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12 मैच में सिर्फ तीन बार ही सचिन पर भारी पड़े वार्न, सपनों में खाए थे छह गेदों में छह छक्के

Tue, 28 Apr 2020 03:40 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: अंशुल तलमले Updated Tue, 28 Apr 2020 03:40 PM IST
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Brett Lee Shares Interesting Anecdotes On Sachin Tendulkar-Shane Warne Rivalry On Star Sports
सचिन तेंदुलकर - फोटो : social media
सचिन तेंदुलकर और शेन वार्न जब खेला करते थे तो उनके बीच की जंग बहुचर्चित हुआ करती थी और अब ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली ने स्वीकार किया इसमें अधिकतर भारतीय स्टार ही अव्वल साबित हुआ जिन्होंने उनके साथी गेंदबाज को कई बार अपने इशारों पर नचाया।
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तेंदुलकर ने वार्न के खिलाफ कई यादगार पारियां खेली। उन्होंने वार्न के रहते हुए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जो 12 टेस्ट मैच खेले उनमें 60 से अधिक औसत से रन बनाए। इसमें पांच शतक और पांच अर्धशतक भी शामिल है। वार्न की मौजूदगी वाले 17 वन-डे में उन्होंने 58.70 की औसत और पांच शतकों की मदद से 998 रन बनाए।
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ब्रेट ली ने वार्न और तेंदुलकर के बीच मुकाबले के अलावा खुद इस स्टार बल्लेबाज का विकेट लेने की खुशी को भी बयां किया। ली ने स्टार स्पोर्ट्स के कार्यक्रम ‘क्रिकेट कनेक्टेड’ में कहा, ‘‘वह (तेंदुलकर) कुछ अवसरों पर विकेट से आगे आकर वार्न को शार्ट पिच गेंद करने के लिए मजबूर करते थे। कुछ अवसरों पर वह बैकफुट पर जाकर गेंद का इंतजार करते और खूबसूरत शॉट खेलते थे।’
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ब्रेट ली ने कहा, ‘यह वार्न को अपने इशारों पर नचाने जैसा था। शेन वार्न के साथ बहुत कम बल्लेबाज ऐसा कर सकते थे क्योंकि वह बेहद प्रतिभाशाली था, लेकिन कई अवसरों पर सचिन तेंदुलकर ऐसा करता था।’ ली ने कहा कि तेंदुलकर को आउट करने के लिए वार्न कई तरह के वैरीएशन भी अपनाते थे, लेकिन भारतीय दिग्गज गेंदबाज के हाथ से गेंद छूटते ही उसका सही अनुमान लगाने में माहिर थे और ऐसे में दुनिया भर के बल्लेबाजों को परेशान करने वाले वार्न उनके सामने नाकाम रहे।

इस तेज गेंदबाज ने कहा, ‘सचिन जिस तरह गेंदबाज के हाथ से गेंद छूटते ही उसे समझ जाता था और भिन्न तरह की गेंदों को खेलने के लिए भिन्न तकनीक का उपयोग करता था वह लाजवाब था। वार्न कई बार हवा में गेंद को दिशा देने की कोशिश करता था तो कई बार नहीं। जब भी वह गेंद में वैरीएशन लाता था कि सचिन उसे समझ लेता था।’

उन्होंने कहा, ‘‘वार्न ने दुनिया भर के अन्य बल्लेबाजों को परेशानी में डाला, लेकिन सचिन अन्य बल्लेबाजों की तुलना में गेंद का सही अनुमान लगाता था। वार्न को इससे नफरत थी। वह वापस आकर कहता था कि उसने सचिन को आउट करने के लिए अपनी तरफ से हर संभव प्रयास किए, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया।’

वार्न 12 टेस्ट मैचों में केवल तीन बार तेंदुलकर को आउट कर पाए थे। ली ने 2003 मेलबर्न में खेले गए ‘बॉक्सिंग डे’ टेस्ट मैच का भी जिक्र किया, जब उन्होंने पहली बार तेंदुलकर का सामना किया और पहली गेंद पर ही उन्हें विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट के हाथों कैच कराया।

उन्होंने कहा, ‘मैं तब 22 साल का था जब मुझे लिटिल मास्टर के खिलाफ खेलने का पहला अवसर मिला। मेरी गेंद उनके बल्ले का किनारा लेकर गई और मुझे लगा कि मैंने अपना काम कर दिया। मुझे टेस्ट मैच की परवाह नहीं थी क्योंकि मैं सचिन तेंदुलकर को आउट करके बहुत खुश था।’


1998 में शरजाह में वार्न की सचिन ने ऐसी पिटाई लगाई कि ऑस्ट्रेलियाई लेग स्पिनर के सपने में तेंदुलकर आने लगे। इसका खुलासा करते हुए वार्न ने कहा था कि वह सपने में आकर भी मुझे छक्के मारता है। शरजाह में खेले गए कोका कोला कप में सचिन के शानदार खेल से भारत ने ट्राई सीरीज जीती थी।
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