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डेक्कन को कोर्ट से भी मिली निराशा
मुंबई/एजेंसी
Updated Thu, 18 Oct 2012 07:16 PM IST
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आईपीएल की फ्रेंचाइजी के रूप में मान्यता गंवा चुकी डेक्कन चार्जर्स को अब कोर्ट से भी निराशा हाथ लगी है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को अपने फैसले में डेक्कन की फ्रेंचाइजी रद्द करने के निर्णय को बरकरार रखा है। कोर्ट ने डेक्कन क्रोनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड और बीसीसीआई के बीच मामले की सुनवाई करते हुए डेक्कन चार्जर्स को आईपीएल की फ्रेंचाइजी के रूप में बहाल रखने के मध्यस्थों के निर्णय को रद्द कर दिया।
बीसीसीआई ने डेक्कन चार्जर्स को आईपीएल फ्रेंचाइजी बहाल रखने के मध्यस्थों के निर्णय के खिलाफ न्यायालय में अपील की थी। इससे पहले मामले पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने मध्यस्थों के निर्णय पर रोक लगा दी थी। बोर्ड ने अपने बयान में कहा कि बीसीसीआई ने मध्यस्थों के निर्णय के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी। हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने मध्यस्थों के निर्णय पर रोक लगा दी है। ऐसे में डेक्कन की फ्रेंचाइजी रद्द करने का निर्णय बरकरार है।
गौरतलब है कि डेक्कन चार्जर्स आईपीएल की फ्रेंचाइजी के रूप में बने रहने के लिए बीसीसीआई की निर्धारित 100 करोड़ रूपए की बैंक गारंटी नहीं दे पाई थी। इसके बाद बोर्ड ने डेक्कन की फ्रेंचाइजी को रद्द कर दिया था। बोर्ड के इस निर्णय के खिलाफ डेक्कन ने हाई कोर्ट में अपील की थी। इस मामले में न्यायालय द्वारा हाई कोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश सी के ठक्कर को मध्यस्थ नियुक्त किया गया था। मामले में मध्यस्तता कर रहे न्यायाधीश ने 17 अक्टूबर तक बोर्ड से डेक्कन की फ्रेंचाइजीबहाल रखने को कहा था।
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बीसीसीआई ने डेक्कन चार्जर्स को आईपीएल फ्रेंचाइजी बहाल रखने के मध्यस्थों के निर्णय के खिलाफ न्यायालय में अपील की थी। इससे पहले मामले पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने मध्यस्थों के निर्णय पर रोक लगा दी थी। बोर्ड ने अपने बयान में कहा कि बीसीसीआई ने मध्यस्थों के निर्णय के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी। हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने मध्यस्थों के निर्णय पर रोक लगा दी है। ऐसे में डेक्कन की फ्रेंचाइजी रद्द करने का निर्णय बरकरार है।
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गौरतलब है कि डेक्कन चार्जर्स आईपीएल की फ्रेंचाइजी के रूप में बने रहने के लिए बीसीसीआई की निर्धारित 100 करोड़ रूपए की बैंक गारंटी नहीं दे पाई थी। इसके बाद बोर्ड ने डेक्कन की फ्रेंचाइजी को रद्द कर दिया था। बोर्ड के इस निर्णय के खिलाफ डेक्कन ने हाई कोर्ट में अपील की थी। इस मामले में न्यायालय द्वारा हाई कोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश सी के ठक्कर को मध्यस्थ नियुक्त किया गया था। मामले में मध्यस्तता कर रहे न्यायाधीश ने 17 अक्टूबर तक बोर्ड से डेक्कन की फ्रेंचाइजीबहाल रखने को कहा था।
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