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खुशी: यों भी तो खुश हुआ जा सकता है, इसके लिए कोई कारण होना जरूरी नहीं
Sun, 21 Sep 2025 06:58 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
जोलांटा बर्क
जोलांटा बर्क
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sun, 21 Sep 2025 06:58 AM IST
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खुशी महज एक क्षणिक भावना नहीं है, बल्कि यह कई महत्वपूर्ण बदलावों को जन्म देती है, जो हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं। खुशी हमारी दूसरी भावनाओं से बहुत अलग है। यह लंबे समय से इच्छित काम को पूरा करने से जुड़ी है, जिसका नतीजा हमारी उम्मीदों से बढ़कर होता है।
खुशी अक्सर जीवन से संतुष्टि की व्यापक भावना को दर्शाती है। खुशी से एक ऐसी सच्ची मुस्कान पैदा होती है, जो अनैच्छिक होती है और हमारी आंखों तक पहुंचती है। खुशी हमारे शरीर में भी कई तरह के बदलाव लाती है। मसलन, खुश होने पर हमारी सांसें तेज हो जाती हैं, दिल की धड़कन बढ़ जाती है, और पूरा शरीर गर्म महसूस होता है। ये अनुभूतियां एड्रेनालाइन के स्राव के कारण होती हैं, जिससे हम जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से अधिक तैयार महसूस करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि खुशी यानी आनंद एक गुण भी है और अवस्था भी। यानी, जहां हममें से कुछ लोग इसे किसी सुखद परिस्थिति की वजह से अनुभव करते हैं, वहीं कुछ लोगों में अकारण भी इसी अवस्था में रहने की क्षमता होती है। कुछ शोध बताते हैं कि यह क्षमता आनुवंशिक होती है, और अनुमान है कि लगभग 30 फीसदी लोगों में ‘जेनेटिक प्लास्टिसिटी’ नामक क्षमता होती है। यानी वे अपने बाहरी वातावरण से असमान रूप से प्रभावित होते हैं और आनंद उत्पन्न करने की तकनीकें सीखने के बाद, उन्हें इसका अनुभव करना आसान लग सकता है। इस प्रकार, सकारात्मक अनुभवों के लिए उनकी आनुवंशिक प्रवृत्ति अधिक आनंद का कारण बन सकती है। खुशी की भावना को बढ़ाने के कई तरीके हो सकते हैं। मसलन, दूसरों के साथ कुछ बांटने से हमें ज्यादा खुशी का अनुभव हो सकता है और ऐसा सिर्फ इसलिए नहीं है कि दूसरों की संगति से हमारी खुशी बढ़ती है। दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताना भी खुशी बढ़ा सकता है।
इसलिए अगर आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ बदलाव चाहते हैं, तो दोस्तों के साथ डिनर पार्टी का आयोजन करें, जहां आप सब मिलकर खाना तैयार करें। दूसरों के साथ दौड़ते या टहलते समय, हमें अकेले दौड़ने या टहलने की तुलना में ज्यादा आनंद का अनुभव होता है। खुशी की भावना को बढ़ाने का एक सरल तरीका यह है कि आप अपनी भावनाओं को कागज पर लिखने की आदत डालें। खुशी की अनुभूति अद्भुत है, लेकिन यह हमारे जीवन की एकल भावना नहीं है। इसलिए जरूरी है कि हम अपनी बाकी सभी भावनाओं से घिरे होने के बावजूद भी खुश रहना सीखें।