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अब NADA करेगी क्रिकेटर्स का डोप टेस्ट, खेल मंत्रालय के आगे झुका BCCI

Fri, 09 Aug 2019 02:58 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: अंशुल तलमले Updated Fri, 09 Aug 2019 02:58 PM IST
सार

  • बरसों तक नानुकुर करने के बाद आखिरकार माना BCCI
  • अब नाडा के दायरे में आएगा दुनिया का सबसे अमीर बोर्ड
  • अब सभी क्रिकेटर्स का डोप टेस्ट नाडा करेगी
  • पृथ्वी शॉ प्रकरण के बाद BCCI पर बढ़ गया था दबाव
  • बीसीसीआई ने खेल मंत्रालय के सामने रखे तीन मसले
  • 1. डोप टेस्ट किट्स की गुणवत्ता, 2. पैथालाजिस्ट की काबिलियत 3. नमूने इकट्ठे करने की प्रक्रिया

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BCCI to now come under the ambit of NADA
टीम इंडिया - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई पर भारत सरकार अब नियंत्रण की तैयारी शुरू कर चुका है। अब बोर्ड ऑफ क्रिकेट कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया यानी BCCI भी NADA (नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी) के दायरे में आएगा। अबतक भारतीय क्रिकेट बोर्ड दूसरे खेलों की तरह इस एजेंसी की जद में नहीं था।

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बीसीसीआई सीईओ राहुज जौहरी से शुक्रवार को मुलाकात के बाद खेल सचिव आरएस जुलानिया ने कहा कि, 'बोर्ड ने लिखित में दिया है कि वह नाडा की डोपिंग निरोधक नीति का पालन करेगा। बीसीसीआई के पास न कहने का कोई विकल्प नहीं है। सभी एक समान हैं, सभी को एक ही नियम का पालन करना होगा'।
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आज बीसीसीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल जौहरी ने खेल सचिव और अधिकारियों से मुलाकात की। मंत्रालय के अधिकारियों ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह बीसीसीआई को अपवाद बनाने के मूड में नहीं है। उनके लिए सभी राष्ट्रीय खेल महासंघ समान है। सभी राष्ट्रीय खेल महासंघ एक सरकारी डोपिंग रोधी एजेंसी के अंतर्गत हैं और वह नाडा है।

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पृथ्वी शॉ प्रकरण के बाद BCCI पर बढ़ा दबाव

BCCI to now come under the ambit of NADA

नाडा के अंतर्गत आने से बीसीसीआई के इनकार के बाद से सरकार और बीसीसीआई के बीच पिछले कुछ समय से टकराव की स्थिति चल रही थी। अब तक बीसीसीआई नाडा के दायरे में आने से इनकार करता आया है। उसका दावा रहा है कि वह स्वायत्त ईकाई है , कोई राष्ट्रीय खेल महासंघ नहीं और सरकार से फंडिंग नहीं लेता। 

डोपिंग परीक्षण में नाकाम रहने के कारण बीसीसीआई के युवा बल्लेबाज पृथ्वी शॉ को नवंबर तक प्रतिबंधित करने से कुछ दिन पहले ही खेल मंत्रालय ने बीसीसीआई को पत्र लिखकर उसके डोपिंग रोधी ढांचे की आलोचना की थी।

खेल मंत्रालय लगातार कहता आया है कि उसे नाडा के अंतर्गत आना होगा। हाल ही में उसने दक्षिण अफ्रीका ए और महिला टीमों के दौरों को मंजूरी रोक दी थी जिसके बाद अटकलें लगाई जा रही थी कि बीसीसीआई पर नाडा के दायरे में आने के लिए दबाव बनाने के मकसद से ऐसा किया गया।’

ऐसा होता है डोप टेस्ट?

BCCI to now come under the ambit of NADA

ताकत बढ़ाने वाली दवाओं के इस्तेमाल को पकड़ने के लिए डोप टेस्ट किया जाता है। किसी भी खिलाड़ी का किसी भी वक्त डोप टेस्ट लिया जा सकता है। यह नाडा या वाडा या फिर दोनों की ओर से किए जा सकते हैं। इसके लिए खिलाड़ियों के मूत्र के सैंपल लिए जाते हैं। नमूना एक बार ही लिया जाता है।

पहले चरण को ए और दूसरे चरण को बी कहते हैं। ए पॉजीटिव पाए जाने पर खिलाड़ी को प्रतिबंधित कर दिया जाता है। यदि खिलाड़ी चाहे तो एंटी डोपिंग पैनल से बी-टेस्ट सैंपल के लिए अपील कर सकता है। यदि खिलाड़ी बी-टेस्ट सैंपल में भी पॉजीटिव आ जाए तो उस सम्बंधित खिलाड़ी पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है।

ये टेस्ट NADA (नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी) या फिर WADA (वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी) की तरफ से कराए जाते हैं। इसमें खिलाड़ियों के यूरिन को वाडा या नाडा की खास लैब में टेस्ट किया जाता है। नाडा की लैब दिल्ली में और वाडा की लैब्स दुनिया में कई जगहों पर हैं।

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