आईसीसी भारत से बाहर कहीं भी टूर्नामेंट कराने के लिए स्वतंत्रः BCCI
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने मंगलवार को कहा कि (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद) आईसीसी टी-20 विश्व कप 2021 और वन-डे विश्व कप-2023 जैसे टूर्नामेंट का आयोजन भारत से बाहर कहीं भी कराने के लिए स्वतंत्र है।
हाल ही में दुबई में हुए अपनी तिमाही बैठक में आईसीसी ने बीसीसीआई से कहा था कि अगर उसे टी-20 विश्व कप 2021 और वन-डे विश्व कप-2023 की मेजबानी करनी है तो उसे टैक्स में छूट देनी होगी। अगर बीसीसीआई ऐसा नहीं कर पाता है तो उसे मेजबानी खोनी पड़ सकती है। आईसीसी की यह चेतावनी का बीसीसीआई पर ज्यादा असर नहीं हुआ है।
बता दें कि बैठक में आईसीसी ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड से कहा था है कि उसे भविष्य में होने वाली टी-20 विश्व 2021 और वन-डे विश्व कप 2023 जैसे विश्व प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए 150 करोड़ रूपए के कर की जिम्मेदारी उठानी होगी। बीसीसीआई के प्रतिनिधियों ने हालांकि आम चुनाव समाप्त होने तक का समय मांगा है और आईसीसी ने उसे ये समय दे दिया है।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) को वैश्विक टूर्नामेंट के आयोजन के लिए सदस्यीय देशों से कर की छूट मिलती है लेकिन 2016 विश्व टी-20 के लिए उसे कोई कर छूट नहीं दी गई थी क्योंकि भारतीय कर कानून इस तरह की छूट की अनुमति नहीं देता।
दरअसल, मंगलवार को बीसीसीआई ने कहा है कि आईसीसी चाहे तो विश्व कप को भारत से बाहर ले जा सकती है। बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आईसीसी चाहे तो भारत से विश्व कप की मेजबानी छीन सकता क्योंकि टैक्स का मुद्दा सरकार है, जिसके लिए सरकार की मंजूरी की जरूरत होती है। इस तरह के बाहरी दबाव इसमें कोई मदद नहीं कर सकते।
अधिकारी ने कहा, 'अगर वह आईसीसी टूर्नामेंट बाहर ले जाना चाहते हैं तो कोई बात नहीं। फिर बीसीसीआई अपना रेवेन्यू भी आईसीसी में से वापस लेगा। फिर देखेंगे कि किसका नुकसान होता है। जो लोग प्रशासन में हैं वो लोग पॉलीसी को बिना कानूनी तरीके से बनाना चाहते हैं। आईसीसी को इस तरह के फैसले के बीसीसीआई को मानने के लिए मुश्किलात होगी क्योंकि इनमें से कई मुद्दे बोर्ड की पहुंच में नहीं होते।'
बीसीसीआई के एक और अधिकारी ने बताया कि आईसीसी दावा तो सभी को साथ लेकर चलने का करती है लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि उसकी कोशिश हर तरह से भारत को नुकसान पहुंचाने की होती है।
उन्होंने कहा, 'पहले भी ऐसा पाया गया है कि आईसीसी का अपने सदस्यों से अलग तरह के बर्ताव रहता है। उदाहरण के तौर पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को सिर्फ टैक्स में छूट हासिल करने की कोशिश करने को कहा जाता है, लेकिन बीसीसीआई को यह बात सुनिश्चित करने को कहा जाता है कि वह टैक्स में छूट हासिल करे।'
उन्होंने कहा, 'ऐसा नहीं हो सकता कि बीसीसीआई इस पर राजी हो जाए। आईसीसी एक तरफ यह नहीं कह सकती कि उनका मकसद सभी को साथ लेकर चलने का है वहीं दूसरी तरफ वह भारत के नुकसान पहुंचाने की हर संभव कोशिश करती है।'