बर्थडे स्पेशल: कभी सचिन को खुलेआम सुनाई थी खरी-खोटी, फिर सालों बाद मांजरेकर ने खोला रिश्तों का सच
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टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर और मशहूर कमेंटेटर संजय मांजरेकर गुरुवार को अपना 53वां जन्मदिन मना रहे हैं। 12 जुलाई 1965 को बेंगलुरु में जन्में संजय को क्रिकेट विरासत में मिली। उनके पिता विजय मांजरेकर भी अपने दौर के बेहतरीन बल्लेबाज माने जाते थे।
मुंबई की ओर से क्रिकेट खेलने वाले संजय को पहली बार 1987 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला। उनके वनडे करियर का आगाज भी वेस्टइंडीज के ही साथ 1988 के दौर में हुआ।
संजय मांजरेकर उन चुनिंदा लोगों की फेहरिस्त में शुमार हैं, जिन्होंने 'क्रिकेट के भगवान' कहलाए जाने वाले सचिन तेंदुलकर पर ताना कसने में जरा भी संकोच नहीं किया था। एक समय ऐसा भी था, जब संजय मांजरेकर ने सचिन के बारे में अपने आलोचनात्मक विचार रखे थे।
उन्होंने सचिन से जुड़े दो ऐसे खुलासे किए थे, जिन्हें सुनकर सचिन के फैंस आज तक हैरान हैं। दरअसल मांजरेकर ने सचिन के राज्यसभा मेंबर बनने और करियर के आखिरी दौर में उनके रवैये को लेकर तीखी टिप्पणी की थी।
संजय मांजरेकर ने कहा था, 'जब कभी मेरे जहन में सचिन की रिटायरमेंट को लेकर खयाल आता था, तो मैं हमेशा सोचता था कि सचिन आगे चलकर कोचिंग, बिजनेस या सोशल एक्टिविटी के जरिए किसी न किसी तरह से क्रिकेट से जुड़े रहेंगे। मगर विश्वकप विजेता खिलाड़ी ने क्रिकेट से जुड़ने की बजाये राज्यसभा का सदस्या बनना ज्यादा बेहतर विकल्प समझा।'
इसके अलावा, मीठे शब्दों में सचिन की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा था कि सचिन जब अपने करियर के अंतिम पड़ाव से गुजर रहे थे, तब कई बार उनकी वजह से टीम में गलत चीजें घट रही थीं। यह ऐसा समय था जब सचिन बेहद खराब फॉर्म से गुजर रहे थे, लेकिन महज एक प्रतिष्ठित खिलाड़ी होने की वजह से कोई भी उन्हें प्लेइंग-11 से बाहर बिठाने की हिम्मत नहीं कर रहा था। खराब फॉर्म में रहते हुए लगातार टीम में बने रहना दूसरे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के साथ मजाक है।
कुछ समय पहले लॉन्च हुई अपनी ऑटोबायोग्राफी 'इम्परफैक्ट' में संजय ने सचिन के साथ उनके रिश्ते का भी जिक्र किया था। मगर यहां उनके विचार बेहद अलग थे। मांजरेकर ने कहा था कि, 'सचिन और मैं ग्राउंड पर बेशक एक-दूसरे से टकराते रहे हों, लेकिन ऑफ द फील्ड वह एक बेहतर इंसान हैं और हम दोनों हमेशा से अच्छे दोस्त रहे हैं।