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अर्थव्यवस्था में हिस्सेदार धार्मिक पर्यटन : विज्ञान और संस्कृति के मेल से विकास के नए सोपान गढ़ता उद्योग

Thu, 27 Oct 2022 02:50 AM IST
Prahlad Sabnani प्रहलाद सबनानी
Updated Thu, 27 Oct 2022 02:50 AM IST
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सार
प्रधानमंत्री नवोन्मेष शिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा था कि भारत को एक वैज्ञानिक पुनर्जागरण और सांस्कृतिक पुनरुद्धार की आवश्यकता है।
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Religious tourism in economy: Industry creating new stages of development by combining science n culture
राम मंदिर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हिंदू सनातन संस्कृति में धर्म एवं अध्यात्म का विशेष महत्व है। हाल ही के समय में देश में ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण अनेक मंदिरों एवं अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय ख्याति के धर्मस्थलों का जीर्णोद्धार एवं विकास किया जा रहा है। इसके चलते इन शहरों में धर्मावलंबियों की यात्रा में तेजी आई है और इसके कारण पर्यटन के क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। 



एक अनुमान के अनुसार, देश के पर्यटन क्षेत्र में धार्मिक यात्राओं की हिस्सेदारी 60 से 70 प्रतिशत के बीच रहती है। वर्ष दर वर्ष, भारत में धार्मिक पर्यटन बढ़ने की वजह से होटल उद्योग, यातायात उद्योग, छोटे व्यवसायियों आदि को बहुत फायदा हो रहा है। वर्ष 2028 तक भारत के पर्यटन क्षेत्र में लगभग एक करोड़ रोजगार के नए अवसर निर्मित होने की संभावना है, जिसमें इस क्षेत्र का बड़ा योगदान हो सकता है। 


नेशनल सैंपल सर्वे संगठन के अनुसार, भारत में करीब पांच लाख मंदिर और तीर्थस्थल हैं, जिनकी अर्थव्यवस्था तीन लाख करोड़ रुपये से भी अधिक की है। साथ ही देश में मस्जिदों की संख्या भी करीब सात लाख और गिरजाघरों की संख्या 35,000 के आसपास है। दुनिया के जितने भी विकसित देश हैं, उन्होंने अपने धार्मिक स्थलों को बेहद खूबसूरत बनाकर दूसरे धर्मों में विश्वास रखने वाले व्यक्तियों को आकर्षित कर अपने यहां पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। 

वहीं कुछ वर्ष पूर्व तक भारत के मंदिरों को पूर्णतया नजरंदाज किया जाता रहा है। इस दृष्टि से वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं विकास हेतु किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। निश्चित रूप से इस तरह के प्रकल्पों पर करोड़ों रुपयों का खर्च होता है, परंतु विकसित होने के बाद इन केंद्रों पर पर्यटन की संभावनाएं बहुत बढ़ जाती हैं। 

अहमदाबाद में सरदार वल्लभभाई पटेल की विशाल मूर्ति की स्थापना, वाराणसी में भगवान काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण, सोमनाथ मंदिर में माता पार्वती के देवस्थान का निर्माण, माता कालिका के मंदिर का पुनरोत्थान, केदारनाथ-बद्रीनाथ का परिसंस्करण करना एवं इसके बाद अभी हाल ही में उज्जैन में श्री महाकाल लोक स्थल की स्थापना जैसे प्रयास पूरे विश्व में एक नए भारत की तस्वीर पेश करने में सफल रहे हैं। 

इक्सिगो की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में धार्मिक पर्यटन का चलन बढ़ने की वजह से वाराणसी और पुरी में होटल की बुकिंग अन्य शहरों की तुलना में अधिक रही है। पुरी और वाराणसी में पर्यटक सिर्फ धार्मिक यात्रा ही नहीं करते, बल्कि योग रिट्रीट और आयुर्वेद स्पा का आनंद लेने भी आ रहे हैं। सरकार की तरफ से प्रसाद, स्वदेश दर्शन, उड़ान जैसी योजना शुरू करने की वजह से भी देश में धार्मिक पर्यटन बढ़ा है। 

इस वजह से अंतरराष्ट्रीय होटल शृंखला भी अब धार्मिक स्थलों पर नए-नए होटलों का निर्माण कर रही हैं। धर्मस्थलों के जीर्णोद्धार एवं विकास के चलते उत्तर प्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। वाराणसी में पर्यटन के क्षेत्र में पिछले केवल चार वर्षों के दौरान 10 गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बाद से इसमें बड़ा उछाल आया है। 

वहीं, राज्य का पर्यटन विभाग भी इस दिशा में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहा है। यहां वाटर टूरिज्म को बढ़ावा दिया गया है, जिसके तहत चार क्रूज संचालित हो रहे हैं। इसी प्रकार उत्तराखंड में चार धाम यात्रा में इस बार रिकॉर्ड श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। चार धाम यात्रा में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम शामिल हैं। वर्ष 2022 में अभी तक 41 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। जबकि, 2019 में यह संख्या लगभग 35 लाख थी। 

प्रधानमंत्री नवोन्मेष शिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा था कि भारत को एक वैज्ञानिक पुनर्जागरण और सांस्कृतिक पुनरुद्धार की आवश्यकता है, क्योंकि किसी भी सभ्यता को विकसित करने के लिए विज्ञान और संस्कृति दोनों आवश्यक रहे हैं। इस बार सरयू नदी के 37 घाटों के तट पर इस वर्ष 15.76 लाख दीप प्रज्वलित कर अयोध्या की दीपावली को एक नया रूप दिया गया है। यह अपने-आप में एक रिकॉर्ड है।

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