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R Ashwin Retirement: सूजे हुए घुटने के साथ गेंदबाजी कर रहे थे अश्विन, संन्यास की थी तैयारी; जानें कैसे बदला मन
Fri, 16 Jun 2023 05:11 PM IST
शक्तिराज सिंह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Fri, 16 Jun 2023 05:11 PM IST
सार
पिछले साल बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज के बाद अश्विन ने संन्यास के बारे में सोचना शुरू कर दिया था। दो मैच में गेंदबाजी के बाद उनका घुटना सूज गया था, लेकिन उन्होंने अपना एक्शन बदला और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में कमाल किया।
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रविचंद्रन अश्विन
- फोटो : BCCI
विस्तार
रविचंद्रन अश्विन भारत के लिए खेलने वाले सबसे महान ऑफ स्पिनर में शामिल हैं। उनके आंकड़े हरभजन सिंह जैसे दिग्गज से भी बेहतर हैं। खासकर टेस्ट क्रिकेट में अश्विन ने जो हासिल किया है, वह किसी भी दूसरे ऑफ स्पिनर के लिए आसान नहीं होगा। अश्विन ने अपनी विविधता से बड़ी से बड़ी टीम के बल्लेबाजी क्रम को ध्वस्त किया है। हालांकि, अश्विन के करियर में एक ऐसा समय भी आया, जब उन्होंने संन्यास लेने का मन बना लिया था। हालांकि, 36 साल की उम्र में उन्होंने अपना एक्शन बदला और अभी भी टेस्ट में दुनिया के सबसे बेहतरीन गेंदबाज बने हुए हैं।
अश्विन ने अपने संन्यास को लेकर कहा "मैंने अपनी जिंदगी में जो भी किया है मुझे उस पर गर्व है, विकेट या रन की वजह से नहीं पर जिस निरंतरता से मैंने खुद को प्रेरित किया है। एक चीज जो क्रिकेटर्स या किसी को भी परेशान करती है वह है बूढ़ा होने का डर। मेरे लिए, क्रिकेटर्स की जब उम्र ज्यादा हो जाती है तो वह फंस जाते हैं। जब वह अनुभवी हो जाते हैं, वह किसी एक चीज को इतनी मजबूती से पकड़े रहना चाहते हैं कि समय के साथ अपने लिए ही मुश्किल खड़ी करते हैं।"
अपनी घुटने की चोट पर अश्विन ने बताया कि ज्यादा समय पहले की बात नहीं है जब उनको लगता था कि उनका करियर अब खत्म होने वाला है। अश्विन ने कहा "जब मैं बांग्लादेश टूर से वापस आया, मैंने अपनी पत्नि से कहा कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज मेरी आखिरी सीरीज हो सकती है। मुझे घुटने में कुछ परेशानी थी। मैंने उससे कहा कि मैं अपना गेंदबाजी एक्शन बदल दूंगा, क्योंकि जब भी मैं तेजी से आता था और मेरा पैर जमीन पर पड़ता था, तो उसमें थोड़ा दर्द हो रहा था। टी20 विश्व कप की वजह से मुझ पर ज्यादा वर्कलोड भी नहीं था पर मैं अपनी गेंदबाजी से खुश नहीं था, गेंद केवल थोड़ी ही हरकत कर रही थी।"
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अश्विन ने आगे कहा "बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे टेस्ट तक,मेरा घुटना दर्द करने लगा था, उसमें सूजन भी आ रही थी। तो मैंने सोचा कि अब मैं यह कैसे करुं क्योंकि, दो-तीन साल से मैं अच्छी गेंदबाजी कर रहा था। ऐसे में गेंदबाजी का एक्शन को बदलना काफी बेवकूफी वाला विचार था। मैं वापस आया, मैंने कहा की मेरे घुटने पर काफी दबाव पड़ रहा है, अब मैं अपने एक्शन में बदलाव करुंगा और अपने 2013-14 वाले एक्शन से गेंदबाजी करुंगा, जिससे घुटने को दर्द से आराम मिलेगा। मैं बैंगलोर गया, उस समय मुझे इंजेक्शन लेने पड़ते थे, मैंने अपना एक्शन बदल दिया। मैंने गेंदबाजी करना शुरु किया और घुटने का दर्द गायब हो गया। मैंने तीन-चार दिन नागपुर में अभ्यास किया और बिना किसी अभ्यास मैच के उस एक्शन के साथ टेस्ट मैच खेलने चला गया। मैच के पहले दिन, तीन-चार ओवर तक तो मुझे खुद को नहीं लगा कि मैं गेंदबाज हूं लेकिन अपनी समझ से मैंने इसे नियंत्रित कर लिया।"
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज को लेकर उन्होंने कहा "मुझे उस सीरीज मे प्लेयर ऑफ द सीरीज का खिताब मिला था, जिस पर मुझे गर्व हैं। मेरी नजर में वो पिछले चार-पांच वर्षों में मेरे बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक था। मैंने पिछले पांच वर्षों मे काफी अच्छा किया है लेकिन, फिर भी मुझे लगता है कि आज जब मैं उस समय को याद करता हूं, मुझे गर्व होता है की मैंने वो 36 साल की उम्र में किया। अगर मैं अपना एक्शन बदल सकता हूं, अपना करियर दांव पर लगा सकता हूं, तो मुझे नहीं लगता कि जिंदगी में इससे बड़ी चुनौती हो सकती है। कई लोग अक्सर असुरक्षित हो जाते हैं, उन्हें कुछ अलग करके असफल नहीं होना होता है। मेरे लिए इसी एक्शन के साथ अगले चार-पांच टेस्ट खेलना काफी आसान है, शायद मैं 15-16 विकेट भी ले लूं लेकिन मुझे खुद को अच्छा नहीं लगेगा, मैं ऐसा नहीं चाहता।"
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अश्विन ने अपने संन्यास को लेकर कहा "मैंने अपनी जिंदगी में जो भी किया है मुझे उस पर गर्व है, विकेट या रन की वजह से नहीं पर जिस निरंतरता से मैंने खुद को प्रेरित किया है। एक चीज जो क्रिकेटर्स या किसी को भी परेशान करती है वह है बूढ़ा होने का डर। मेरे लिए, क्रिकेटर्स की जब उम्र ज्यादा हो जाती है तो वह फंस जाते हैं। जब वह अनुभवी हो जाते हैं, वह किसी एक चीज को इतनी मजबूती से पकड़े रहना चाहते हैं कि समय के साथ अपने लिए ही मुश्किल खड़ी करते हैं।"
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अपनी घुटने की चोट पर अश्विन ने बताया कि ज्यादा समय पहले की बात नहीं है जब उनको लगता था कि उनका करियर अब खत्म होने वाला है। अश्विन ने कहा "जब मैं बांग्लादेश टूर से वापस आया, मैंने अपनी पत्नि से कहा कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज मेरी आखिरी सीरीज हो सकती है। मुझे घुटने में कुछ परेशानी थी। मैंने उससे कहा कि मैं अपना गेंदबाजी एक्शन बदल दूंगा, क्योंकि जब भी मैं तेजी से आता था और मेरा पैर जमीन पर पड़ता था, तो उसमें थोड़ा दर्द हो रहा था। टी20 विश्व कप की वजह से मुझ पर ज्यादा वर्कलोड भी नहीं था पर मैं अपनी गेंदबाजी से खुश नहीं था, गेंद केवल थोड़ी ही हरकत कर रही थी।"
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अश्विन ने आगे कहा "बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे टेस्ट तक,मेरा घुटना दर्द करने लगा था, उसमें सूजन भी आ रही थी। तो मैंने सोचा कि अब मैं यह कैसे करुं क्योंकि, दो-तीन साल से मैं अच्छी गेंदबाजी कर रहा था। ऐसे में गेंदबाजी का एक्शन को बदलना काफी बेवकूफी वाला विचार था। मैं वापस आया, मैंने कहा की मेरे घुटने पर काफी दबाव पड़ रहा है, अब मैं अपने एक्शन में बदलाव करुंगा और अपने 2013-14 वाले एक्शन से गेंदबाजी करुंगा, जिससे घुटने को दर्द से आराम मिलेगा। मैं बैंगलोर गया, उस समय मुझे इंजेक्शन लेने पड़ते थे, मैंने अपना एक्शन बदल दिया। मैंने गेंदबाजी करना शुरु किया और घुटने का दर्द गायब हो गया। मैंने तीन-चार दिन नागपुर में अभ्यास किया और बिना किसी अभ्यास मैच के उस एक्शन के साथ टेस्ट मैच खेलने चला गया। मैच के पहले दिन, तीन-चार ओवर तक तो मुझे खुद को नहीं लगा कि मैं गेंदबाज हूं लेकिन अपनी समझ से मैंने इसे नियंत्रित कर लिया।"
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज को लेकर उन्होंने कहा "मुझे उस सीरीज मे प्लेयर ऑफ द सीरीज का खिताब मिला था, जिस पर मुझे गर्व हैं। मेरी नजर में वो पिछले चार-पांच वर्षों में मेरे बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक था। मैंने पिछले पांच वर्षों मे काफी अच्छा किया है लेकिन, फिर भी मुझे लगता है कि आज जब मैं उस समय को याद करता हूं, मुझे गर्व होता है की मैंने वो 36 साल की उम्र में किया। अगर मैं अपना एक्शन बदल सकता हूं, अपना करियर दांव पर लगा सकता हूं, तो मुझे नहीं लगता कि जिंदगी में इससे बड़ी चुनौती हो सकती है। कई लोग अक्सर असुरक्षित हो जाते हैं, उन्हें कुछ अलग करके असफल नहीं होना होता है। मेरे लिए इसी एक्शन के साथ अगले चार-पांच टेस्ट खेलना काफी आसान है, शायद मैं 15-16 विकेट भी ले लूं लेकिन मुझे खुद को अच्छा नहीं लगेगा, मैं ऐसा नहीं चाहता।"