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हालात: पंजाब में लगातार हो रहे धमाके सुरक्षा से जुड़े कई सवालों का सबब, सतर्कता की दरकार

Fri, 08 May 2026 07:45 AM IST
Pavan अमर उजाला
अमर उजाला Published by: Pavan Updated Fri, 08 May 2026 07:45 AM IST
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Situation: Frequent blasts in Punjab raise security concerns, requiring vigilance
सुरक्षा की चिंता - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार रात पंजाब के दो शहरों में सैन्य परिसरों के बाहर कुछ ही घंटों के अंतराल पर हुए दो धमाके एक बार फिर राज्य की सुरक्षा को लेकर चिंतित तो करते ही हैं, इस सीमावर्ती राज्य में पाकिस्तानी खुफिया आईएसआई समर्थित खालिस्तानी आतंकी नेटवर्क के फिर से सक्रिय होने के संकेत भी दे रहे हैं। बेशक इन दोनों बम धमाकों, जिनकी जांच जारी है, में जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है, पर इन घटनाओं ने राज्य के अधिकारियों की नींद उड़ा दी है।

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ऑपरेशन सिंदूर की बरसी की पूर्व संध्या पर सैन्य प्रतिष्ठानों के पास हुए धमाके राज्य पुलिस की खुफिया विफलता को तो दर्शाते ही हैं, जमीनी सतर्कता बढ़ाए जाने की भी मांग करते हैं। राज्य पुलिस महानिदेशक ने इन घटनाओं के पीछे आईएसआई समर्थित साजिश का अंदेशा जताया है, जिसमें दम नजर आता है, क्योंकि हथियारबंद अलगाववादी संगठन खालिस्तान लिबरेशन आर्मी ने जालंधर धमाके की जिम्मेदारी ली है, जिसे अक्सर आईएसआई एवं कनाडा से समर्थन मिलता रहा है और जिसे केंद्रीय गृह मंत्रालय भी आतंकवादी संगठन मानता है।

बीते कुछ महीनों में सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाली कई घटनाएं हुई हैं। अप्रैल में पटियाला-राजपुरा रेलवे ट्रैक पर आईईडी विस्फोट हुआ, चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर ग्रेनेड से हमला हुआ। जनवरी 2026 में गणतंत्र दिवस से पहले सरहिंद रेलवे ट्रैक पर विस्फोट किया गया। नवंबर 2025 में मोगा के सीआईए कार्यालय पर ग्रेनेड फेंका गया था। मार्च 2025 में अमृतसर के खंदवाला इलाके में धार्मिक स्थल के बाहर विस्फोट की घटना हुई थी। इन घटनाओं से साफ है कि सीमापार स्थित दुश्मन राज्य में अलगाववादी तत्वों को लगातार शह और समर्थन दे रहा है।

अगर ऐसी घटनाओं पर तुरंत अंकुश नहीं लगाया गया, तो आमजन में डर का माहौल फैल सकता है, क्योंकि इससे 1980-1990 के दशक की खौफनाक यादें ही ताजा हो रही हैं। ऐसे समय में, जब जांच एजेंसियां इन घटनाओं की जांच में तेजी से जुटी हैं, तब राजनेताओं द्वारा इसे राजनीतिक रंग देना अपरिपक्वता का ही परिचायक है। राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर अगर जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अनावश्यक बयानबाजी करने से परहेज करें, तो बेहतर होगा। इन दो धमाकों ने पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति को एक नाजुक मोड़ पर ला दिया है, और सुरक्षा बलों को अब न केवल सीमापार की साजिशों का मुकाबला करना होगा, बल्कि राज्य के भीतर भी कड़ी सतर्कता बरतनी होगी।
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