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Dilip Doshi Memories: दिलीप की ऑस्ट्रेलिया को हराने की जिद, पैर में फ्रैक्चर और दर्द के बावजूद करते रहे बॉलिंग
Tue, 24 Jun 2025 09:36 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Tue, 24 Jun 2025 09:36 AM IST
सार
दिलीप के लिए उनका सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन 1981 में एमसीजी में भारत की टेस्ट जीत में आया। तब उन्होंने पांच विकेट लिए थे और भारतीय टीम ने मामूली लक्ष्य का बचाव किया था।
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दिलीप दोषी
- फोटो : BCCI
विस्तार
बिशन सिंह बेदी के दौर में रहने के बावजूद अपने लिए अलग पहचान बनाने वाले भारत के पूर्व बाएं हाथ के स्पिनर दिलीप दोषी का सोमवार को लंदन में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 77 वर्ष के थे। सौराष्ट्र क्रिकेट संघ ने उनके निधन की पुष्टि की। लंबे समय से लंदन में रह रहे दिलीप अपने पीछे पत्नी कालिंगी, पुत्र नयन और पुत्री विशाखा को छोड़ गए हैं। उनके पुत्र नयन दोषी सरे और सौराष्ट्र के लिए प्रथम श्रेणी में खेले। दिलीप दोषी ने अपनी गेंदबाजी से ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों के मन में खौफ जगा दिया था। उनकी करियर बेस्ट गेंदबाजी 1981 में आई और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उस मैच में वह पैर में फ्रैक्चर के बावजूद खेले थे।
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1983 में खेला था आखिरी मैच
बेदी के संन्यास के बाद 1979 में दोषी ने टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया और 1983 में अपने कुल 33 टेस्ट में से आखिरी मैच खेला। टेस्ट में दिलीप ने छह बार पांच विकेट लेने के साथ 114 विकेट लिए। घरेलू मैदान पर तो उन्होंने असाधारण प्रदर्शन किया। उन्होंने केवल 28 टेस्ट मैचों में 100 विकेट पूरे किए। प्रथम श्रेणी में 898 विकेट चटकाए। इसमें उन्होंने 43 बार पारी में पांच विकेट लिए। वे कई वर्षों तक रणजी ट्रॉफी में बंगाल के सबसे अहम खिलाड़ी रहे। इसके अलावा उन्होंने सौराष्ट्र का भी प्रतिनिधित्व किया।
बेदी के संन्यास के बाद 1979 में दोषी ने टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया और 1983 में अपने कुल 33 टेस्ट में से आखिरी मैच खेला। टेस्ट में दिलीप ने छह बार पांच विकेट लेने के साथ 114 विकेट लिए। घरेलू मैदान पर तो उन्होंने असाधारण प्रदर्शन किया। उन्होंने केवल 28 टेस्ट मैचों में 100 विकेट पूरे किए। प्रथम श्रेणी में 898 विकेट चटकाए। इसमें उन्होंने 43 बार पारी में पांच विकेट लिए। वे कई वर्षों तक रणजी ट्रॉफी में बंगाल के सबसे अहम खिलाड़ी रहे। इसके अलावा उन्होंने सौराष्ट्र का भी प्रतिनिधित्व किया।
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1981 में करियर बेस्ट गेंदबाजी
दिलीप के लिए उनका सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन 1981 में एमसीजी में भारत की टेस्ट जीत में आया। तब उन्होंने पांच विकेट लिए थे और भारतीय टीम ने मामूली लक्ष्य का बचाव किया था। उस मैच में दोषी ने पैर की अंगुली में फ्रैक्चर के साथ गेंदबाजी की थी। एमसीजी की पिच पर गेंद कभी उछाल ले रही थी तो कभी नीचे रह रही थी। इस पिच पर कंगारुओं के लिए दिलीप दोषी को खेलना नामुमकिन था। दोषी, करसन घावरी और कपिल देव ने भारत के लिए वह मैच जीता था। दिलीप ने बाद में सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन से कहा था कि 'टूटी अंगुली के साथ गेंदबाजी उन्होंने इसलिए किया क्योंकि उन्हें विश्वास था कि टीम इंडिया मैच जीतेगी।' खेल के प्रति उनका जुनून इतना गहरा था।
दिलीप के लिए उनका सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन 1981 में एमसीजी में भारत की टेस्ट जीत में आया। तब उन्होंने पांच विकेट लिए थे और भारतीय टीम ने मामूली लक्ष्य का बचाव किया था। उस मैच में दोषी ने पैर की अंगुली में फ्रैक्चर के साथ गेंदबाजी की थी। एमसीजी की पिच पर गेंद कभी उछाल ले रही थी तो कभी नीचे रह रही थी। इस पिच पर कंगारुओं के लिए दिलीप दोषी को खेलना नामुमकिन था। दोषी, करसन घावरी और कपिल देव ने भारत के लिए वह मैच जीता था। दिलीप ने बाद में सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन से कहा था कि 'टूटी अंगुली के साथ गेंदबाजी उन्होंने इसलिए किया क्योंकि उन्हें विश्वास था कि टीम इंडिया मैच जीतेगी।' खेल के प्रति उनका जुनून इतना गहरा था।
सोबर्स ने दिलीप के लिए कही यह बात
सर गारफील्ड सोबर्स ने सही कहा था कि दिलीप दोषी के पास उन लोगों को देने के लिए अपार ज्ञान है जो पेशेवर क्रिकेट में उनके रास्ते पर चलना चाहते हैं। उन्होंने दुनिया भर में सभी स्तरों पर खेला है और स्पिन गेंदबाजी की कला के बारे में बात करने के लिए उनसे अधिक योग्य कोई नहीं हो सकता।' दिलीप सबसे सटीक गेंदबाजों में से एक थे, जो जरूरत पड़ने पर गेंद को फ्लाइट करते थे और अपने करियर के अधिकांश समय में उन्होंने विकेट टू विकेट सटीक गेंदबाजी की। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज की टीमों को उनके आर्म बॉल को खेलना हमेशा मुश्किल लगता था। चश्मा पहने यह क्रिकेटर दिल से एक सज्जन व्यक्ति था।
सर गारफील्ड सोबर्स ने सही कहा था कि दिलीप दोषी के पास उन लोगों को देने के लिए अपार ज्ञान है जो पेशेवर क्रिकेट में उनके रास्ते पर चलना चाहते हैं। उन्होंने दुनिया भर में सभी स्तरों पर खेला है और स्पिन गेंदबाजी की कला के बारे में बात करने के लिए उनसे अधिक योग्य कोई नहीं हो सकता।' दिलीप सबसे सटीक गेंदबाजों में से एक थे, जो जरूरत पड़ने पर गेंद को फ्लाइट करते थे और अपने करियर के अधिकांश समय में उन्होंने विकेट टू विकेट सटीक गेंदबाजी की। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज की टीमों को उनके आर्म बॉल को खेलना हमेशा मुश्किल लगता था। चश्मा पहने यह क्रिकेटर दिल से एक सज्जन व्यक्ति था।
कुंबले ने भी जताया दुख
रिटायरमेंट के बाद दिलीप लंदन चले गए थे, जहां वे एक सफल व्यवसायी बन गए। वे अपना अधिकांश वक्त लंदन, मुंबई और राजकोट में ही गुजारते थे। यह काफी अजीब बात थी कि बीसीसीआई ने कभी भी दोषी की विशेषज्ञता का उपयोग करने की जहमत नहीं उठाई। भारत के पूर्व कप्तान अनिल कुंबले ने भी दिवंगत क्रिकेटर को श्रद्धांजलि दी। कुंबले ने लिखा, 'दिलीप भाई के निधन के बारे में सुनकर दिल टूट गया। भगवान उनके परिवार और दोस्तों को इस दुख को सहने की शक्ति दे।'
रिटायरमेंट के बाद दिलीप लंदन चले गए थे, जहां वे एक सफल व्यवसायी बन गए। वे अपना अधिकांश वक्त लंदन, मुंबई और राजकोट में ही गुजारते थे। यह काफी अजीब बात थी कि बीसीसीआई ने कभी भी दोषी की विशेषज्ञता का उपयोग करने की जहमत नहीं उठाई। भारत के पूर्व कप्तान अनिल कुंबले ने भी दिवंगत क्रिकेटर को श्रद्धांजलि दी। कुंबले ने लिखा, 'दिलीप भाई के निधन के बारे में सुनकर दिल टूट गया। भगवान उनके परिवार और दोस्तों को इस दुख को सहने की शक्ति दे।'
सचिन को कराया था नेट अभ्यास
वहीं, सचिन तेंदुलकर ने दुख जताते हुए लिखा, 'मैं दिलीप भाई से पहली बार 1990 में यू.के. में मिला था और उस दौरे पर उन्होंने नेट्स में मेरे लिए गेंदबाजी की थी। वह वास्तव में मुझसे बहुत प्यार करते थे और मैंने भी उनकी भावनाओं का जवाब दिया। दिलीप भाई जैसे गर्मजोशी से भरे व्यक्ति की बहुत याद आएगी। मैं उन क्रिकेट संबंधी बातचीत को बहुत याद करूंगा जो हम हमेशा किया करते थे। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। ॐ शांति।'
वहीं, सचिन तेंदुलकर ने दुख जताते हुए लिखा, 'मैं दिलीप भाई से पहली बार 1990 में यू.के. में मिला था और उस दौरे पर उन्होंने नेट्स में मेरे लिए गेंदबाजी की थी। वह वास्तव में मुझसे बहुत प्यार करते थे और मैंने भी उनकी भावनाओं का जवाब दिया। दिलीप भाई जैसे गर्मजोशी से भरे व्यक्ति की बहुत याद आएगी। मैं उन क्रिकेट संबंधी बातचीत को बहुत याद करूंगा जो हम हमेशा किया करते थे। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। ॐ शांति।'
निरंजन शाह ने भी जताया दुख
सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष जयदेव शाह ने कहा- लंदन में दिलीप भाई को दिल का दौरा पड़ा। वह अब हमारे बीच नहीं हैं।' बीसीसीआई के पूर्व सचिव निरंजन शाह ने कहा, 'दिलीप का निधन मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। वह परिवार की तरह थे। वह बेहतरीन इंसानों में से एक थे।' भारतीय घरेलू सर्किट में उन्होंने बंगाल और सौराष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया। कुल मिलाकर उन्होंने प्रथम श्रेणी में 898 विकेट चटकाए। इसमें उन्होंने 43 बार पारी में पांच विकेट लिए। वे कई वर्षों तक रणजी ट्रॉफी में बंगाल के सबसे अहम खिलाड़ी रहे।
सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष जयदेव शाह ने कहा- लंदन में दिलीप भाई को दिल का दौरा पड़ा। वह अब हमारे बीच नहीं हैं।' बीसीसीआई के पूर्व सचिव निरंजन शाह ने कहा, 'दिलीप का निधन मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। वह परिवार की तरह थे। वह बेहतरीन इंसानों में से एक थे।' भारतीय घरेलू सर्किट में उन्होंने बंगाल और सौराष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया। कुल मिलाकर उन्होंने प्रथम श्रेणी में 898 विकेट चटकाए। इसमें उन्होंने 43 बार पारी में पांच विकेट लिए। वे कई वर्षों तक रणजी ट्रॉफी में बंगाल के सबसे अहम खिलाड़ी रहे।