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तो क्या ये है धोनी के संन्यास की सबसे बड़ी वजह?

Wed, 31 Dec 2014 12:51 PM IST
Updated Wed, 31 Dec 2014 12:51 PM IST
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MS Dhoni retirement from Test Cricket - Analysis of Dhoni's Retirement

यह साल 1971 था जब भारत ने वेस्टइंडीज और इंग्लैंड को उसी के घर में पहली बार पटखनी देकर इतिहास रचा था। टीम के कप्तान अजीत वाडेकर को सिर आंखों पर बिठा लिया गया। यहां तक उन्हें उस वक्त देश का सर्वकालिक महान कप्तान करार दिया गया।

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ठीक तीन साल बाद जब इन्हीं वाडेकर की कप्तानी में भारत को इंग्लैंड में तीन टेस्टों की श्रृंखला में 0-3 से हार मिली तो वह ऐसे खलनायक बने कि कप्तान बनना तो दूर फिर कभी भारतीय टीम में खेलने के लिए नहीं चुने गए। महेंद्र सिंह धोनी के सन्यास ने 40 साल पुरानी इस घटना को फिर ताजा कर दिया है। फर्क सिर्फ इतना है वाडेकर को हटाया गया और यहां धोनी खुद विदेशी धरती पर हार के बोझ तले दब गए और अचानक सभी को स्तब्ध करने का वाला निर्णय ले डाला।
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यह पिछले तीन सालों में इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका में धोनी की कप्तानी में खेले गए 19 में से 14 टेस्ट मैचों में मिली हार का बोझ कहें या फिर दबाव जो उनके टेस्ट क्रिकेट से सन्यास के रूप में सामने आया है।
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विदेशी धरती पर हार ने किया मजबूर

MS Dhoni retirement from Test Cricket - Analysis of Dhoni's Retirement

अजीत वाडेकर बिना किसी लाग लपेट के कहते हैं कि धोनी की कप्तानी विदेशी धरती पर किसी तरह अच्छी नहीं रही। यह विदेशी धरती पर लगातार मिली हार ही थी जिसने धोनी की कप्तानी के रिकॉर्ड को खराब कर दिया। हालांकि वाडेकर यह भी कहते हैं कि धोनी को कम से कम इस श्रृंखला तक खेलना चाहिए था और सिडनी टेस्ट के बाद ही अपने सन्यास का ऐलान करना चाहिए था। वह यह भी मानते हैं कि यह विदेशी धरती पर हार ही थी जिसने धोनी को इस निर्णय पर पहुंचने के लिए मजबूर किया होगा।

धोनी ने 60 टेस्ट मैचों में कप्तानी की जिसमें 27 में जीत हासिल की तो 18 में उनके हिस्से में हार आई। इसमें भी 14 टेस्ट उन्होंने पिछले तीन सालों में विदेशी धरती पर हारे जबकि सिर्फ इस साल उन्हें लार्ड्स में ही एक जीत नसीब हुई। सिर्फ कप्तान के तौर पर ही नहीं बल्कि एक बल्लेबाज के तौर पर भी वह विदेशी धरती पर असफल रहे। इन 19 टेस्ट मैचों में उन्होंने एक भी शतक नहीं जड़ा।

वहीं मेलबर्न में मौजूद महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर इस निर्णय पर हैरान नहीं हैं। उनका कहना है कि विराट कोहली ने जिस तरह एडीलेड टेस्ट में कप्तानी की। उन पर दबाव बन गया था। वहीं पूर्व टेस्ट कप्तान सौरव गांगुली भी श्रृंखला के बीच में ही धोनी के स्थान पर विराट को कप्तानी देनी की वकालत करने लग पड़े थे। बावजूद इसके श्रृंखला के बीच में उनका यह निर्णय खेल प्रेमियों को जरूर हैरान कर गया है।

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