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पाकिस्तान : अरशद शरीफ की हत्या के पीछे कौन? याद आ रहे पूर्व सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ

Fri, 28 Oct 2022 06:59 AM IST
mariana babar मरिआना बाबर
Updated Fri, 28 Oct 2022 06:59 AM IST
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सार
नैरोबी के पूर्व गवर्नर माइक सोन्को कहते हैं कि पाकिस्तानी पत्रकार अरशद मोहम्मद शरीफ की हत्या के लिए केन्या की नेशनल पुलिस सर्विस (एनपीएस) को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। एनपीएस ने स्वीकार किया है कि मगादी की स्थानीय पुलिस को पेनगानी पुलिस स्टेशन से एक सर्कुलर मिलने के बाद गलती से पुलिस ने शरीफ को गोली मार दी।
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Pakistan: Who is behind the murder of Arshad Sharif, Remembering former army chief General Pervez Musharraf
परवेज मुशर्रफ - फोटो : पीटीआई

विस्तार

कभी सेना में कमांडो रहने के बावजूद कायर के रूप में बदनाम रहे पूर्व सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ को आज पाकिस्तान में याद किया जा रहा है। कई वर्ष पूर्व सुप्रीम कोर्ट में पेश होने से बचने के लिए वह तत्कालीन सैन्य प्रमुख की मदद से पाकिस्तान से दुबई भाग गए थे। मुझे याद है कि उस समय मैं ड्राइव करते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर जा रही थी और वीवीआईपी काफिले को उलटी दिशा में रावलपिंडी की ओर जाते देखकर मैं अवाक रह गई थी। 



बाद में हमें पता चला कि पीठ में दर्द का कायराना बहाना बनाने के बाद उन्हें रावलपिंडी के आर्मी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। 2019 में पेशावर स्थित विशेष अदालत ने परवेज मुशर्रफ को इमरजेंसी लगाने के बाद संविधान को निलंबित करने के कारण पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद छह के तहत राजद्रोह का दोषी पाया था। उसके बाद से वह दुबई में थे और अत्यंत बीमार थे। वह जेल जाने की आशंका से इतना डरे हुए थे कि जब उनकी मां का इंतकाल हुआ, तो उन्होंने पारंपरिक तरीके से घर में लाकर दफनाने के बजाए उन्हें दुबई में ही दफना दिया। 


केन्या में एक मशहूर टीवी एंकर अरशद शरीफ की बर्बर हत्या की घटना की वजह से आज परवेज मुशर्रफ को याद किया जा रहा है। अरशद दुबई में स्व निर्वासन में थे और बाद में वह केन्या भाग गए थे, जहां केन्या की पुलिस ने उन पर हमला किया और उन्हें गोली मार दी। यह पहली बार नहीं है, जब किसी पाकिस्तानी पत्रकार या मानवाधिकार कार्यकर्ता की विदेश में हत्या कर दी गई हो और विदेश की सरकार हत्यारों का पता लगाने में दिलचस्पी न ले। 

लेकिन पीपीपी में बेनजीर भुट्टो के एक करीबी सहयोगी रहे फराहतुल्ला बाबर ने एक बार बताया था, 'दुबई में एक इंटरव्यू के दौरान परवेज मुशर्रफ से पाकिस्तान के असंतुष्टों की विदेश में हुई हत्याओं के बारे में पूछा गया था। जवाब में परवेज मुशर्रफ ने इसे सक्रिय कूटनीति बताते हुए कहा था कि हर कोई ऐसा करता है। जब एंकर ने कहा कि यह कूटनीति नहीं, हत्या है, तब परवेज मुशर्रफ ने सिगार का लंबा कश लगाकर ठहाका लगाया था।' 

मीडिया और पत्रकार विशेष रूप से इस क्षेत्र में शक्तिशाली शासन के लिए बुरी खबर हैं और रोजाना पत्रकारों को परेशान करने, प्रताड़ित करने, प्रतिबंधित करने, गायब होने या हत्या करने की खबरें आती हैं। बड़े या छोटे लोकतंत्रों में मुझे हमेशा आश्चर्य होता है कि पेशा कितना खतरनाक है, इसके बावजूद हम बहादुर लोगों को इस पेशे में प्रवेश करते देखते हैं। हाल ही में, हमने कुछ भारतीय पत्रकारों के बारे में सुना, जिन्हें पुरस्कार लेने के लिए विदेश जाना था, उन्हें प्रवासन पर रोक दिया गया और उन्हें देश छोड़ने की अनुमति नहीं दी गई। 

ये दो महिलाएं थीं, सना इरशाद मट्टू और राणा अयूब। केन्या में विदेशियों को निशाना बनाने की खबरें आती रहती हैं। हमने भारतीय अधिकारियों के बारे में यह कहते हुए सुना कि वे केन्या पुलिस की अब भंग हो चुकी विशेष सेवा इकाई के प्रमुख के बारे में बहुत परेशान और चिंतित थे, जिस पर कथित तौर पर गायब हुए दो भारतीयों का अपहरण करने का आरोप है। पाकिस्तान की तरह, भारतीय दूत ने भी बालाजी टेलीफिल्म्स के पूर्व सीओओ, भारतीय पत्रकार जुफिकार अहमद खान का मामला उठाने के लिए केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुतो से मुलाकात की। 

उसके लापता दोस्त का नाम मोहम्मद जैद सामी किदवई है। पाकिस्तान सरकार अरशद शरीफ की हत्या की जांच के लिए दो सदस्यीय खुफिया टीम केन्या भेज रही है, क्योंकि वह केन्याई अधिकारियों पर निर्भर नहीं रहना चाहती, जिन्होंने अतीत में हुई गोलीबारी की घटनाओं में अपनी पुलिस को बचाने की कोशिश की है। पहले इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी को भी पाकिस्तानी जांच दल में शामिल किया गया था, लेकिन परिजनों और पत्रकार बिरादरी ने मांग की कि उनकी जगह किसी वरिष्ठ पत्रकार और न्यायपालिका के किसी सदस्य को दल का हिस्सा बनाया जाए। 

इसकी वजह है आईएसआई पर अविश्वास, क्योंकि अरशद शरीफ ने पाकिस्तान से भागने से पहले एआरवाई टेलीविजन के अपने शो में, जहां से उन्हें बरखास्त कर दिया गया, और सोशल मीडिया में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थन में सेना की तीखी आलोचना की थी। खबरें बताती हैं कि दुबई की सरकार पर दबाव था कि वह अरशद शरीफ को वापस पाकिस्तान भेज दे, जहां उनके खिलाफ राजद्रोह का एक मामला दर्ज है। 

केन्या ऐसा देश है, जहां पाकिस्तानियों को वहां पहुंचने पर तुरंत वीजा मिल जाता है, इसीलिए अरशद शरीफ वहां चले गए थे। अब हर कोई यह सवाल पूछ रहा है कि आखिर एक पाकिस्तानी पत्रकार को केन्या में क्यों मारना चाहेगा। क्या पाकिस्तान से किसी ने हत्या का आदेश दिया था या यह वास्तव में गलत पहचान का मामला था, जैसा कि केन्याई सरकार कह रही है? नैरोबी के पूर्व गवर्नर माइक सोन्को कहते हैं कि पाकिस्तानी पत्रकार अरशद मोहम्मद शरीफ की हत्या के लिए केन्या की नेशनल पुलिस सर्विस (एनपीएस) को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। 

एनपीएस ने स्वीकार किया है कि मगादी की स्थानीय पुलिस को पेनगानी पुलिस स्टेशन से एक सर्कुलर मिलने के बाद गलती से पुलिस ने शरीफ को गोली मार दी। सोन्को का दावा है कि केन्याई पुलिस को पाकिस्तानी नागरिक को यह सोचकर गोली मारने के लिए 'झांसा' दिया गया था कि वह मोटर वाहन चोरी में शामिल था। नैरोबी के पूर्व गवर्नर का दावा है कि एक पाकिस्तानी हत्यारा दस्ता शरीफ का पीछा कर रहा था क्योंकि वह कथित तौर पर नैरोबी और मोम्बासा में कार शोरूम संचालित करने वाले मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट का पर्दाफाश करने वाले थे। 

वह दावा करते हैं कि इस मनी लान्ड्रिंग सिंडिकेट में पाकिस्तानी राजनेता और पाकिस्तान के डीप स्टेट (सत्ता के गठजोड़) के सदस्य शामिल थे। हाल ही में पाकिस्तान के शरीफ परिवार के कथित भ्रष्टाचार पर केंद्रित एक आने वाली डॉक्यूमेंटरी की कुछ क्लिपिंग्स जारी हुई हैं। इसमें इमरान खान और पीटीआई के अन्य नेताओं के भ्रष्टाचार के मामलों को भी शामिल किया गया है। इस डॉक्यूमेंटरी  का ट्रेलर यूट्यूब पर जारी हो चुका है। ट्रेलर ने पाकिस्तान में हलचल मचा दी है, क्योंकि इसमें पीटीआई के नेताओं के साथ ही पाकिस्तानी पत्रकारों अरशद शरीफ और इरफान हाशमी को भी दिखाया गया है। क्या अरशद शरीफ इस डॉक्यूमेंटरी  के कारण मुश्किल में थे? इसका जवाब समय देगा।

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