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विमर्श : गाजा में जो हो रहा है वह प्रतिकार है, लेकिन इसे क्या 'नरसंहार' माना जाए
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ANI
विस्तार
यह कहना भले ही कठोर लगे, लेकिन इस बात से सहमत नहीं हुआ जा सकता कि इस्राइल गाजा में नरसंहार (जेनोसाइड) कर रहा है। अगर इस्राइली सरकार के इरादे ऐसे होते और वह वाकई गाजावासियों के विनाश के लिए प्रतिबद्ध होती, तो क्या वह कहीं ज्यादा घातक युद्ध प्रक्रियाओं को नहीं अपना रही होती? गाजा के हमास द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय, जो आतंकियों और नागरिकों की मौत में कोई फर्क नहीं करता, के अनुसार दो साल के इस युद्ध में अब तक 60 हजार मौतें हुईं हैं। अगर इस्राइल वास्तव में गाजा का अंत चाहता, तो यह संख्या लाखों में नहीं होती?
इस्राइल अपने क्षेत्र की अग्रणी सैन्य शक्ति है, जो हिजबुल्ला को बर्बाद और ईरान को झुकाकर और मजबूत हो गया है। वह बिना किसी पूर्व सूचना के बमबारी कर सकता था, लेकिन उसने हमला करने से पहले हर बार गाजावासियों को संबंधित इलाके को खाली करने की चेतावनी दी। वह अपने सैनिकों, जिनमें से सैकड़ों मारे गए, को जोखिम में डाले बिना बमबारी कर सकता था। बताया जाता है कि इस्राइली खुफिया एजेंसियों को इस बात की बखूबी जानकारी है कि बंधकों को कहां रखा गया है। यही वजह है कि दुखद अपवादों को छोड़कर इस्राइली गोलीबारी में कम लोग मारे गए हैं। इस्राइल को यह भी पता है कि बंधकों को चाहे कितनी ही क्रूरता से कैद किया गया हो, हमास का हित उन्हें जिंदा रखने में है।
ऐसा भी नहीं है कि इस्राइल के पास कूटनीतिक सुरक्षा का अभाव है। राष्ट्रपति ट्रंप ने खुलेआम सभी गाजावासियों को उस इलाके को छोड़ने की बात कही है और चेतावनी दी है कि अगर हमास ने बंधकों को नहीं छोड़ा, तो गाजा में तबाही मच जाएगी। यही नहीं, इस्राइल किसी बुनियादी आर्थिक खतरे का भी सामना करने वाला नहीं है। अगर नुकसान होगा, तो वह बहिष्कार करने वाले देशों का ही। इस्राइल पर नरसंहार का आरोप लगाने वालों को यह बताना होगा कि अगर नरसंहार हो रहा है, तो मृतकों की संख्या ज्यादा क्यों नहीं है? निस्संदेह इसका उत्तर है कि इस्राइल नरसंहार नहीं कर रहा है।
नरसंहार कानूनी रूप से विशिष्ट और नैतिक शब्द है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन द्वारा ‘किसी राष्ट्रीय, जातीय, नस्लीय या धार्मिक समूह को पूर्णतः या अंशतः नष्ट करने के इरादे’ के रूप में परिभाषित किया गया है। नरसंहार का मतलब सिर्फ ‘बहुत ज्यादा नागरिकों की मौतें’ नहीं है। यह तो लगभग हर युद्ध में होता है, और गाजा भी इसका अपवाद नहीं है। नरसंहार का मतलब होता है किसी खास वर्ग के लोगों को इसलिए मारना कि वे उस वर्ग से संबंधित हैं, जैसे नाजियों ने होलोकॉस्ट में यहूदियों को इसलिए मारा कि वे यहूदी थे। जब हमास ने सात अक्तूबर को आक्रमण किया, तो उन्होंने जानबूझकर लोगों को घरों में और युवाओं को संगीत समारोह में मारा। उन्होंने इस्राइलियों की भी ‘इसी तरह’ से हत्या की। इसके विपरीत, द्वितीय विश्वयुद्ध में दस लाख से ज्यादा जर्मन नागरिकों की मृत्यु ने उन्हें युद्ध का शिकार तो बनाया, लेकिन नरसंहार का नहीं। मित्र राष्ट्रों का उद्देश्य जर्मनी को युद्ध में धकेलने वाले नाजियों को हराना था, न कि सिर्फ जर्मन होने के कारण जर्मनों का सफाया करना। मुझे गाजा के नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाकर मारने की इस्राइली योजना के किसी सुबूत की जानकारी नहीं है।
वाकई गाजा में बहुत बड़े पैमाने पर विनाश हुआ है। इस्राइल की रणनीतियों के बारे में सवाल जरूर पूछे जाने चाहिए, खासकर जब हमास को खाद्य आपूर्ति पर नियंत्रण से वंचित करने के लिए उसने अव्यवस्थित खाद्य वितरण प्रणाली शुरू की। शायद ही कोई ऐसी सेना रही हो, जिसके कुछ सैनिकों ने युद्ध अपराध न किए हों। इस युद्ध में इस्राइल के सैनिकों ने भी किए हैं और अमेरिका के सैनिकों ने तो लगभग सभी युद्धों में ऐसा किया है, जिसमें द्वितीय विश्वयुद्ध भी शामिल है, जब अमेरिकी सैनिकों ने गलती से स्कूलों पर बमबारी की या युद्धबंदियों की निर्मम हत्या कर दी। लेकिन गलत मानवीय योजनाएं, गोलियां चलाने वाले सैनिक, गलत निशाने पर हमले, या बदले की भावना से बयानबाजी करने वाले राजनेता, ये सब नरसंहार के बराबर नहीं हैं। ये युद्ध के अपने सामान्य त्रासद आयाम हैं।
गाजा में हमास ने युद्ध छेड़ने के लिए निंदनीय और आपराधिक तरीका अपनाया है। यूक्रेन में, जब रूस मिसाइलों, ड्रोन या तोप से हमला करता है, तो नागरिक भूमिगत हो जाते हैं और यूक्रेनी सेना लड़ने के लिए जमीन के ऊपर रहती है। गाजा में स्थिति उलट है। हमास अपनी सुरक्षा और भोजन के लिए विशाल सुरंगों में छिप जाता है, जबकि नागरिकों को अरक्षित छोड़ देता है। ये रणनीतियां, जो अपने आप में युद्ध अपराध हैं, इस्राइल के लिए अपने बंधकों की वापसी और हमास को खत्म करने के लक्ष्य को कठिन बना देती हैं। इस्राइल के ये दोनों उद्देश्य पूरी तरह से जायज थे और आज भी हैं-अगर हमास बंधकों को सौंप दे और आत्मसमर्पण कर दे, तो गाजा में हत्याएं रुक जाएंगी। ये ऐसी मांगें हैं, जो इस्राइल पर कथित निष्पक्ष आरोप लगाने वालों से कभी सुनने को नहीं मिलतीं।
कुछ लोग कह सकते हैं कि भले ही गाजा में युद्ध नरसंहार न हो, लेकिन यह बहुत लंबा चल चुका है और इसे समाप्त होना चाहिए। यह एक उचित दृष्टिकोण है, जिसे अधिकांश इस्राइली भी मानते हैं। तो फिर ‘नरसंहार’ शब्द पर बहस क्यों? इसके दो कारण हैं। इसकी एक वजह यहूदी घृणा की एक नई लहर को बढ़ावा देना है, जो न केवल इस्राइली सरकार, बल्कि उन सभी यहूदियों के लिए नफरत भड़काती है, जो इस्राइल को नरसंहार समर्थक मानते हैं। यह एक ऐसी रणनीति है, जिसका इस्तेमाल इस्राइल विरोधी वर्षों से इस्राइली नरसंहारों या युद्ध अपराधों को बढ़ा-चढ़ाकर करते आ रहे हैं, जबकि बारीकी से पड़ताल करने पर पता चलता है कि ऐसा कुछ था ही नहीं। नरसंहार का आरोप भी कुछ ऐसा ही है, लेकिन इसके नतीजे ज्यादा घातक हैं। दूसरी बात यह है कि ‘नरसंहार’ शब्द के दुरुपयोग का खतरा भयानक है, क्योंकि जब असली नरसंहार होंगे, तो हम उनसे बेपरवाह हो जाएंगे। गाजा में युद्ध को इस तरह खत्म होना चाहिए, कि फिर इसे दोहराया न जाए। लेकिन इसे नरसंहार कहने से कोई फायदा नहीं है, उल्टे हम इस शब्द के अर्थ को कमजोर कर देंगे, जो नहीं किया जाना चाहिए।