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DRS पर भारत था सही, एशेज ने साबित किया यही
इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 15 Jul 2013 05:43 PM IST
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टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और बीसीसीआई लंबे समय से डीआरएस का विरोध करते रहे हैं। एशेज सीरीज के पहले टेस्ट मैच में डीआरएस के कुछ गलत फैसलों के बाद भारत का विरोध कुछ और पुख्ता हुआ है।
एशेज सीरीज के पहले टेस्ट मैच के पांचवें दिन ऑस्ट्रेलिया की अंतिम जोड़ी मैदान पर संघर्ष कर रही थी लेकिन डीआरएस के एक विवादास्पद फैसले ने कंगारू टीम की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
डीआरएस के इस विवादास्पद फैसले की बदौलत इंग्लैंड ने यह मैच 14 रनों से जीत लिया। इस जीत से पांच मैचों की सीरीज में इंग्लैंड ने 1-0 की बढ़त बना ली है।
ऐसा नहीं है कि डीआरएस की मदद से अंपायरों ने इस मैच में एक ही गलत फैसला दिया हो। इससे पहले इसी मैच में इंग्लैंड की दूसरी पारी में जोनाथन ट्रॉट को भी गलत तरीके से आउट दे दिया गया था।
गलत निर्णय पर मांगनी पड़ी माफीइसके लिए हॉटस्पॉट के आविष्कारक ने मैच के दूसरे दिन इंग्लिश बल्लेबाज ट्रॉट को तकनीक की गड़बड़ी से आउट दिए जाने के मामले में माफी मांगी है। मिशेल स्टार्क की एक गेंद ट्रॉट के पैड पर लगी और अंपायर ने पगबाधा की ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की अपील को ठुकरा दिया।
ऑस्ट्रेलिया ने रेफरल मांगा जिस पर तीसरे अंपायर ने मैदानी अंपायर के फैसले को पलटते हुए ट्रॉट को आउट करार दे दिया। ट्रॉट इस बात को लेकर निश्चिंत थे कि गेंद उनके पैड से टकराने से पहले बल्ले से टकराई थी। लेकिन रिप्ले के मुताबिक बल्ले और गेंद में कोई संपर्क नहीं हुआ था।
हॉटस्पॉट की खोज करने वाले वारेन ब्रेनन ने कहा, 'यह ऑपरेटर की गलती थी। ऑपरेटर ने ट्रॉट को डाली गई गेंद पर सिस्टम को चालू नहीं किया था। वह स्टार्क की पिछली गेंद पर जो रूट के आउट होने के मामले में उलझा हुआ था।'
डीआरएस पर भड़की ऑस्ट्रेलियाई मीडियाकंगारू टीम की हार पर ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने भी जमकर अपनी भड़ास निकाली है। उनका कहना है कि इस रोमांचक मुकाबले में डीआरएस के खराब इस्तेमाल का खमियाजा कंगारू टीम ने भुगता।
द सिडनी डेली टेलीग्राफ ने लिखा है कि ऑस्ट्रेलिया को डीआरएस का प्रयोग बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए था। उसे मैच के तीसरे दिन तक के लिए एक रिव्यू बचा के रखना चाहिए था ताकि वह इंग्लैंड के बल्लेबाज स्टुअर्ट ब्रॉड को आउट करने के लिए रिव्यू ले पाता।
ब्रॉड दूसरी पारी में बल्लेबाजी के दौरान उस समय स्लिप में कैच आउट हो गए थे जब विकेटकीपर ब्रैड हैडिन के हाथ से उलझकर स्लिप में खड़े माइकल क्लार्क ने आसानी से लपक लिया था।
आश्चर्यजनक रूप से अंपायर अलीम दार ने ब्रॉड को कैच आउट नहीं दिया था। जबकि रिप्ले में साफ दिख रहा था कि गेंद ने बल्ले का बाहरी किनारा लिया है।
आईसीसी के नए कदम का इंतजारऐसे में डीआरएस को लेकर भारत का विरोध और पुख्ता हुआ है। एशेज में दोनों टीमों को एक-एक गलत फैसले का सामना करना पड़ा।
हालांकि ऑस्ट्रेलिया के लिए यह ज्यादा खतरनाक साबित हुआ क्योंकि इस विवादास्पद फैसले से उनकी टीम मैच हार गई।
अब देखना होगा कि आईसीसी डीआरएस में सुधार के लिए और क्या नई योजना लाती है।
एशेज सीरीज के पहले टेस्ट मैच के पांचवें दिन ऑस्ट्रेलिया की अंतिम जोड़ी मैदान पर संघर्ष कर रही थी लेकिन डीआरएस के एक विवादास्पद फैसले ने कंगारू टीम की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
डीआरएस के इस विवादास्पद फैसले की बदौलत इंग्लैंड ने यह मैच 14 रनों से जीत लिया। इस जीत से पांच मैचों की सीरीज में इंग्लैंड ने 1-0 की बढ़त बना ली है।
ऐसा नहीं है कि डीआरएस की मदद से अंपायरों ने इस मैच में एक ही गलत फैसला दिया हो। इससे पहले इसी मैच में इंग्लैंड की दूसरी पारी में जोनाथन ट्रॉट को भी गलत तरीके से आउट दे दिया गया था।
गलत निर्णय पर मांगनी पड़ी माफीइसके लिए हॉटस्पॉट के आविष्कारक ने मैच के दूसरे दिन इंग्लिश बल्लेबाज ट्रॉट को तकनीक की गड़बड़ी से आउट दिए जाने के मामले में माफी मांगी है। मिशेल स्टार्क की एक गेंद ट्रॉट के पैड पर लगी और अंपायर ने पगबाधा की ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की अपील को ठुकरा दिया।
ऑस्ट्रेलिया ने रेफरल मांगा जिस पर तीसरे अंपायर ने मैदानी अंपायर के फैसले को पलटते हुए ट्रॉट को आउट करार दे दिया। ट्रॉट इस बात को लेकर निश्चिंत थे कि गेंद उनके पैड से टकराने से पहले बल्ले से टकराई थी। लेकिन रिप्ले के मुताबिक बल्ले और गेंद में कोई संपर्क नहीं हुआ था।
हॉटस्पॉट की खोज करने वाले वारेन ब्रेनन ने कहा, 'यह ऑपरेटर की गलती थी। ऑपरेटर ने ट्रॉट को डाली गई गेंद पर सिस्टम को चालू नहीं किया था। वह स्टार्क की पिछली गेंद पर जो रूट के आउट होने के मामले में उलझा हुआ था।'
डीआरएस पर भड़की ऑस्ट्रेलियाई मीडियाकंगारू टीम की हार पर ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने भी जमकर अपनी भड़ास निकाली है। उनका कहना है कि इस रोमांचक मुकाबले में डीआरएस के खराब इस्तेमाल का खमियाजा कंगारू टीम ने भुगता।
द सिडनी डेली टेलीग्राफ ने लिखा है कि ऑस्ट्रेलिया को डीआरएस का प्रयोग बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए था। उसे मैच के तीसरे दिन तक के लिए एक रिव्यू बचा के रखना चाहिए था ताकि वह इंग्लैंड के बल्लेबाज स्टुअर्ट ब्रॉड को आउट करने के लिए रिव्यू ले पाता।
ब्रॉड दूसरी पारी में बल्लेबाजी के दौरान उस समय स्लिप में कैच आउट हो गए थे जब विकेटकीपर ब्रैड हैडिन के हाथ से उलझकर स्लिप में खड़े माइकल क्लार्क ने आसानी से लपक लिया था।
आश्चर्यजनक रूप से अंपायर अलीम दार ने ब्रॉड को कैच आउट नहीं दिया था। जबकि रिप्ले में साफ दिख रहा था कि गेंद ने बल्ले का बाहरी किनारा लिया है।
आईसीसी के नए कदम का इंतजारऐसे में डीआरएस को लेकर भारत का विरोध और पुख्ता हुआ है। एशेज में दोनों टीमों को एक-एक गलत फैसले का सामना करना पड़ा।
हालांकि ऑस्ट्रेलिया के लिए यह ज्यादा खतरनाक साबित हुआ क्योंकि इस विवादास्पद फैसले से उनकी टीम मैच हार गई।
अब देखना होगा कि आईसीसी डीआरएस में सुधार के लिए और क्या नई योजना लाती है।
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