दिखाना नहीं चाहता। हम भी मैच हारे हैं। हम हमेशा मैच नहीं जीते थे। मौजूदा टीम काफी टैलेंटेड है। जब भी कोई भारत के लिए खेल रहा होता है तो उसके एटीट्यूड पर सबकी नजर होती है। आपको हमेशा जीत के लिए खेलना होता है। जब मैं ट्वीट करता हूं तो अपने मन की बात लिखता हूं। किसी को नीचा नहीं दिखाना चाहता।

वेंकटेश प्रसाद से सवाल: आगामी विश्व कप को लेकर टीम इंडिया में क्या कमी है?
जवाब:
टीम में एक स्थिरता होनी चाहिए। आप लगातार बदलाव नहीं कर सकते हैं। आपके पास अलग-अलग सलाह आएंगी। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड को देखिए। उनके पास अलग-अलग टीमें हैं, लेकिन वह ज्यादा बदलाव नहीं करते। अपनी योजनाओं पर टिके रहते हैं। आप जितना प्रयोग करेंगे उतना कंफ्यूज होंगे। आप लगातार बदलाव करेंगे तो आने वाले खिलाड़ी यही सोचेंगे कि अगर मैंने दो मैच में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया तो मुझे भी निकाल देंगे। खिलाड़ियों को मानसिक रूप से तैयार करना होता है। क्षमता होती है, लेकिन मानसिक रूप से मजबूती ज्यादा जरूरी है।

वेंकटेश प्रसाद से सवाल: क्या आजकल ज्यादा क्रिकेट हो रहा है? इसका असर देखने को मिल रहा है क्या?
जवाब: मुझे ऐसा नहीं लगता है। अभी बस एक आईपीएल बढ़ गया है। जब हम खेलते थे तब औसतन 15 टेस्ट खेलते थे। उस समय 35 वनडे खेल लेते थे। आज भी ऐसा ही चल रहा है। आईपीएल ने आपको दो महीनों के लिए ज्यादा व्यस्त किया है। पहले टेस्ट और वनडे होते थे। अब टेस्ट और वनडे के अलावा टी20 होते हैं। इसलिए हमें लग रहा है कि बहुत ज्यादा मैच हो रहे हैं। आजकल खिलाड़ी बहुत ज्यादा चोटिल हो रहे हैं। इसके लिए अनुशासन की आवश्यकता है। अगर आप चोटिल हो रहे हैं तो अनुशासित नहीं हैं।

वेंकटेश प्रसाद से सवाल: कपिल देव ने आपको कैसे प्रभावित किया? श्रीनाथ के साथ आपकी जोड़ी कैसे बनी?
जवाब: कपिल देव सिर्फ मेरे और जवागल श्रीनाथ लिए आदर्श नहीं थे, वह पूरी पीढ़ी के लिए आदर्श थे। 1983 विश्व कप के समय मैं घर में खेलता था। फाइनल मैच मैं नहीं देख पाया था। उस समय जो समाचार आते थे वह हमें प्रभावित करते थे। कपिल देव मेरे आदर्श थे। हम टिकट लेकर मैच देखने नहीं जा सकते थे। हम मिडिल क्लास से थे। टीवी भी नहीं था। कपिल देव उस समय उत्तर से लेकर दक्षिण तक, सबके आदर्श थे। फिटनेस से लेकर अनुशासन तक में वह लाजवाब थे। एक दिन मेरा सपना पूरा हुआ। मैंने उनके साथ श्रीलंका में 1994 में गेंदबाजी की शुरुआत की थी। मेरा सपना पूरा हो गया था।


जहां तक श्रीनाथ की बात है तो वह मुझसे पहले खेल चुके थे। मैंने 1994 में डेब्यू किया था। वह 1991 में पहली बार खेले थे। मैंने जवागल से काफी कुछ सीखा। वह कपिल देव से सीखते थे। जब मैंने कपिल देव और श्रीनाथ के साथ खेला तो काफी कुछ सीखा। भारत में अब तक जितने तेज गेंदबाज हुए, उनमें श्रीनाथ सबसे तेज थे।

वेंकटेश प्रसाद से सवाल: महेंद्र सिंह धोनी भी चर्चा में रहते हैं। आप अभी मिलकर आए हैं। क्या-क्या बात हुई?
जवाब:
हमने अच्छा वक्त बिताया। मैं कहूंगा कि इतनी उपलब्धियों के बाद भी उनके जितना विनम्र कोई नहीं है। उनके जितनी उपलब्धियां किसी भारतीय क्रिकेटर के पास नहीं हैं। वे जमीन से जुड़े इंसान हैं। 2001 में वे बिहार से खेल रहे थे, मैं कर्नाटक से खेल रहा था। तब से अब तक धोनी वैसे ही हैं। उनके पास गाड़ियों का कलेक्शन नहीं, उसे म्यूजियम कहना चाहिए। जब मैं चेन्नई सुपरकिंग्स का कोच था। तब उन्हें बाइक मिली थी। वो ग्राउंड से होटल तक मुझे ले गए थे। मैं पीछे मुश्किल से बैठा था। वे बाइक्स को लेकर बहुत क्रेजी हैं।
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