दो टेस्ट कप्तानों के 'बुरे दिन', एक ही दिन में हुए दोनों नाकाम
किसी भी टीम के कप्तान के ऊपर सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह होती है कि वह बतौर कप्तान टीम की अगुवाई करे। इसके लिए उसे मैदान पर जोरदार खेल दिखाना होता है। अमूमन क्रिकेट टीम के कप्तान बल्लेबाज ही होते हैं और उनसे उम्मीद होती है कि क्रीज पर टिककर साथी खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाए।
खासकर ऐसे मौके पर जब टीम संकट में हो और उसे संकट से बाहर निकलने के लिए एक बड़ी पारी की दरकार होती है। अब जैसे नॉटिघम में गुरुवार को शुरू हुए एशेज सीरीज के चौथे टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत बहुत खराब हुई और टीम को अपने कप्तान माइकल क्लार्क से बड़ी पारी की उम्मीद थी और कुछ देर क्रीज पर रहकर उम्मीद भी जगा दिया था, लेकिन वह भी नाकाम रहे।
गुरुवार का दिन दो टेस्ट कप्तानों के लिए बेहद खराब साबित हुआ। एक ही दिन दो बड़े कप्तान कुछ घंटों के अंदर बल्ले से नाकाम रहे। हालांकि यह मैच दो अलग-अलग मैदान पर खेले गए थे। दो कप्तानों में पहला खुद क्लार्क हैं जो पिछले 7 टेस्ट की 13 पारियों में एक भी अर्धशतक नहीं लगा सके हैं। इस दौरान उनकी सर्वश्रेष्ठ पारी 47 रनों की है।
एशेज सीरीज में क्लार्क पिछले तीन खत्म हुए मैचों में 94 रन ही बना पाए हैं। इसके बाद नॉटिघम टेस्ट में वह 10 रन बनाकर आउट हो गए। हालांकि वह इस पारी में अपनी टीम के दूसरे सर्वश्रेष्ठ स्कोरर रहे। लेकिन सबसे ज्यादा 13 रनों की पारी मिचेल जॉनसन ने खेली।
वैसे तो ओवरऑल क्लार्क का प्रदर्शन बढ़िया रहा है, लेकिन उनका फॉर्म इस समय बिगड़ा हुआ है। उन्होंने 114 टेस्ट मैचों में 28 शतक के अलावा 27 अर्धशतक भी लगाए हैं।
फॉर्म वापसी के लिए किया 'लाख' प्रयास पर काम न आया
नाकामी का दंश इस समय सिर्फ ऑस्ट्रेलियाई कप्तान माइकल क्लार्क ही नहीं झेल रहे हैं बलि्क उनके साथ एक और कप्तान भी है जो अपनी पुरानी फॉर्म हासिल करना चाहता है लेकिन उसका लाख प्रयास भी सफलता नहीं दिला रही है।
यह कप्तान हैं टीम इंडिया के टेस्ट कप्तान विराट कोहली। कोहली पिछले साल के अंत में पहली बार टेस्ट टीम के कप्तान बने थे। फिर उसी दिसंबर के महीने में महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास लेने के बाद वह इस साल की शुरुआत से भारतीय टीम के टेस्ट कप्तान बना दिए गए।
ये अलग बात है कि जब से कोहली नियमित टेस्ट कप्तान बने हैं तब से भारत ने सिर्फ दो टेस्ट मैच खेले हैं। कप्तान बनाए जाने के बाद कोहली ने सिडनी टेस्ट में 147 रनों की पारी खेली थी। लेकिन हाल में कोहली के प्रदर्शन की बात की जाए तो उनका फॉर्म बिगड़ा हुआ है।
पिछली 13 पारियों में उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 45 रनों का रहा जो उन्होंने पिछले महीने के अंत में ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ खेलते हुए खेली थी। इन 13 पारियों में 5 टी-20, 3 वनडे, एक टेस्ट मैच की दोनों पारियां और दो प्रथम श्रेणी मुकाबले शामिल हैं। कोहली लय हासिल करने के लिए काफी प्रयास कर रहे हैं लेकिन वह अपने पुराने रंग में नहीं लौट सके हैं।
श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से पहले अभ्यास मैच की दोनों पारियों में वह पहली पारी में 8 और दूसरी पारी में 18 रन बनाकर आउट हो गए। वह लगातार अपने बल्लेबाजी क्रम में बदलाव भी कर रहे हैं लेकिन सफलता नहीं मिल रही है।इसके अलावा वह पिछले 10 वनडे मैचों एक बार भी अर्धशतक नहीं लगा सके हैं।
इससे पहले ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ गैर आधिकारिक टेस्ट मैच में भी बल्लेबाजी क्रम में काफी बदलाव किया लेकिन उन्हें कुछ खास हासिल नहीं हुआ।