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क्रिकेट में रंगभेद पर खुला 45 साल पुराना राज, इयान चैपल ने बताई अपने दौर की सच्चाई
Sun, 21 Jun 2020 10:41 PM IST
अंशुल तलमले
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अंशुल तलमले
Updated Sun, 21 Jun 2020 10:41 PM IST
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इयान चैपल
- फोटो : सोशल मीडिया
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ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान इयान चैपल ने नस्लवाद के मुद्दे पर अपने अनुभवों को याद किया। इस दिग्गज खिलाड़ी ने ऐसे समय के बारे में बताया जब उनके साथी खिलाड़ियों के साथ भेदभाव और दुर्व्यवहार किया जाता था। अमेरिका में अफ्रीकी-अमेरिकी जॉर्ज फ्लॉयड की श्वेत पुलिस अधिकारी के हाथों हुई मौत के बाद नस्लवाद इस समय वैश्विक मुद्दा बना हुआ है।
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कई क्रिकटरों जैसे वेस्टइंडीज के स्टार क्रिस गेल और डेरेन सैमी ने अपने अनुभवों का खुलासा किया और वे 'ब्लैक लाइव्स मैटर' अभियान का समर्थन कर रहे हैं। चैपल ने 'ईएसपीएनक्रिकइंफो' में लिखे अपने कॉलम में लिखा, 'मौजूदा समय में नस्लवाद काफी अहम भूमिका निभा रहा है। क्रिकेट के अंदर और बाहर इस पक्षपात के मेरे अनुभव को बताना सही है।'
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चैपल नस्लवाद से तब वाकिफ हुए जब उन्होंने क्रिकेट के लिए यात्रा करना शुरू की। उन्होंने कहा, 'मैं ऐसे परिवार में बड़ा हो रहा था, जहां बतौर युवा मैंने कोई भेदभाव नहीं देखा था, जबकि वह श्वेत ऑस्ट्रेलियाई नीति का युग था। मैं सचमुच नस्लवाद के बारे में वाकिफ नहीं था।'
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चैपल ने याद किया, 'मेरा पहला विदेशी दौरा 1966-67 में था और यह मेरे लिए आंखे खोलने वाला था। तब सत्ता में रंगभेद करने वाला शासन था और केप टाउन में दूसरा टेस्ट जीतने के बाद ही हमें इस घिनौनी चीज का पता चला।' उन्होंने कहा, 'आपने गैरी सोबर्स को क्यों नहीं चुना? पूरी टीम अश्वेत खिलाड़ियों से भरी थी और ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ग्राहम थॉमस पर टीम होटल में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। थॉमस की अमेरिकी वंशावली उस समय की है, जब गुलामी के दिन हुआ करते थे।'
चैपल ने कहा कि जब वह कप्तान थे तो उन्होंने उस तरह के वाक्यों पर रोक लगा दी थी जिसमें अश्वेत होता। उन्होंने कहा, '1972-73 में मैंने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों से बात की जब हमें पाकिस्तान के खिलाफ घरेलू सीरीज के बाद कैरेबियाई सरजमीं का दौरा करना था। मैंने उन्हें चेताया कि अगर अश्वेत शब्द का कोई भी वाक्य इस्तेमाल किया गया तो परेशानी होगी।'
चैपल ने कहा, 'मैंने उन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों से इस तरह की कोई भी टिप्पणी नहीं सुनी।' उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वेस्टइंडीज के महान खिलाड़ी विव रिचर्ड्स ने एक बार ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के नस्लीय टिप्पणी करने की बात बताई थी लेकिन बाद में आश्वस्त किया था कि यह मामला सुलझ गया था। उन्होंने कहा कि यह घटना 1975-76 में हुई सीरीज में हुई थी।