बैट से बनेगा 'टॉस का बॉस' नया नियम नहीं, जानें पहले कब ऐसे होता था फैसला
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ऑस्ट्रेलिया की घरेलू टी20 बिग बैश लीग में सिक्के के बजाय क्रिकेट के बल्ले से फैसला होगा कि कौनसी टीम पहले बल्लेबाजी करेगी। प्रसिद्ध भारतीय सांख्यिकी मोहनदास मेनन के मुताबिक बल्ले को उछालकर टॉस करने का नियम कोई नया नहीं है।
मेनन ने कहा, 'बल्ले को उछालकर टॉस कराना बहुत पुराना अभ्यास है। यह 18वीं शताब्दी में होता था। फिर सिक्के से टॉस का फैसला होने लगा और बल्ले से टॉस करना बंद कर दिया गया। बीबीएल के लिए विशेष कूकाबूरा बल्ला बनाया गया है, जिसे उछालने पर कप्तान को हिल या फ्लैट में से किसी एक साइड को चुनना होगा।'
पाकिस्तान के पूर्व कप्तान आसिफ इकबाल ने इसे रुचिकर कंसेप्ट बताया है और वह पुरानी पद्यति को भी जानते हैं। आसिफ ने कहा, '70 के आखिर में जब क्रिकेट बढ़ने लगा, रंगीन पोशाक का परिचय हुआ, फ्लडलाइट्स में क्रिकेट खेला जाने लगा। सफदे गेंद आई। इसे देखते हुए बल्ले से टॉस कराने को नया आविष्कार भी कहा जा सकता है।'
इस नए नियम का परिचय क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने कराया
एमसीसी के क्रिकेट एकेडमी मैनेजर इयान फ्रेजर ने कहा, इस नए नियम का परिचय क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने कराया। इसके लिए एक कानून बनाने की जरूरत है। अभी कानून के इस हिस्से में लिखा है कि टॉस के लिए सिक्के का इस्तेमाल होगा।
एमसीसी खेल के कानून के संरक्षक हैं। कानून 13.4 में लिखा है, 'कप्तान पारी के विकल्प के लिए सिक्का उछाल सकता है। वह मैदान में एक या दो अंपायर की मौजूदगी में टॉस करा सकता है। मैच जिस समय होना है, उससे 30 मिनट जल्दी या ज्यादा से ज्यादा 15 मिनट के पहले टॉस हो जाना चाहिए।'
फ्रेजर ने कहा, 'एमसीसी का कानून में बदलाव करने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन वह समझते हैं कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने ऐसा विकल्प क्यों चुना। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का प्रयास पेशेवर खेल को जमीनी स्तर से जोड़ने का है। यह देखकर अच्छा लगा कि शोध करने के बाद ऐसे बल्ले बनाए गए कि दोनों ही टीमों के पास टॉस जीतने का बराबर मौका हो।'