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सीधी भर्ती प्रक्रिया की जरूरत

Mon, 25 Jun 2018 05:57 PM IST
भूपेन्द्र यादव
भूपेन्द्र यादव Updated Mon, 25 Jun 2018 05:57 PM IST
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Need for direct recruitment process
भूपेन्द्र यादव
केंद्र सरकार द्वारा ‘सीधी भर्ती’ के माध्यम से लोक सेवाओं में ‘संयुक्त सचिव’ स्तर के अधिकारियों को रखे जाने का निर्णय चर्चा के केंद्र में है। दरअसल सरकार ने हाल ही में विभिन्न सरकारी मंत्रालयों में संयुक्त सचिव के दस पदों के लिए सीधी भर्ती की अधिसूचना जारी की, जिसके तहत आवेदनकर्ता सिविल परीक्षा की प्रक्रिया से न होने के बावजूद सरकार के महत्त्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवा देते हुए देश के निर्माण के कार्यों में अपना योगदान दे सकेंगे।

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केंद्र सरकार के इस निर्णय पर सहमति-असहमति के बीच कुछ तथ्यात्मक विषय उभर कर सामने आए हैं, जिनके आलोक में इस निर्णय को समझना समीचीन लगता है। ऐसा निर्णय पहली बार नहीं  लिया गया है। इससे पूर्व विमल जालान, मोंटेक सिंह आहलुवालिया और शंकर आचार्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपनी सेवाएं सीधी भर्ती के माध्यम से  देते रहे हैं।

सरकार के इस कदम को राजनीतिक चश्मे से देखना भी ठीक नहीं। यह कार्मिक मंत्रालय द्वारा काफी सोच, विचार और मंथन के बाद लिया गया निर्णय है, जिसके भविष्य में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। इस निर्णय से यह भ्रम नहीं होना चाहिए कि संघ लोक सेवा आयोग से आने वाले अधिकारियों में योग्यता का अभाव है।

सीधी भर्ती की इस प्रक्रिया को संसद की ‘कमेटी ऑन इस्टीमेट 2016-17’ की लोकसभा में प्रस्तुत एक रिपोर्ट के माध्यम से समझने पर स्थिति ज्यादा स्पष्ट नजर आएगी। सदन में पेश इस रिपोर्ट में समिति ने न्यूनतम सीधी भर्ती की सिफारिश की है। समिति का मानना है कि ऐसा करने से न सिर्फ सरकारी कार्यशैली में बदलाव आएगा, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के विशेषज्ञों के महत्वपूर्ण सुझावों व विचारों को भी सरकारी प्रणाली का हिस्सा बनाया जा सकेगा।

समिति ने यह भी स्वीकार किया है कि संघ लोकसेवा आयोग के माध्यम से चयनित अधिकारी अलग-अलग  शैक्षिक पृष्ठभूमि से आते हैं। इस कारण तकनीकी पहलुओं पर कुछ मामलों में वे योग्य होने के बावजूद अनभिज्ञ होते हैं। लिहाजा नीति नियामक तैयार करने में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता हैं. इन वजहों को देखते हुए कुछ स्तरों पर विशेषज्ञों की जरूरत को खारिज नहीं किया जा सकता। 
सवाल उठ रहे हैं कि इससे कहीं उन लोगों में उत्साहहीनता का भाव न पैदा हो जाए, जो प्रतियोगी परीक्षाओं से चयनित होकर लोकसेवा में आते हैं। ऐसा सोचना उचित नहीं है, क्योंकि व्यावहारिकता की कसौटी पर इस निर्णय से प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से आने वाले लोगों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

सीधी भर्ती के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों के दक्ष लोगों को उच्च स्तरीय सेवा में लाने का निर्णय सरकार द्वारा इसलिए लिया गया है, क्योंकि संयुक्त सचिव स्तर तक पहुंचने में एक अधिकारी को लंबा समय खर्च करना पड़ता है। अत: यदि सीधी भर्ती से कुछ अनुभवी एवं विभिन्न क्षेत्रों में दक्षता पूर्वक सेवा दे रहे निजी क्षेत्रों के लोगों को लाया जाता है, तो इससे प्रतिस्पर्धा का वातावरण तैयार होगा और सेवा की गुणवत्ता में वृद्धि भी होगी।

कांग्रेस समेत कुछ दलों का यह कहना गलत है कि यह कोई प्रभावी फैसला अथवा 'गेम-चेंजर' नहीं है। मेरा खुद का संसदीय स्थायी समितियों का कार्य अनुभव बताता है कि केंद्र सरकार के नीति निर्धारण एवं उसे लागू कराने से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले संयुक्त सचिव स्तर पर ही तय होते हैं। ऐसे में, जाहिर है कि इस फैसले से सरकारी कार्य प्रणाली में बड़ा बदलाव आएगा और नवाचार की संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। 
-लेखक राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं। 
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