तीसरा टेस्ट शुरू होते ही टूट गया 139 मैचों का पुराना सिलसिला
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एशेज सीरीज क्रिकेट जगत का सम्मानित टूर्नामेंट माना जाता है, और यह इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच पिछले 125 सालों से खेला जाता है। दुनिया की सबसे पुराने क्रिकेट सीरीज को लेकर दुनियाभर में काफी रोमांच होता है। इस बार यह सीरीज इंग्लैंड में खेली जाती है।
दूसरे टेस्ट में मिली शर्मनाक हार को भुलाकर इंग्लैंड बुधवार से बर्मिंघम में शुरू हो रहे तीसरे एशेज टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उतरेगा और बल्लेबाज जोए रूट को यकीन है कि मिचेल जॉनसन की अगुआई वाले विरोधी तेज आक्रमण से उनकी टीम आतंकित नहीं होगी। जॉनसन ने 2013–14 की एशेज सीरीज में 37 विकेट लिए थे जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 5–0 से मात दी थी।
फिलहाल जारी एशेज सीरीज के पहले टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया 169 रन से हार गया था। फिर दूसरे टेस्ट में पलटवार करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने 405 रन से मैच जीतकर सीरीज में 1–1 से बराबरी कर ली है। मेजबान टीम जहां इस मैच से सीरीज में वापसी करना चाहेगी वहीं अब तीसरे टेस्ट के शुरू होते ही 139 मैच का अनोखा रिकॉर्ड भी टूट गया। यह रिकॉर्ड अपने आप में बेहद दिलचस्प है।
आप उस रिकॉर्ड को जाने, इससे पहले एक अनोखे रिकॉर्ड के बारे में यहां भी जान लीजिए। दिसंबर, 2003 के बाद ऐसा पहली बार होगा जब इंग्लैंड टीम में सारे खिलाड़ी इंग्लैंड में जन्में हैं। दिसंबर 2003 में गाले टेस्ट में भारतीय मूल के नासिर हुसैन के अनफिट होने के कारण मैच में नहीं उतरे थे।
11 साल और 139 मैच पुराने रिकॉर्ड का हुआ 'THE END'
तीसरा टेस्ट शुरू होने के साथ ही इंग्लैंड क्रिकेट में उस 11 साल पुराने युग का समापन हो गया जो उसने 2004 यानी पिछले 11 साल से कायम रखा था।
2004 में एंटीगा में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेली जा रही टेस्ट सीरीज के चौथे मैच के बाद ऐसा पहली बार होगा जब इंग्लैंड की टीम में अफ्रीकी मूल खासकर दक्षिण अफ्रीका का कोई भी खिलाड़ी नहीं है। इंग्लैंड ने इस बीच 139 टेस्ट मैच खेले हैं जिसमें कोई न कोई दक्षिणी अफ्रीका का खिलाड़ी जरूर रहा है।
यह वही एंटीगा टेस्ट है जिसमें ब्रायन लारा ने वर्ल्ड रिकॉर्ड 400 रनों की नाबाद पारी खेली थी। इंग्लैंड की इस टीम में जोहांसबर्ग में जन्में एंड्रयू स्ट्रॉस शामिल थे। स्ट्रॉस के बाद इस टीम में अफ्रीकी खिलाड़ियों की बाढ़ सी आ गई। इस लिस्ट में केविन पीटरसन, मैट प्रायर, जोनाथन ट्रॉट और निक कॉम्पटन जैसे खिलाड़ी दक्षिण अफ्रीका में पैदा हुए थे। जबकि गैरी बालेंस जिम्बाब्वे में पैदा हुए थे।
दिलचस्प यह है कि ये सभी 6 अफ्रीकी क्रिकेटर बल्लेबाज थे और कुल मिलाकर 359 मैच खेले, जिसमें इन बल्लेबाजों ने 66 शतक भी ठोंक डाले। इसके अलावा दो अफ्रीकी क्रिकेटर (डंकन फ्लेचर और एंडी फ्लॉवर) इंग्लैंड टीम के कोच भी बने। हालांकि ये दोनों ही जिम्बाब्वे के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर रहे हैं।
2012 में स्ट्रॉर्स के टेस्ट से संन्यास लेने तक 2009 से 2012 के बीच इंग्लैंड ने 30 टेस्ट मैच खेले जिसमें स्ट्रॉस, जोनाथन ट्रॉट, पीटरसन और प्रायर टीम के शीर्ष 7 में से 4 बल्लेबाजों में रहे।
इंग्लैंड की टीम में अन्य देशों के खिलाड़ी भी शामिल हुए
पूर्व एंड्रयू स्ट्रॉस के टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण लेने के बाद से इंग्लैंड की टीम में कई देशों के खिलाड़ी शामिल किए गए। इस टीम में भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड, बारबाडोस के अलावा डेनमार्क के खिलाड़ियों को भी टीम में रखा गया।
दक्षिण अफ्रीका में जन्में अन्य क्रिकेटर जो इंग्लैंड टीम में आए और टेस्ट खेलने में कामयाब रहे, उनमें प्रमुख हैं माइकल लंब, क्रेग कीसवेटर, जेट डर्नबाच, स्टुअर्ट मीकर और जेसन रे।
ऐसा भी नहीं है कि इंग्लैंड टीम में दक्षिण अफ्रीका के खिलाड़ियों का जलवा इन पिछले 11 सालों में रहा है। इनसे पहले एलन लैंब और ग्रीम हीक ने भी इंग्लैंड टीम की शोभा बढ़ाई।