फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Cricket ›   Cricket News ›   BCCI Treasurer Arun Dhumal confirms BCCI has no plans to end association with Vivo

चीन का बहिष्कार: VIVO से करार खत्म नहीं करेगा BCCI, धूमल बोले- पैसा भारत आ रहा न कि जा रहा

Fri, 19 Jun 2020 10:16 AM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अंशुल तलमले Updated Fri, 19 Jun 2020 10:16 AM IST
सार

चीनी कंपनी वीवो से हर साल स्पॉन्सरशिप के जरिए 440 करोड़ रुपये मिलते हैं। वीवो ने 2018 में 2199 करोड़ रुपये में पांच साल के लिए यह अनुबंध हासिल किया था, जो 2022 में खत्म होगा। वहीं दूसरी ओर भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के महासचिव राजीव मेहता ने कहा कि आईओए को लि-निंग के साथ अपने प्रायोजन को खत्म करना चाहिए। यह कंपनी टोक्यो ओलंपिक में भारतीय दल के किट की प्रायोजक है। आइओए ने मई 2018 में लि-निंग के साथ करार किया था। करार के मुताबिक कंपनी खिलाडि़यों के कपड़े, जूते प्रायोजित करेगी।

विज्ञापन
BCCI Treasurer Arun Dhumal confirms BCCI has no plans to end association with Vivo
आईपीएल 2020 - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

लद्दाख के गलवां घाटी में भारत-चीन के बीच खूनी संघर्ष के बाद देशभर में चीनी सामानों, कंपनियों के बहिष्कार की मांग तेज हो गई है। कयास लगाए जा रहे थे कि इसका असर इंडियन प्रीमियर लीग और टीम इंडिया पर भी पड़ेगा, लेकिन गुरुवार को बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष अरुण कुमार धूमल ने स्पष्ट कर दिया कि बोर्ड अगले चक्र के लिए अपनी प्रायोजन नीति की समीक्षा के लिए तैयार है, लेकिन आनन-फानन में 'वीवो' कंपनी के साथ करार खत्म नहीं करेगा। आईपीएल में चीनी कंपनी से आ रहे पैसे से भारत को ही फायदा हो रहा है, चीन को नहीं। 

विज्ञापन


यहां यह बताना जरूरी हो जाता है कि इंडियन प्रीमियर लीग का टाइटल स्पॉन्सर चीनी स्मार्टफोन कंपनी वीवो है। इतना ही नहीं यह कंपनी टूर्नामेंट के दौरान सबसे ज्यादा विज्ञापन भी देती है। कोषाध्यक्ष अरूण धूमल ने कहा कि हमें वीवो से हर साल स्पॉन्सरशिप के जरिए 440 करोड़ रुपये मिलते हैं और कंपनी से हमारा करार 2022 तक है, इसके बाद ही स्पॉन्सरशिप की समीक्षा की जाएगी।

विज्ञापन

BCCI भारत सरकार को 42 फीसदी टैक्स देता

BCCI Treasurer Arun Dhumal confirms BCCI has no plans to end association with Vivo

समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड के कोषाध्यक्ष कहते हैं, 'जब आप भावुक होकर बात करते हैं, तो आप तर्क को पीछे छोड़ देते हैं। हमें समझना होगा कि हम चीन के हित के लिए चीनी कंपनी के सहयोग की बात कर रहे हैं या भारत के हित के लिए चीनी कंपनी से मदद ले रहे हैं। जब हम भारत में चीनी कंपनियों को उनके उत्पाद बेचने की अनुमति देते हैं तो जो भी पैसा वे भारतीय उपभोक्ता से ले रहे हैं, उसमें से कुछ बीसीसीआई को ब्रांड प्रचार के लिए दे रहे हैं और बोर्ड भारत सरकार को 42 प्रतिशत कर चुका रहा है। इससे भारत का फायदा हो रहा है, चीन का नहीं।'

 

बायजू से पहले OPPO था टीम इंडिया का स्पॉन्सर

BCCI Treasurer Arun Dhumal confirms BCCI has no plans to end association with Vivo
VIVO प्रयोजित जर्सी में टीम इंडिया - फोटो : सोशल मीडिया

पिछले साल सितंबर तक चीनी मोबाइल कंपनी ओप्पो भारतीय टीम की प्रायोजक थी, लेकिन उसके बाद बेंगलुरू स्थित शैक्षणिक स्टार्ट अप बायजू ने चीनी कंपनी की जगह ली। धूमल ने कहा कि वह चीनी उत्पादों पर निर्भरता कम करने के पक्ष में हैं, लेकिन जब तक उन्हें भारत में व्यवसाय की अनुमति है, आईपीएल जैसे भारतीय ब्रांड का उनके द्वारा प्रायोजन किए जाने में कोई बुराई नहीं है।

धूमल ने कहा कि, 'अगर मैं किसी चीनी कंपनी को भारत में क्रिकेट स्टेडियम बनाने का ठेका देता हूं, तो मैं चीनी अर्थव्यवस्था की मदद कर रहा हूं। गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन ने मोटेरा को दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बनाया और यह अनुबंध एक भारतीय कंपनी (एलएंडटी) को दिया गया था। देश भर में हजारों करोड़ रुपये की क्रिकेट संरचना तैयार की गई है और कोई भी अनुबंध चीनी कंपनी को नहीं दिया गया। व्यक्तिगत रूप से मैं भी देश में चीनी उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में खड़ा हूं, लेकिन अगर वह चीनी धन भारतीय क्रिकेट की भलाई के लिए लग रहा है तो इसमें बुराई ही क्या है, हम तो एक तरह से भारत की मदद ही कर रहे हैं।'

 
विज्ञापन

देशभर में चीनी सामानों के बहिष्कार की मांग तेज

BCCI Treasurer Arun Dhumal confirms BCCI has no plans to end association with Vivo
फाइल फोटो - फोटो : PTI

दरअसल, 15 जून की रात उत्तरी लद्दाख के गलवां घाटी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हुई भारतीय और चीनी सैनिकों की भिड़ंत में भारतीय सेना की बिहार रेजीमेंट ने गजब का साहस दिखाया था। बिहार रेजीमेंट के सैनिकों ने अपने फर्ज का परिचय देते हुए चीनी सैनिकों को यह अहसास दिया दिया कि हम किसी भी स्थिति में पीछे हटने वाले नहीं हैं। हथियार होने के बावजूद नियमों का ध्यान रखते हुए बिहार रेजीमेंट के जवानों ने खाली हाथ चीनी सैनिकों का मुकाबला किया। घंटों चली इस झड़प में दोनों पक्षों की ओर से कई सैनिकों की जान गई। चार दशक से ज्यादा समय में पहली बार भारत चीन सीमा पर हुई हिंसा में कम से कम 20 भारतीय जवान शहीद हो गए, उसके बाद से चीनी उत्पादों के बहिष्कार की मांग की जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें क्रिकेट समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। क्रिकेट जगत की अन्य खबरें जैसे क्रिकेट मैच लाइव स्कोरकार्ड, टीम और प्लेयर्स की आईसीसी रैंकिंग आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed