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भाला फेंक: नीरज चोपड़ा के गोल्ड ने बदली जैवलिन की किस्मत, एकेडमी से लेकर दुकानों तक हर जगह बढ़ी लोकप्रियता
Wed, 06 Oct 2021 04:34 PM IST
शक्तिराज सिंह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Wed, 06 Oct 2021 04:34 PM IST
सार
नीरज चोपड़ा के गोल्ड मेडल जीतने के बाद जैवलिन की मांग में तेजी आई है। जैवलिन सिखाने वाले कोच के पास रोजाना कम से कम आधा दर्जन कॉल आ रहे हैं और बच्चे जैवलिन सिखाने के लिए कह रहे हैं।
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नीरज चोपड़ा
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक में जैवलिन (भाला फेंक) खेल में सोना जीतकर इस खेल की किस्मत बदल दी है। नीरज के सोना जीतने के बाद इस खेल की अहमियत बढ़ गई है और खेल के सामान की दुकानों से लेकर एकेडमी तक हर जगह जैवलिन की मांग बढ़ी है। अब दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम जैसे बड़े खेल संस्थानों में भी इस खेल को बढ़ावा दिया जा रहा है। यहां इस खेल से जुड़े नए लोगों की भर्ती हो रही है और खेल की दुकानों में भी भाले की मांग बढ़ गई है। फुटकर दुकानदार पहले की तुलना में ज्यादा मात्रा में भाले की मांग कर रहे हैं। ओलंपिक में इस खेल में भाग लेने वाले एक खिलाड़ी ने बताया कि उसे रोजाना कम से कम आधा दर्जन मैसेज आ रहे हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक टोक्यो ओलंपिक में नीरज चोपड़ा के स्वर्ण पदक जीतने के बाद जमीनी स्तर पर इस खेल की लोकप्रियता बढ़ी है। अब भारत का एथलेटिक्स फेडरेशन भी इस खेल को बढ़ावा देने जा रहा है। एथलेटिक्स फेडरेशन ने कहा है अब हर साल सात अगस्त के दिन सभी राज्य सालाना भाला फेंक प्रतियोगिता का आयोजन करेंगे। सात अगस्त के दिन ही नीरज चोपड़ा ने गोल्ड जीता था। यह दूसरा मौका था, जब भारत के लिए किसी खिलाड़ी ने व्यक्तिगत पदक जीता था। वहीं ट्रैक और फील्ड में यह भारत का पहला ओलंपिक मेडल था। इसके अलावा फिनलैंड के साथ भी जैवलिन (भाला फेंक) को लेकर साझेदारी की बात चल रही है, जो कि इस खेल में सबसे आगे है।
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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक टोक्यो ओलंपिक में नीरज चोपड़ा के स्वर्ण पदक जीतने के बाद जमीनी स्तर पर इस खेल की लोकप्रियता बढ़ी है। अब भारत का एथलेटिक्स फेडरेशन भी इस खेल को बढ़ावा देने जा रहा है। एथलेटिक्स फेडरेशन ने कहा है अब हर साल सात अगस्त के दिन सभी राज्य सालाना भाला फेंक प्रतियोगिता का आयोजन करेंगे। सात अगस्त के दिन ही नीरज चोपड़ा ने गोल्ड जीता था। यह दूसरा मौका था, जब भारत के लिए किसी खिलाड़ी ने व्यक्तिगत पदक जीता था। वहीं ट्रैक और फील्ड में यह भारत का पहला ओलंपिक मेडल था। इसके अलावा फिनलैंड के साथ भी जैवलिन (भाला फेंक) को लेकर साझेदारी की बात चल रही है, जो कि इस खेल में सबसे आगे है।
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छत्रसाल स्टेडियम में जैवलिन के 40 नए छात्र
कुश्ती के अखाड़े के लिए प्रसिद्ध छत्रसाल स्टेडियम में 40 नए छात्रों ने जैवलिन सीखने के लिए एडमिशन लिया है। कोच रमन झा ने कहा "मैनें अपने 12 साल के करियर में कभी इस खेल के प्रति इतनी रुचि नहीं देखी है। दौड़ने वाले कुछ युवा लड़कों ने भी ओलंपिक के बाद मुझसे जैवलिन में आने की इच्छा जाहिर की। मुझे रोजाना कई युवा एथलीट और उनके माता-पिता के फोन आते हैं। ये सभी लोग जैवलिन सीखने के लिए एडमिशन लेना चाहते हैं।" दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में ट्रेनिंग देने वाले पूर्व एथलीट सुनील गोस्वामी ने कहा कि जैवलिन की लोकप्रियता सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है।
सुनील गोस्वामी ने कहा "मेरे कई दोस्त हैं जो देश भर में अलग-अलग जगहो पर कोचिंग देते हैं। उनका कहना है कि नीरज चोपड़ा के गोल्ड जीतने के बाद हर लड़का जैवलिन में अपना करियर बनाना चाहता है। शहर के बाहर के बच्चे मेरे पास आते हैं और जैवलिन सिखाने के लिए कहते हैं। ये सभी इससे पहले जिम्नास्ट, दौड़ और टेनिस जैसे खेल सीख रहे थे।"
सुनील गोस्वामी ने कहा "मेरे कई दोस्त हैं जो देश भर में अलग-अलग जगहो पर कोचिंग देते हैं। उनका कहना है कि नीरज चोपड़ा के गोल्ड जीतने के बाद हर लड़का जैवलिन में अपना करियर बनाना चाहता है। शहर के बाहर के बच्चे मेरे पास आते हैं और जैवलिन सिखाने के लिए कहते हैं। ये सभी इससे पहले जिम्नास्ट, दौड़ और टेनिस जैसे खेल सीख रहे थे।"
दुकानों में भी दिख रहा है असर
खेल के सामान की दुकानों में भी इसका असर दिख रहा है। इंदौर में खेलों का सामान बनाने वाली एक कंपनी अमेंटम स्पोर्ट्स के अनुसार अगस्त से लेकर भाले की मांग कम से कम तीन गुना बढ़ी है। खासकर 10,000 रुपये तक की कीमत वाले भालों की मांग में बहुत तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। इस कंपनी से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया "ओलंपिक के बाद चीजें काफी तेजी से बदली हैं। हमें पूरे देश से फोन आ रहे हैं। हमारे पास कई बेहतरीन भाले भी हैं, जिनकी कीमत 1 लाख रुपये से ज्यादा है। कई ग्राहक ऐसे भी हैं, जिन्होंने पहले सस्ता भाला खरीद लिया और अब महंगा भाला लेकर देखना चाहते हैं।"