चाउमीन के खिलाफ एक हों

राजेंद्र शर्मा Updated Sun, 28 Oct 2012 08:39 PM IST
Vyang of rajendra sharma
इसी को कहते हैं, बगल में छोरा और नगर में ढिंढोरा! पूरे देश में औरतें निशाने पर हैं। सरकारें दोषियों की शिनाख्त तक नहीं कर पा रहीं, सजा कैसे देंगी। सत्ताधारी पार्टी कह रही है कि यह उसके खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र है। अब तक तो सरकारों को केवल भ्रष्टाचार पर ही घेरा जा रहा था, लेकिन अब बलात्कार के आंकड़े दिखाकर उनसे इस्तीफा मांगा जा रहा है।

ज्ञानियों ने भ्रष्टाचार की तरह बलात्कार को भी अनादि, अनंत और विश्वव्यापी बताना शुरू कर दिया है। पर असली उपचार की तरफ किसी की नजर ही नहीं गई, जबकि यह तो बिलकुल बगल में था। और वह भी इतना आसान। बस, चाउमीन भगाओ, माहौल चकाचक बदल जाएगा।

अब यह साफ हो गया है कि चीन ने साजिश के तहत ही चाउमीन यहां भेजे होंगे, जैसे पाकिस्तान नकली नोट भेजता है। नकली नोट भेजने के पीछे मंशा हमारी अर्थव्यवस्था को ध्वस्त करने की है, तो चाउमीन के जरिये हमारी युवा शक्ति को भ्रष्ट, पतित और अनैतिक बनाने का खतरनाक इरादा है।

चीनियों को हमसे पुरानी रंजिश है, वे कुछ भी कर सकते हैं। यह भी सही है कि चाउमीन के देश चीन में औरतें इस तरह वहशियों के निशाने पर नहीं हैं। पर यह भी तो हो सकता है कि उन्होंने चाउमीन की हिंदुस्तानी रेसिपी में ही कोई गलत बूटी मिला दी हो। बात चाहे जो भी हो, इतना तो तय है कि चाउमीन खाने से हमारे नौजवानों में हार्मोनीय लोचा हो रहा है।

हमारे पुराने लोग वर्षों-दशकों से विदेशी चीजों के बहिष्कार की मांग करते आ रहे हैं। अगर सैकड़ों-हजारों वर्षों से आजमाई हुई दाल-रोटी खाते, तो क्या आज यह नौबत आती? क्या आपने विदेशी चीजों से घृणा करने वाले किसी स्वदेशी प्रेमी व्यक्ति को गलत हरकत करते देखा है! सवाल ही नहीं है। पर यहां तो नए-नवेलों को चाउमीन ही चाहिए। ब्रेकफास्ट में चाउमीन, लंच में चाउमीन, डिनर में चाउमीन। लो, अब नतीजा भुगतो।

औरतों के खिलाफ दुर्व्यवहार रोकने का अब एक ही तरीका है। वह यह कि सरकार चाउमीन पर प्रतिबंध लगा दे। लेकिन जो सरकार विदेशी किराना दुकान वालों को यहां बुला रही है, वह भला चाउमीन पर प्रतिबंध लगा सकती है? ऐसे में हमारे देसी लठैतों को चाउमीन के खिलाफ उसी तरह लट्ठ लेकर खड़े हो जाना चाहिए, जैसे वे चौदह फरवरी को खड़े होते हैं। भई, देश की इज्जत का सवाल है।

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