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विजय मर्चेंट: वह भारतीय क्रिकेटर, जिन्हें 'गोरा' बनाकर अंग्रेज अपनी टीम में लेना चाहते थे

Sat, 12 Oct 2019 12:17 PM IST
Anshul Talmale अंशुल तलमले
Updated Sat, 12 Oct 2019 12:17 PM IST
सार

  • सेंचुरी जड़ने वाले सबसे बुजुर्ग क्रिकेटर
  • 68 साल बाद भी कोई नहीं तोड़ पाया रिकॉर्ड

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Birthday special of Vijay Merchant, Indias one of the greatest batsman
विजय मर्चेंट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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12 अक्टूबर 1911 को मुंबई में एक बच्चे का जन्म होता है। बेहद संभ्रांत और धनी परिवार में जन्में इस बच्चे का नाम घरवाले प्यार से विजय रखते हैं। दुनिया उन्हें पहले विजय ठाकरे के नाम से जानती हैं, लेकिन स्कूल के दिनों में हुए एक छोटी सी उलझन कब उन्हें ठाकरे से मर्चेंट बना देती है, इसकी पूरी कहानी आज भी अच्छे से किसी को नहीं पता।

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1987 को आखिरी सांस लेने वाले मर्चेंट अगर आज जीवित होते तो अपना 108वां जन्मदिन मना रहे होते। भारत के डॉन ब्रैडमैन कहलाए जाने वाले इस खिलाड़ी को कोई बल्ला थामे देख लेता तो गेंदबाजी करने से घबराने लगता था। शायद यही वजह है कि मुंबई से आने वाले सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज खिलाड़ियों ने मर्चेंट को आदर्श मानकर उनके ही पदचिन्हों का अनुसरण किया।

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इसे विजय की करियर की खासियत ही कहेंगे कि उन्होंने अपने इंटरनेशनल करियर के सारे मैच इंग्लैंड के ही खिलाफ खेले। दिखने में उनका अंतरराष्ट्रीय करियर काफी लंबा लग सकता है, लेकिन उस दौरान उन्होंने महज 10 ही टेस्ट मैच खेले। अपने करियर की शुरुआत 1933 में इंग्लैंड के खिलाफ की तो करियर का आखिरी मैच 18 साल बाद 1951 में खेला, जिसमें विजय ने 47.72 की औसत से कुल 859 रन अपने नाम किए। इसमें तीन शतक और तीन अर्धशतक भी शामिल हैं। बल्लेबाजी में विजय भले ही सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज गिने जाते थे मगर वह पूरे करियर में एक मैच नहीं जीत पाए। जी हां उन्होंने 10 टेस्ट खेले और सभी में हार मिली।

जब अंग्रेज चाहते थे सफेद रंग पोतना

Birthday special of Vijay Merchant, Indias one of the greatest batsman
विजय मर्चेंट (बाएं) - फोटो : ट्विटर

कॉलेज के दिनों से ही क्रिकेट में रूचि रखने वाले विजय मर्चेंट ने उन प्रतियोगिताओं में जमकर रन ठोके। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में भी यह फॉर्म बरकरार रहा। शायद यही कारण था कि उन्हें जल्द ही भारतीय टीम के लिए चुन लिया गया, लेकिन देशभक्ति की भावना और गांधी जी के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने मैच खेलने से इनकार कर दिया।

दरअसल, इंग्लैंड टीम पहली बार भारत दौरे पर आ रही थी और उसी सीरीज के लिए मर्चेंट को टीम में चुना गया था, मगर महात्मा गांधी समेत कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उस वक्त जेल डाल दिए गए थे, इसी के विरोध में विजय मर्चेंट ने अंग्रेजों के खेल का विरोध करते हुए खुद को टीम से बाहर कर लिया।

अगर विजय मर्चेंट वह मैच खेलते तो भारत के पहले इंटरनेशनल टेस्ट मैच टीम के सदस्य होते। चार साल बाद 1933-34 में जब भारतीय टीम ने इंग्लैंड का दौरा किया तब वह उस टीम में शामिल हो गए, क्योंकि तब तक भारत में स्वतंत्रता आंदोलन के सभी बड़े नेता जेल से छोड़े जा चुके थे।


विजय ने जब 1933 में 22 साल की उम्र में भारत के लिए पहला मैच खेला, वह भारतीय टीम का सिर्फ दूसरा टेस्ट मैच ही था। विजय मर्चेंट ने 1936 में इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में शतक बनाया था। विजय की पारी देख तब इंग्लिश क्रिकेटर सीबी फ्राई ने कहा था, ‘चलो हम उन्हें (विजय मर्चेंट) को रंग देते हैं और उन्हें ऑस्ट्रेलिया ले चलते हैं ताकि वे हमारी तरफ से ओपनिंग कर सकें।’

द्वितीय विश्व युद्ध ने करियर पर लगाया ब्रेक

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विजय मर्चेंट - फोटो : ट्विटर

विजय मर्चेंट का इंटरनेशनल करियर वैसे तो करीब 18 साल का रहा, लेकिन इसक बीच में करीब 10 साल दूसरे विश्व युद्ध की भेंट चढ़ गए। इस कारण विजय मर्चेंट अपने करियर में 10 टेस्ट मैच ही खेल पाए। 1951 में उनके कंधे में चोट लग गई। इस कारण उन्होंने संन्यास ले लिया। विजय ने 10 टेस्ट में 47.72 की औसत से 859 रन बनाए, इसमें तीन शतक और इतने ही अर्धशतक शामिल हैं। दुर्भाग्य से विजय मर्चेंट भारत की किसी भी जीत का हिस्सा नहीं बन पाए।

विजय मर्चेंट को अगर भारत का ब्रैडमैन कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। रणजी में 98.75 की औसत से उन्होंने रन बनाए, जो प्रथम श्रेणी क्रिकेट में महान बल्लेबाज डॉन ब्रैडमैन के बाद सबसे ज्यादा है। क्रिकइन्फो के डेटा के मुताबिक विजय ने कुल 150 फर्स्टक्लॉस मैच खेले जिसमें उनके नाम 71.64 की औसत से 13,470 रन दर्ज हैं। इसमें 45 शतक और 52 अर्धशतक शामिल हैं। यही नहीं उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 359 रन है।

40 और 50 के दशक में विजय मर्चेंट की बेहतरीन बल्लेबाजी ने दुनिया के बड़े-बड़ें क्रिकेटर उनकी बल्लेबाजी के कायल हो गए। विजय मर्चेंट के नाम पर भारत में एक घरेलू टूर्नामेंट भी खेला जाता है। इसमें अंडर 16 के मैच खेले जाते हैं।

भारतीय क्रिकेट का 'विजय युग'

Birthday special of Vijay Merchant, Indias one of the greatest batsman
विजय मर्चेंट (बाएं) विजय मांजरेकर (मध्य) विजय हजारे (दाएं) - फोटो : ट्विटर

1951-52 में इंग्लैंड के खिलाफ दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में खेली 154 रन की पारी आज भी किसी भी भारतीय क्रिकेटर द्वारा सबसे ज्यादा उम्र में लगाया गया टेस्ट शतक है। 1937 में विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर से नवाजे गए विजय मर्चेंट की आजाद भारत के पहले कप्तान विजय हजारे के साथ प्रतिद्वंद्विता जगजाहिर है, लेकिन दोनों एक-दूसरे को सिर्फ बल्ले से ही जवाब देते थे।

आपसी रिश्ते हमेशा दोनों के बीच मधुर ही बने रहे। 1933 से 1960 के बीच भारतीय क्रिकेट में 'विजय राज' था। विजय मर्चेंट, विजय हजारे के साथ विजय मांजरेकर की तिकड़ी गुलामी से मिले इस खेल में भारत को नई दिशा दिखा रही थी।

मर्चेंट ने क्रिकेट से जरूर संन्यास ले लिया, लेकिन खुद को इस खेल से अलग नहीं कर पाए। बोर्ड में शामिल हुए। 1960 में चयनसमिती के प्रमुख भी बनाए गए। सुनील गावस्कर, एकनाथ सोल्कर, गुंडप्पा विश्वनाथ सरीखे दिग्गज बल्लेबाजों को तलाशने का श्रेय विजय मर्चेंट को ही जाता है। विविध भारती में बतौर कमेंटेटर भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी।

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