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फ्लैश बैक: ध्यानचंद पेड़ से लकड़ी काटकर उससे खेल लेते थे हॉकी
amarujala.com-presented by: शरद मिश्र
Updated Wed, 04 Oct 2017 01:52 PM IST
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ध्यानचंद
- फोटो : hindustan times
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ध्यानचंद हॉकी के इस कदर दीवाने थे कि वह पेड़ से हॉकी के आकार की लकड़ी काटकर उससे खेलना शुरू कर देते थे। रात भर वह हॉकी खेलते रहते थे। उनको हॉकी के आगे कुछ याद नहीं रहता था। हॉकी के सामने वह पढ़ाई को भी भूल जाते थे। आलम यह था कि उनको वार्षिक परीक्षा में हर विषय पर जीरो अंक मिला करते थे। ऑन लाइन मीडिया के अनुसार ध्यानचंद के जब यह नंबर उनके पिता देखते थे तो वह उनकी पिटाई करते थे। लेकिन इसके बाद भी ध्यानचंद और हॉकी का साथ हमेशा बना रहता था।
पढ़ेंः- जानिए, सचिन तेंदुलकर कैसे हो गए भारत रत्न के लिए ध्यानचंद से आगे
1924 के पेरिस ओलंपिक से हॉकी हटा दी गई थी। इंटरनेशनल लेवल पर सुविधाएं नहीं होने की वजह से ऐसा किया गया था। बाद में 1928 में एम्सटडर्म में हॉकी को वापस लिया गया है। टीम इंडिया इसमें विजेता रही। इस ओलंपिक में ध्यानचंद ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया। ध्यानचंद हॉकी के जितने बड़े खिलाड़ी थे आर्थिक रूप से वह उतने ही छोटे इंसान थे। तभी तो ओलंपिक से स्वर्ण पदक जीतकर लौटे तो कर्ज नहीं चुका सके। तीन हजार रुपए का बकाया चुकाए जाने के लिए उन्होंने एक नुमाइश मैच खेला।
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पढ़ेंः- ध्यानचंद के खेल की एक महिला थी दीवानी, कही इतनी 'बड़ी' बात
अंतिम दिनों में तो ध्यानचंद को काफी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आजाद भारत की सरकार ने इसके बाद भी उनकी सुध नहीं ली। एक बार ध्यानचंद ने अपने फटे पेंट की वजह से फोटो खींचने से मना कर दिया था। वो नहीं चाहते थे कि ऐसा फोटो देखकर नई पीढ़ी हॉकी खेलना छोड़ देगी।
ध्यानचंद को भारत रत्न दिलाने के लिए हस्ताक्षर करें यहां- goo.gl/hYuwMF
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1924 के पेरिस ओलंपिक से हॉकी हटा दी गई थी। इंटरनेशनल लेवल पर सुविधाएं नहीं होने की वजह से ऐसा किया गया था। बाद में 1928 में एम्सटडर्म में हॉकी को वापस लिया गया है। टीम इंडिया इसमें विजेता रही। इस ओलंपिक में ध्यानचंद ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया। ध्यानचंद हॉकी के जितने बड़े खिलाड़ी थे आर्थिक रूप से वह उतने ही छोटे इंसान थे। तभी तो ओलंपिक से स्वर्ण पदक जीतकर लौटे तो कर्ज नहीं चुका सके। तीन हजार रुपए का बकाया चुकाए जाने के लिए उन्होंने एक नुमाइश मैच खेला।
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अंतिम दिनों में तो ध्यानचंद को काफी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आजाद भारत की सरकार ने इसके बाद भी उनकी सुध नहीं ली। एक बार ध्यानचंद ने अपने फटे पेंट की वजह से फोटो खींचने से मना कर दिया था। वो नहीं चाहते थे कि ऐसा फोटो देखकर नई पीढ़ी हॉकी खेलना छोड़ देगी।
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