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Sports Bill: खेल मंत्रालय ने खेल विधेयक के आरटीआई संबंधी प्रावधान में किया संशोधन, बीसीसीआई को मिलेगी राहत
Thu, 07 Aug 2025 09:37 AM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Thu, 07 Aug 2025 09:37 AM IST
सार
संशोधन से बीसीसीआई को राहत मिलेगी क्योंकि उसके लिए आरटीआई हमेशा से ही पेचीद्दा मुद्दा रहा है। संशोधन के तहत अब आरटीआई संबंधी प्रावधान में वही संस्थाएं आएंगी जो सरकारी अनुदान और सहायता पर निर्भर हैं।
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बीसीसीआई लोगो।
- फोटो : bcci.tv
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विस्तार
खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक में संशोधन किया है जिसके बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के प्रावधनों के अधीन नहीं रहेगा। इस संशोधन से बीसीसीआई को राहत मिलेगी क्योंकि उसके लिए आरटीआई हमेशा से ही पेचीद्दा मुद्दा रहा है। संशोधन के तहत अब आरटीआई संबंधी प्रावधान में वही संस्थाएं आएंगी जो सरकारी अनुदान और सहायता पर निर्भर हैं।
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बीसीसीआई सरकारी सहायता पर निर्भर नहीं
मालूम हो कि बीसीसीआई अन्य राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) के विपरीत सरकारी सहायता पर निर्भर नहीं है। यही कारण है कि बोर्ड ने आरटीआई के अंतर्गत आने का लगातार विरोध किया है। हालांकि, विधेयक में संशोधन होने से बीसीसीआई को काफी राहत मिली है। खेलमंत्री मनसुख मांडविया ने 23 जुलाई को लोकसभा में यह बिल रखा जिसके प्रावधान 15 (2) में कहा गया है कि किसी मान्यता प्राप्त खेल संगठन को इस अधिनियम के तहत अपने कार्यों, कर्तव्यों और शक्तियों के प्रयोग के संबंध में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत एक सार्वजनिक प्राधिकरण माना जाएगा।
मालूम हो कि बीसीसीआई अन्य राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) के विपरीत सरकारी सहायता पर निर्भर नहीं है। यही कारण है कि बोर्ड ने आरटीआई के अंतर्गत आने का लगातार विरोध किया है। हालांकि, विधेयक में संशोधन होने से बीसीसीआई को काफी राहत मिली है। खेलमंत्री मनसुख मांडविया ने 23 जुलाई को लोकसभा में यह बिल रखा जिसके प्रावधान 15 (2) में कहा गया है कि किसी मान्यता प्राप्त खेल संगठन को इस अधिनियम के तहत अपने कार्यों, कर्तव्यों और शक्तियों के प्रयोग के संबंध में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत एक सार्वजनिक प्राधिकरण माना जाएगा।
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न्यूज एजेंसी पीटीआई के हवाले से एक सूत्र ने कहा, संशोधित प्रावधान सार्वजनिक प्राधिकरण को एक ऐसी संस्था के रूप में परिभाषित करता है जो सरकारी धन या सहायता पर निर्भर है। इस संशोधन के साथ सार्वजनिक प्राधिकरण की स्पष्ट परिभाषा हो गई है। अगर ऐसा नहीं किया जाता तो यह एक अस्पष्ट क्षेत्र होता जिसके कारण विधेयक अटक सकता था या उसे अदालत में चुनौती दी जा सकती थी। इसलिए सार्वजनिक धन से जुड़ी कोई भी चीज आरटीआई के दायरे में आएगी। अगर राष्ट्रीय महासंघ सरकारी सहायता नहीं भी ले रहा है तो भी अगर उसके टूर्नामेंटों के आयोजन या संचालन में किसी तरह की सरकारी सहायता मिली है तो उससे सवाल किया जा सकता है। सरकारी सहायता सिर्फ धन ही नहीं बल्कि बुनियादी ढांचे के संदर्भ में भी है।
कानून बनने पर बीसीसीआई को एनएसएफ के रूप में करना होगा पंजीकृत
बीसीसीआई ने पहले कहा था कि विधेयक पर टिप्पणी करने से पहले वह इसका अध्ययन करेगा। विधेयक के कानून बनने पर बीसीसीआई को स्वयं को एनएसएफ के रूप में पंजीकृत करना होगा क्योंकि क्रिकेट 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में टी20 प्रारूप में पदार्पण करने जा रहा है।
बीसीसीआई ने पहले कहा था कि विधेयक पर टिप्पणी करने से पहले वह इसका अध्ययन करेगा। विधेयक के कानून बनने पर बीसीसीआई को स्वयं को एनएसएफ के रूप में पंजीकृत करना होगा क्योंकि क्रिकेट 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में टी20 प्रारूप में पदार्पण करने जा रहा है।