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चमकती चांदी का सफर: औद्योगिक मांग के चलते कीमतों में उछाल... ऐसा पहले नहीं हुआ; इतिहास को बेशुमार दर्द भी...

Sun, 26 Oct 2025 07:49 AM IST
Anshuman Tiwari अंशुमान तिवारी
Updated Sun, 26 Oct 2025 07:49 AM IST
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सार
औद्योगिक मांग के चलते चांदी की कीमतें तेज हैं। सालाना मांग का 70 फीसदी हिस्सा औद्योगिक खपत में जा रहा है, जबकि लगातार बीते पांच साल से चांदी की कमी बनी हुई है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। चांदी जब भी चमकती है, इतिहास मुस्कराता है और मनुष्य की महत्वाकांक्षाओं, मूर्खताओं, विनाश और सृजन के कई किस्से खनक उठते हैं। 
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Shining silver Journey Industrial demand pushing rates never happened before countless pains in history also
अमर उजाला - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी

विस्तार

चांदी में तेजी हमेशा से सनसनीखेज है। कीमतों का ताजा तूफान 1980 के दौर से भी ज्यादा तेज है। सरकारें भी हैरान हैं और बाजार भी। ग्लोबल बाजार से चांदी गायब है। मांग आसमान पर है। बीती दीपावली से इस ज्योति पर्व तक चांदी 89 फीसदी महंगी हो गई। ईवी या सोलर पैनेल के लिए चांदी नहीं मिल रही है। ईटीएफ ने निवेश लेना रोक दिया, ज्वेलरों ने दीपावाली पर ऑर्डर रोक दिए। चांदी करीब 6,000 साल से मनुष्य के साथ है। यह दुनिया की सबसे जालिम धातु है। चांदी ने इतिहास को बेशुमार दर्द भी दिए हैं। तो आइए बैठिए टाइम मशीन में, हम चल रहे हैं रूपहले सफर पर, सीधे 6,000 साल पीछे।



वह सामने अनातोलिया पहाड़ियां हैं, बाद में लोग इसे एशिया माइनर कहेंगे। फिर कुछ सदियों बाद यह तुर्किये का हिस्सा हो जाएगा। फिलहाल यह देखिए कि प्राचीन खनिक सोने के साथ प्राकृतिक रूप से मिली हुई एक चमकदार धातु पा गए हैं और इसकी खबर मिस्र के फिरौन तक पहुंच गई है। फिरौन के लिए यह रूपहली धातु चंद्रमा की देवी आइसिस से जुड़ी है। आगे बढ़ते हुए मंदिरों के शिलालेख जरूर पढ़िएगा, जो बताएंगे कि मिस्र के इतिहास के ज्यादातर समय में चांदी की कीमत सोने से ऊपर थी। हम 3200 ईसा पूर्व में मंडरा रहे हैं। नीचे प्राचीन भट्ठियां चांदी युक्त अयस्कों को पिघलाकर चांदी को सीसा और अन्य अशुद्धियों से अलग कर रही हैं।


मनुष्य कितनी जल्दी सीख गया है खनन और प्रोसेसिंग। टाइम मशीन लीडिया होते हुए एथेंस की तरफ निकलेगी। हमारे समाने 600 ईसा पूर्व लीडिया है, जहां बाजारों में पहली बार चांदी के सिक्के चल रहे हैं। चांदी पहली मुद्रा बन गई है, जिसे कांस्य ब्लॉकों पर हाथ से ढाला गया है। और अब हम आ गए पांचवीं शताब्दी ईसा पूर्व एथेंस में। शहर के दक्षिण में लॉरियन खदानों में चांदी की पहली व्यवस्थित औद्योगिक खोदाई हो रही है। ये खदानें सालाना 20,000 किलोग्राम चांदी पैदा करती हैं, जो एथेंस की कमाई का 25 फीसदी है। यही है वह चांदी, जिससे एथेंस की करेंसी ड्राख्मा बनाई जाती है। ये सिक्के बाद की खोजों में भारत में भी पाए जाएंगे। देख ही रहे हैं कि चांदी एथेंस के स्वर्ण युग का आधार रही है।

लॉरियन की दौलत से एथेंस की विख्यात नौसेना बनी, जिसने (480 ईसा पूर्व) सलामिस में फारस को हराकर एथेनियन साम्राज्य स्थापित किया है। चांदी के दम पर एथेंस का लोकतंत्र मजबूत हुआ है। मशहूर एथेनियन उल्लू छाप ड्राख्मा सिक्के भूमध्य सागर के इलाके में फैल गए हैं। यही वक्त है, जब carrying silver to Athens वाला मुहावरा बन रहा है, अर्थात उल्टे बांस बरेली को। यानी एथेंस को चांदी की क्या जरूरत! चांदी राजनीतिक हो गई है। रोम सैनिक कार्थेज को हराकर स्पेनिश खदानों से चांदी निकालने लगे हैं। इबेरियन सिल्वर की ताकत रोमन तलवारों में समा गई है, साम्राज्य फैल रहा है। अब हम तीसरी सदी पार कर रहे हैं। चांदी की कमी दिखने लगी है। डेनारियस सिक्कों में शुद्ध चांदी की मात्रा घटने लगी है। हमारा सफर लंबा है। टाइम मशीन के रोबो पॉयलट ने छोटा रास्ता पकड़ा है। हम सीधे मध्यकालीन यूरोप (1100-1500)  इंग्लैंड से फ्रांस तक जाएंगे। शुरुआती मध्यकालीन शासक बीजान्टिन चांदी की प्लेटें पिघलाकर सिक्के बना रहे हैं। इस बीच पश्चिमी फ्रांस के मेल में, कैरोलिंगियन खनिकों ने आर्जेंटिफेरस गैलेना से चांदी निकालने की नई तकनीक बना दी है। हम सोलहवीं सदी के मध्य में हैं। पहली बार आप एक नया मौद्रिक तमाशा देखने जा रहे हैं। हेनरी अष्टम इंग्लैंड के सिंहासन पर हैं। उन्होंने चांदी के पहले ग्रेट डिबेसमेंट का फरमान लिख दिया है। विदेशी युद्धों के लिए पैसा जुटाने को बेताब हेनरी ने सिक्कों में चांदी की मात्रा 92.5 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी कर दी है और तांबे की मात्रा बढ़ा दी है।

इधर सुदूर लैटिन अमेरिका में चांदी रक्त-रंजित इतिहास लिखने की तैयारी में है। यह 1545 का साल है। सामने है बोलिविया की पोटोसी खदानें। स्पेनिश विजेताओं ने इतिहास की सबसे कुख्यात चांदी खदान खोजी है। समुद्र तल से 4,000 मीटर ऊपर यह ‘सेरो रिको’ (अमीर पर्वत) 16वीं शताब्दी में दुनिया की 60 फीसदी चांदी छिपाए हुए है। स्पेनिश शोषण शुरू हो गया है। स्थानीय निवासी जबरन मजदूर बनाए गए हैं।  

खनन प्रक्रिया कमरतोड़ है। मजदूर सैकड़ों पाउंड अयस्क पीठ पर लादकर खतरनाक सीढ़ियां चढ़ते हैं, मर्करी के असर से हजारों की मौतें हो रही हैं। स्पेनिश नहीं रुकते। 30,000 से ज्यादा अफ्रीकी गुलाम मंगाए गए हैं। पोटोसी चांदी से ढाले स्पेनिश पीसेस ऑफ एट दुनिया की पहली वैश्विक मुद्रा बन गई है। लैटिन अमेरिका की चांदी चीन तक फैल गई है। अब हम करीब तीन सौ साल पार 1980 में न्यूयाॅर्क में हैं। टेक्सास के तीन अरबपति भाई-नेल्सन बंकर हंट, विलियम हर्बर्ट हंट और लामार हंट ने अनोखा काम किया है। पांच अरब डॉलर से ज्यादा दौलत से इन्होंने दुनिया की निजी चांदी आपूर्ति का एक-तिहाई जुटा लिया है। चांदी की कीमतें छह डॉलर से 50 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई हैं। हंट ब्रदर्स की चांदी होल्डिंग्स 4.5 अरब डॉलर है, जिसमें 3.5 अरब डॉलर शुद्ध मुनाफा। चांदी की दीवानगी चरम पर है। घरों में चांदी के बर्तन पिघलाए जा रहे रहे हैं। चोर चांदी की कैंडलस्टिक चुराते पकड़े गए हैं। टिफनी एंड कंपनी ने अखबार में विज्ञापन देकर कहा है कि इतनी चांदी जमा करना ‘अनैतिक’ है। सरकार सक्रिय होती है। मार्जिन यानी कर्ज पर चांदी की खरीदारी पर रोक लग गई है। हंट ब्रदर्स मार्जिन कॉल पूरी नहीं कर पा रहे हैं। आज 27 मार्च, 1980 का दिन है। चांदी एक दिन में 78 फीसदी गिरकर 10.80 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, हंट ब्रदर्स दिवालिया हो गए हैं। यह नामुराद तारीख भविष्य में सिल्वर थर्सडे कही जाएगी। टाइम मशीन अब 2025 में उतर रही है। यहां 1980 के बाद चांदी की सबसे बड़ी तेजी चल रही है। वजह इस बार हंट ब्रदर्स नहीं हैं, बल्कि चांदी की औद्योगिक मांग है। सालाना मांग का 70 फीसदी हिस्सा औद्योगिक खपत में जा रहा है, जबकि लगातार बीते पांच साल से चांदी की कमी बनी हुई है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। यह तेजी कहां ठहरेगी या डूबेगी, पता नहीं, लेकिन चांदी जब भी चमकती है, इतिहास मुस्कराता है और मनुष्य की महत्वाकांक्षाओं, मूर्खताओं, विनाश और सृजन के कई किस्से खनक उठते हैं। फिर मिलेंगे अगले सफर पर...

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