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अमेरिका का दोहरा रवैया: इस्राइल के लिए जो सही, वह भारत के लिए गलत कैसे?
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भारत और अमेरिका
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विस्तार
खालिस्तान समर्थक आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने के कथित आरोपों पर अमेरिका की तरफ से डाले जा रहे दबावों का कड़ा विरोध न करने को लेकर भारत में सार्वजनिक तौर पर काफी रोष प्रकट किया जा रहा है। दरअसल, कइयों का मानना है कि पन्नू की हत्या की साजिश रचने के लिए एक भारतीय नागरिक पर अमेरिकी अदालत में अभियोग दाखिल होने के बाद बढ़ते अमेरिकी दबाव से भारत को तगड़ा झटका लगा है। कई भारतीय अधिकारी भी अमेरिका के दोहरे रवैये से खासे नाराज हैं, जो भारत विरोधी गतिविधियों में संलग्न पन्नू जैसे आतंकियों से मुंह मोड़ लेता है, लेकिन उसे मारने के कथित आरोपों पर भारी शोर मचा रहा है।
ऐसे में, कुछ लोग अवश्य चाहेंगे कि सरकार, अमेरिका के बहुत करीब आने पर गंभीरता से विचार करे और क्वाड को एशियाई नाटो बनाने का मौका अमेरिका को हरगिज न दे। खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कथित साजिश रचने के अमेरिकी आरोपों पर भारतीय विदेश मंत्रालय अपनी पहली प्रतिक्रिया में काफी रक्षात्मक दिखा। गौरतलब है कि अमेरिका द्वारा द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग पर जो चिंताएं व्यक्त की गई हैं, उन पर विचार करने के लिए विदेश मंत्रालय ने एक उच्च-स्तरीय समिति के गठन की घोषणा की है।
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी न्याय विभाग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक भारतीय अधिकारी ने अमेरिका की जमीन पर एक खालिस्तानी सिख अलगाववादी नेता की हत्या की नाकामयाब साजिश रची। इस कथित साजिश के मामले में ही अमेरिका 52 वर्षीय निखिल गुप्ता पर आरोप रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत ऐसे मामलों को गंभीरता से लेता है, क्योंकि ये उसके सुरक्षा संबंधी हितों पर भी असर डालते हैं। किसी अमेरिकी नागरिक की, जो खालिस्तान आंदोलन से जुड़ा हो, अमेरिका में हत्या की साजिश रचने के कथित आरोपों पर एक भारतीय नागरिक पर न्यूयॉर्क की अदालत में चल रही औपचारिक प्रक्रिया, जिसमें कई ज्ञात और अज्ञात नाम भी शामिल हो सकते हैं, राष्ट्रीय सुरक्षा के शीर्ष पर बैठे लोगों की छवि के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकती है। अभियोग का सबसे घातक पहलू यह है कि भारतीय खुफिया या सुरक्षा एजेंसी के एक अधिकारी (सीसी वन) ने, जिसका नाम ज्ञात नहीं है, लेकिन जिसकी पहचान अमेरिकी एजेंसियों के पास है, पन्नू की हत्या की सुपारी देने के लिए अमेरिका में किसी पेशेवर हत्यारे की तलाश के लिए गुप्ता का सहारा लिया, जो कि मादक पदार्थों का एक अंतरराष्ट्रीय तस्कर है।
साजिश का पता तब चला, जब गुप्ता अनजाने में एक ऐसे अपराधी से टकरा गया, जो उसके द़ुर्भाग्य से अमेरिका का अंडरकवर जासूस निकला। मई और जून, 2023 के दो महीनों तक यह जासूस, गुप्ता और भारत में मौजूद सीसी वन के साथ खेलता रहा। उसने एन्क्रिप्टेड ऐप पर मैसेज, फोटो, वीडियो, आईपी एड्रेस इत्यादि पर कई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य एकत्र किए और 15 हजार रुपये का एडवांस भी पाया। अभियोग में यह भी बताया गया है कि सीसी वन हर वक्त भारत में रहता था और उसने ही पन्नू की हत्या की मूल साजिश रची। विपक्षी कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता का कहना है कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की प्रतिक्रिया काफी कमजोर थी।
राजनीतिक विश्लेषक सुखोरंजन दासगुप्ता कहते हैं, ‘अगर अमेरिका हमारा दोस्त है, तो वह ऐसे आतंकी को पनाह क्यों देगा, जो हिंदुओं को खुलेआम धमकी और यात्रियों को इंडियन एयरलाइंस के विमानों में न बैठने की चेतावनी देता है? उन्हें ऐसे आतंकी को निशाना बनाए जाने पर आपत्ति क्यों होगी, जिसने 330 मुसाफिरों वाले एयर इंडिया के विमान को मार गिराया था? 9/11 का बदला लेने के लिए अमेरिका अफगानिस्तान पर हमला कर सकता है, तो हम ऐसे व्यक्ति को निशाना क्यों नहीं बना सकते, जिसके हाथ भारतीयों के खून से रंगे हैं?’ वामपंथी कार्यकर्ता सुचेतना मजुमदार, जो कि एक लोकप्रिय बांग्ला गायिका भी हैं, कहती हैं, ‘वक्त आ गया है कि भारत खालिस्तानी आतंकियों को पनाह देने वाले अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ संबंधों पर फिर से विचार करे। खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर अमेरिका, कनाडा का समर्थन कर रहा है, इसलिए हम उसे दोस्त हरगिज नहीं मान सकते।’ एक वरिष्ठ पूर्व राजनयिक कहते हैं, ‘अमेरिका का अपने दोस्तों को छोड़ देने लंबा रिकॉर्ड रहा है और भारत कोई अपवाद नहीं है।’
हिंदू राष्ट्रवादी कार्यकर्ता विश्वबंधु सेन का कहना है, ‘26/11 आतंकी हमला करने वालों की मदद करने वाले डेविड हेडली को अमेरिका ने बचाया, लेकिन गुप्ता के पीछे पड़े हैं, जो अमेरिका के दोहरे रवैये का स्पष्ट प्रमाण है।’ इंटेलिजेंस ब्यूरो की पूर्व अधिकारी वेणु घोष कहती हैं, ‘विदेश में आतंकियों को रोकने में कूटनीति के विफल होने के बाद भारत को गुप्त कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। इस्राइल और अमेरिका के लिए जो सही हो सकता है, वह भारत के लिए गलत कैसे हो सकता है?’ घोष और कुछ दूसरे खुफिया दिग्गजों ने अमेरिका के गैर दोस्ताना रवैये पर गुस्सा जताया है, लेकिन वहीं, कुछ भारतीय मीडिया रिपोर्टों की मानें, तो भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ ताजा आरोपों से पहले ही अपने सभी अभियान बंद कर चुकी है।
उल्लेखनीय है कि रॉ कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के आरोपों के बाद से ही पूरी दुनिया में सुर्खियों में है। ट्रूडो ने वैंकूवर में सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में शामिल होने का आरोप भारत पर लगाया था। नाराज भारत ने सभी आरोपों का खंडन किया था और सुबूत प्रस्तुत करने को कहा था। कनाडा ने कहा कि उसने अपने सहयोगियों से सुबूत साझा कर दिए हैं, लेकिन सार्वजनिक तौर पर वह ऐसा नहीं करेगा। रॉयटर्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे मामलों के बाद भारतीय खुफिया अधिकारी और रॉ पर वैश्विक निगरानी बढ़ जाएगी। हालांकि भारत की रक्षा खुफिया एजेंसी के पूर्व उपमहानिदेशक मेजर जनरल गगनजीत सिंह ने कहा, ‘अगर पश्चिमी देश हमास और हिजबुल्लाह जैसों के साथ इस्राइल की जवाबी कार्रवाई से सहमत हैं, तो उन्हें भारतीय कार्रवाई से आपत्ति नहीं होनी चाहिए। पाकिस्तान और अन्य पश्चिमी देश जान-बूझकर आतंकियों को पनाह देकर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हैं। हमें अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरों से निपटने का अधिकार है। इसलिए भारत सरकार को पश्चिमी दबाव के आगे नहीं झुकना चाहिए।’