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टैरिफ की जंग: अमेरिका ने कनाडा-मेक्सिको-चीन को दिखाए तेवर, वैश्विक व्यापार को मिला एक नया मोड़
Mon, 03 Feb 2025 06:04 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला
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Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Mon, 03 Feb 2025 06:04 AM IST
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डोनाल्ड ट्रंप
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विस्तार
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अपने संरक्षणवादी एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए कनाडा, मेक्सिको व चीन से आयात होने वाले सामान पर व्यापक टैरिफ लगाया जाना और बदले में तीनों देशों की तरफ से दिखी प्रतिशोधात्मक प्रतिक्रियाएं दुनिया में व्यापार युद्ध की शुरुआत की तरफ इशारा कर रही हैं, जिसके नतीजे भारत समेत दूसरी सभी अर्थव्यवस्थाओं को निश्चित ही प्रभावित कर सकते हैं। ट्रंप दरअसल, अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत अमेरिका में औद्योगिक उत्पादन बढ़ाने और व्यापार घाटे को कम करने की कोशिश कर रहे हैं और उनका मानना है कि इन देशों के साथ असंतुलित व्यापार समझौते अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह हैं।
इसके अतिरिक्त, जैसा व्हाइट हाउस पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि अमेरिका में अवैध आप्रवासन और प्रतिबंधित दवाओं को रोकने के अपने वादों को पूरा करने के लिए ही ट्रंप ने मेक्सिको, कनाडा और चीन पर कार्रवाई स्वरूप टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है। हालांकि इस तरह के टैरिफ, खासकर भोजन, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ाएंगे, जिससे अमेरिका के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अमेरिका के शीर्ष आयातक और सबसे महत्वपूर्ण व्यापार भागीदारों में शामिल कनाडा ने जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है, तो मेक्सिको ने भी ऐसे ही कदम उठाने की बात की है, और चीन ने इस मामले को विश्व व्यापार संगठन में ले जाने का इरादा जताया है, जिससे यह लड़ाई लंबी खिंचने की आशंका पैदा हो गई है।
ट्रंप के फैसले की पहली लहर में भारत का नाम नहीं होने से वह फिलहाल राहत में है, जो अमेरिका के कुल व्यापार घाटे में महज 3.2 फीसदी का योगदान देता है और नौवां सबसे बड़ा योगदानकर्ता है। फिर भी टैरिफ का खेल यदि आगे बढ़ता है, जैसी आशंका भी जताई जा रही है, तो वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के प्रभावित होने से भारत पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि शुक्रवार को जारी आर्थिक सर्वेक्षण स्पष्ट करता है कि व्यापक स्तर पर, भारत की टैरिफ नीति समय के साथ विकसित हुई है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था में एकीकृत होने की आवश्यकता के साथ घरेलू नीति लक्ष्यों को संतुलित करती है।
इसके बावजूद आशंका है कि यदि व्यापार युद्ध गहराता है, तो अस्थिरता बढ़ेगी, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। इससे अगर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो मुद्रास्फीति का संकट भी गहरा सकता है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की इसी माह संभावित अमेरिका की यात्रा पर तो नजर रहेगी ही, बहुपक्षीय व्यापार समझौतों को मजबूत करने और नई व्यापारिक साझेदारियों पर सतर्कतापूर्वक ध्यान देने की रणनीति भी कारगर साबित हो सकती है।