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Music: उम्र बढ़ने के साथ कम हो जाती है संगीत सुनने की इच्छा, शोधकर्ताओं ने बताई वजह

Sun, 05 May 2024 07:21 AM IST
निर्मल कांत टिमोथी मैकैनरी
टिमोथी मैकैनरी Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 05 May 2024 07:21 AM IST
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सार
संगीत सुनते समय जिसे हम अपनी ‘पसंद’ समझते हैं, वह मस्तिष्क से उत्पन्न हुई महज एक प्रतिक्रिया है, जो अतीत के सुखों के आधार पर खुशी की उम्मीद पैदा करती है।
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The desire to listen to music decreases with increasing age
संगीत (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ फोटोग्राफिक इंडस्ट्री के अनुसार, दुनिया भर में लोग प्रति सप्ताह औसतन 20.1 घंटे संगीत सुनने में बिताते हैं। अमूमन माना जाता है कि संगीत सुनने की कोई उम्र नहीं होती है। जब, जैसे और जिसने चाहा, अपने मूड के अनुसार संगीत सुन लिया। शोध बताते हैं कि करीब 11 वर्ष तक की आयु के बच्चे संगीत को पसंद ज्यादा करते हैं, पर वे उससे अनजान होते हैं। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे संगीत के प्रति रुझान बढ़ता जाता है। 2013 में ढाई लाख से भी ज्यादा लोगों के साथ एक प्रयोग किया गया, जिसमें लोगों के संगीत को लेकर बदलते व्यवहारों की जांच की गई।



इस शोध में पाया गया कि किशोरावस्था में सुबह के समय संगीत सुनने की इच्छा 20 फीसदी से घटकर वयस्कता में 13 फीसदी रह जाती है। अब इसकी वजह को लेकर शोधकर्ता कई विचार सामने लाते हैं। किशोर युवा संगीत को अपनी पहचान के रूप में इस्तेमाल करते हैं, ताकि इसकी मदद से वे सामाजिक समूह से जुड़ सकें और अपने व्यक्तित्व को उसके अनुरूप गढ़ सकें। एक व्याख्या यह दर्शाती है कि संगीत सुनने की इच्छा में आने वाली गिरावट का कारण उम्र के बढ़ने के साथ आने वाली जिम्मेदारियां हैं, क्योंकि युवाओं से अधिक जिम्मेदारियां वयस्कों पर होती हैं, जिसकी वजह से वे संगीत की अधिक खोज नहीं कर पाते हैं।


यह तर्क भी दिया जाता है कि किशोर इस बात को लेकर ज्यादा जागरूक होते हैं कि वे क्या सुन रहे हैं। वहीं वे वयस्क, जो व्यायाम या अपने दैनिक कार्यों के समय संगीत सुनते हैं, नया संगीत सुनने के प्रति कम जागरूक होते हैं। न्यूरो साइंटिस्ट डेनियल लेवटिन अपनी पुस्तक दिस इज योर ब्रेन ऑन म्यूजिक में लिखते हैं कि ‘जब हम संगीत के एक हिस्से को पसंद करते हैं, तो यह हमें अन्य सुने हुए संगीत की याद दिलाता है, और यह हमारे जीवन में अतीत की स्मृतियों को फिर से सक्रिय कर देता है।’

संगीत सुनते समय जिसे हम अपनी ‘पसंद’ समझते हैं वह मस्तिष्क से उत्पन्न हुई महज एक प्रतिक्रिया है, जो अतीत के सुखों के आधार पर खुशी की उम्मीद पैदा करती है। जब हम नया संगीत सुनना बंद कर देते हैं, तो संगीत और आनंद के बीच का संबंध भी टूट जाता है। हालांकि इस स्थिति तक पहुंचने में एक से दो दशक तक लग जाते हैं, लेकिन अंततः परिणाम यह निकलता है कि युवाओं का संगीत अलग-थलग हो जाएगा और इसे सुनने में भी आनंद की अनुभूति नहीं होगी। हालांकि, हाल के शोध से पता चलता है कि संगीत की चाहत को शांत नहीं किया जा सकता, बल्कि यह जीवन भर विकसित होती रहती है।

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