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धोनी ने जिसका किया विरोध वही टीम के आया काम
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 12 Jun 2013 07:37 PM IST
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बीसीसीआई और भारतीय कप्तान धोनी डीआरएस को पसंद नहीं करते और हर जगह इसकी जोरदार मुखालफत करते नजर आते हैं। लेकिन चैंपियंस ट्रॉफी में डीआरएस भारत के काफी काम आ रहा है।
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लेकिन यही डीआरएस है जिसने चैंपियंस ट्रॉफी में मंगलवार को भारत और वेस्ट इंडीज के खिलाफ मुकाबले के दौरान भारतीय टीम को तीन मौकों पर बचाया।
भारत द्वीपक्षीय सीरीज में डीआरएस को लागू करने का शुरू से ही विरोध करता रहा है यही कारण है जब भारत किसी दूसरे देश के साथ टेस्ट या वनडे सीरीज खेलता है तो वहां डीआरएस लागू नहीं होता।
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आईसीसी के नियमों के अनुसार, द्वीपक्षीय सीरीज में डीआरएस को लेकर दोनों टीमों की सहमति होनी चाहिए। जबकि आईसीसी के टूर्नामेंट्स या कई देशों के एक साथ खेली जाने वाली सीरीज में डीआरएस लगाया जाता है। इसीलिए चैंपियंस ट्रॉफी में डीआरएस लगा हुआ है।
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अब बात करते हैं भारत और वेस्ट इंडीज के बीच मंगलवार को हुए मैच की। इस मैच को भारत ने 65 गेंद शेष रहते आठ विकेट से अपने नाम किया था। हालांकि भारत की जीत में रवींद्र जडेजा के पांच विकेट और शिखर धवन के शानदार शतकीय पारी के अलावा डीआरएस के योगदान को भी नहीं भुलाया जा सकता।
किसी भी मैच में दोनों टीमों को दो-दो डीआरएस मिलते हैं। जिसका इस्तेमाल दोनों टीमें अपनी गेंदबाजी और बल्लेबाजी के दौरान करती हैं।
पहला डीआरएस भारत के पक्ष में
पहले बल्लेबाजी करने उतरी वेस्ट इंडीज की पारी के दौरान 22वां ओवर रवींद्र जडेजा फेंक रहे थे और ओवर की अंतिम गेंद पर मालोर्न सैमुअल्स को पगबाधा करने की जोरदार अपील की लेकिन अंपायर ने इसे ठुकरा दिया।
फिर जडेजा ने कप्तान धोनी के सलाह मशविरा कर डीआरएस मांगा जिसमें थर्ड अंपायर ने बल्लेबाज को आउट करार दिया। सैमुअल्स भी खतरनाक बल्लेबाज माने जाते हैं और उनके महज एक रन पर आउट होने से विंडीज टीम को करारा झटका लगा।
डीआरएस ने कार्तिक को बचाया
लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को धवन और रोहित ने 101 रनों की शतकीय साझेदारी कर जोरदार शुरुआत दिलाई। लेकिन सुनील नारायन ने जल्दी-जल्दी रोहित और विराट कोहली को पवेलियन भेज कर भारतीय खेमे में हलचल मचा दी।
21वें ओवर की तीसरी गेंद पर रवि रॉमपाल ने नए बल्लेबाज दिनेश कार्तिक जो अभी खाता भी नहीं खोल पाए थे को कैच आउट करा दिया। लेकिन कार्तिक ने कैच आउट के फैसले का विरोध किया और डीआरएस मांगा। डीआरएस में थर्ड अंपायर ने कार्तिक को नाट आउट करार दिया।
इसके बाद मिले मौके का फायदा उठाते हुए कार्तिक ने धवन के साथ शानदार शतकीय साझेदारी की और टीम को नायाब जीत भी दिला दी। साथ ही उन्होंने नाबाद अर्धशतक भी ठोका।
वेस्ट इंडीज को लगा तीसरा झटका
शुरुआत में जीवनदान पाने के बाद शिखर धवन ने एक छोर संभाले रखा था और टीम को आसानी से जीत की ओर ले जा रहे थे। तीसरे विकेट के लिए धवन ने कार्तिक के साथ अविजित साझेदारी लगाकर टीम को टूर्नामेंट में लगातार दूसरी जीत की पटकथा लिखी।
लेकिन उनकी इस भूमिका में डीआरएस का भी अहम योगदान रहा। 29वें ओवर की दूसरी गेंद पर धवन 80 रन पर खेल रहे थे और विंडीज को इस समय विकेट की सख्त दरकार थी। ऐसे में सुनील नारायन ने धवन को पगबाधा की जोरदार अपील की। अंपायर ने जब अपील ठुकरा दी तो विपक्षी टीम ने डीआरएस लिया। डीआरएस ने फिर भारत का साथ दिया और धवन को नाटआउट करार दिया। डीआरएस का फायदा उठाते हुए धवन ने अंतरराष्ट्रीय कैरियर में अपना लगातार तीसरा शतक ठोका।
विंडीज को भी मिला फायदा
ऐसा नहीं है कि इस मैच में विंडीज को डीआरएस का फायदा ही नहीं मिला। भारतीय पारी के दौरान जब धवन और रोहित शर्मा ने पहले विकेट के लिए शतकीय साझेदारी कर ली थी और टीम आसान जीत की ओर दिख रही थी ऐसे में कैरेबियाई टीम पहली सफलता के लिए संघर्ष कर रही थी।
16वें ओवर की तीसरी गेंद पर फिरकी गेंदबाज सुनील नारायन ने रोहित को कैच आउट करने की डीआरएस मांगी। जिसमें थर्ड अंपायर ने रोहित को आउट करार दिया। रोहित 52 रन बनाने के बाद कैच आउट हो गए।