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उपमहाद्वीप में धोनी का मुख्य हथियार बने ओझा
हेमंत रस्तोगी/नई दिल्ली
Updated Wed, 20 Mar 2013 09:12 PM IST
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न तो इस स्पिनर को बिशन सिंह बेदी सरीखी काबलियत वाला माना गया और न ही उन्हें डेनियल विटोरी के कद जैसा दर्जा मिला। बावजूद इसके महेंद्र सिंह धोनी ने खब्बू स्पिनर प्रज्ञान ओझा का जिस तरह इस्तेमाल किया है उससे उनकी कप्तानी की क्षमता में और चार चांद लग जाते हैं।
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ओझा को टेस्ट क्रिकेट में प्रवेश किए साढ़े तीन साल हुए हैं लेकिन वह ऐसे कारनामे से महज एक कदम दूर खड़े हैं जो अब तक किसी भारतीय गेंदबाज के हिस्से में नहीं आया है। हैदराबाद का यह गेंदबाज ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दिल्ली टेस्ट में खेला तो एक विकेट मिलते ही उनके शिकारों की संख्या सौ होगी। यह उनका 22वां टेस्ट होगा। इससे पहले खेले सभी 21 टेस्ट ओझा ने भारतीय उपमहाद्वीप की पिचों पर खेले हैं।
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तीन टेस्ट उन्होंने श्रीलंका और एक बांग्लादेश में खेलते हुए 12 विकेट लिए हैं। बाकी 17 टेस्ट उन्होंने भारतीय सरजमीं पर खेलते हुए 87 विकेट लिए हैं। 22वें टेस्ट में सौ विकेट पूरे करते ही ओझा देश में सबसे तेजी से यह कारनामा करने वाले खब्बू स्पिनर बन जाएंगे।
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यह ऐसा रिकॉर्ड होगा जो पिछले सौ वर्षों में कोई खब्बू स्पिनर नहीं कर पाया है। इंग्लैंड के कोलिन ब्लायथ ने 1901 में 19 टेस्ट मैचों में सौ विकेट लिए थे। भारत के लिए वीनू मांकड़ 23 टेस्ट मैचों में यह आंकड़ा छू चुके हैं।
प्रज्ञान से खासे प्रभावित हैं मनिंदर
अपने समय के बेहतरीन खब्बू स्पिनर मनिंदर सिंह तो ओझा के टेस्ट रिकॉर्ड से खासे प्रभावित हैं। उनका कहना है कि यह शानदार टेस्ट रिकॉर्ड है। सच्चाई यह है कि ओझा में ऐसी कोई विविधता नहीं है जिससे उसे दूसरों से अलग खड़ा किया जाए लेकिन उसने अपनी कमियों को ताकत बनाया है।
मनिंदर कहते हैं कि वह बिना कोई प्रयोग किए सिर्फ लाइन और लेंग्थ पर गेंद डालने की कोशिश करता है। इसी से उसने विकेट हासिल किए हैं। मनिंदर इसके लिए धोनी की भी प्रशंसा करते हैं।
वह कहते हैं कि धोनी ने ओझा का शानदार इस्तेमाल किया है। धोनी जानते हैं कि भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर ओझा उतने प्रभावशाली साबित नहीं होंगे इसलिए उन्होंने भारत से बाहर उन्हें मौका नहीं दिया लेकिन देश में खिलाने का भी मौका नहीं छोड़ा।
खुद धोनी ने मोहाली टेस्ट के बाद ओझा को खिलाने की वकालत करते हुए कहा कि पिछली सीरीजों में शानदार गेंदबाजी के बावजूद उन्हें पहले दो टेस्ट मैचों से बाहर रखा गया। इसमें उनकी कोई गलती नहीं थी। उनके प्रदर्शन को ही ध्यान में रख उन्हें फिर अंतिम एकादश में जगह दी गई है।