फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   UP govt should permanently resolve Discrepancy in teachers recruitment with new Selection Commission

शिक्षा: भर्ती आयोग कैसे हो उपयोगी, विसंगतियों का तत्काल स्थायी समाधान जरूरी

Thu, 02 Nov 2023 07:55 AM IST
Navin Singh Patel नवीन सिंह पटेल
Updated Thu, 02 Nov 2023 07:55 AM IST
विज्ञापन
सार
सरकार को विसंगतियों का तत्काल स्थायी समाधान करना चाहिए। नवगठित आयोग को क्रियाशील करके इसका रास्ता सुगम बनाया जा सकता है।
loader
UP govt should permanently resolve Discrepancy in teachers recruitment with new Selection Commission
कैबिनेट बैठक करते हुए मुख्यमंत्री योगी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शिक्षकों की भर्ती के लिए योगी सरकार ने जिस दूरगामी सोच के साथ भर्ती बोर्ड और विभिन्न आयोगों को भंग करते हुए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन किया था, वह तत्परता अगर निरंतर बनी रहती, तो इसके अच्छे नतीजे निकल सकते थे। नए आयोग की अधिसूचना जारी हुए करीब ढाई महीने बीत गए, पर अभी तक एक भी नियुक्ति नहीं हो सकी है। इस देरी पर, ताज्जुब इसलिए भी है कि भर्तियों में देरी को लेकर उठ रहे सवालों पर सरकार खुद सहज नहीं है। बेरोजगारों के मंच का दावा है कि प्रदेश में शिक्षकों के छह लाख पद रिक्त हैं। हालांकि, सरकार इस आंकड़े को सही नहीं मानती।



उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने एक अगस्त को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम पर मुहर लगाते वक्त भर्तियों में लग रहे बेतहाशा समय को इंगित किया था। नए आयोग का मुख्यालय प्रयागराज में बनना है, जिसमें अध्यक्ष के साथ कुल 12 सदस्य रहेंगे। अध्यक्ष वही हो सकता है, जो भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहते हुए प्रमुख सचिव या इसके समकक्ष पद पर रहा हो। यह दायित्व विश्वविद्यालय के मौजूदा या पूर्व कुलपति या दस वर्ष तक प्रोफेसर रहे ऐसे शिक्षाविद को भी दिया जा सकता है, जिसके पास न्यूनतम तीन वर्ष का प्रशासनिक अनुभव हो। 12 सदस्यों में से छह शिक्षाविद रखने की बाध्यता है। पांच का चयन भंग किए गए शिक्षा आयोगों या बोर्डों के संयुक्त निदेशक या अपर निदेशक स्तर के अधिकारियों से होना है, जबकि एक सदस्य जिला न्यायाधीश स्तर के होंगे।


प्रदेश में न तो काबिल सेवानिवृत्त आईएएस अफसरों की कमी है, न शिक्षाविदों की। अधिकारियों के आधे पद तो तकरीबन साफ हैं ही। सरकार ने अधिनियम को मंजूरी देते वक्त माना था कि चयन संबंधी दक्षता के स्तर में भिन्नता के कारण शिक्षकों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। चयन में एकरूपता भी नहीं है। अध्यापकों के रिक्त पदों से शिक्षण-प्रशिक्षण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। पहले अध्यापकों के चयन के लिए कई आयोग थे। अब एक आयोग होने से एकरूपता, पारदर्शिता और समयबद्धता आएगी।

वस्तुतः शिक्षकों के रिक्त पदों और लंबित भर्तियों की स्थिति चिंताजनक ही है। माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में बताया है कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक हाई स्कूल और इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्यों के 4,168 पदों में से 2,663 पद रिक्त हैं। सरकार ने कहा था कि अल्पसंख्यक संस्थानों में भी शिक्षक भर्तियां नया आयोग ही करेगा। लेकिन, अचानक उन्हें अपने स्तर पर ही भर्ती की अनुमति मिल गई, जिससे नए आयोग के मकसद पर ही सवाल खड़ा हो गया। वैसे, नए आयोग की सक्रियता के बाद भी शिक्षक भर्ती से जुड़ी विसंगतियां जल्द पीछा नहीं छोड़ने वालीं। समान पद-समान योग्यता के सिद्धांत के बावजूद चयन प्रक्रिया समान नहीं है।

राजकीय इंटर कॉलेजों के लिए प्रवक्ता की भर्ती राज्य लोक सेवा आयोग करता है, आगे भी वही करेगा। इसी पद पर अशासकीय कॉलेजों में भर्ती नया आयोग करेगा। दोनों के चयन का तरीका भी भिन्न है। यूपी-पीएससी दो चरणों की लिखित परीक्षा के माध्यम से चयन करता है, जबकि अशासकीय कॉलेजों में लिखित परीक्षा और इंटरव्यू से अंतिम चयन होता रहा है। यूपी-पीएससी राजकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती सिर्फ इंटरव्यू लेकर करता है, जबकि अशासकीय महाविद्यालयों के इन्हीं शिक्षकों के चयन के लिए लिखित परीक्षा और इंटरव्यू, दोनों हैं।

यूपी-पीएससी राजकीय विद्यालयों में एलटी ग्रेड के शिक्षकों की भर्ती पांच साल बाद भी पूरी नहीं करा सका है। जुलाई-2018 में 10,768 शिक्षकों की भर्ती के लिए कराई परीक्षा में चार लाख अभ्यर्थी बैठे थे। अर्हता विवादों के कारण हिंदी, सामाजिक विज्ञान, कला जैसे विषयों के सैकड़ों पद रिक्त रह गए। जिनका चयन हुआ भी, उनमें कोई साथी सीनियर हो गया, तो कोई जूनियर। सरकार को ऐसी विसंगतियों का तत्काल स्थायी समाधान करना चाहिए। नवगठित चयन आयोग को क्रियाशील करके भर्ती का रास्ता सुगम बनाया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed