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कालबेलिया नृत्य: विरासत बचाने की जद्दोजहद के बीच सामाजिक स्थापना की चुनौती

Shefali Martins शेफाली मार्टिन्स
Updated Thu, 27 Apr 2023 07:01 AM IST
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सार
राखी पारंपरिक कालबेलिया नृत्य को दुनिया भर में पहचान दिला रही हैं, पर अभी भी उनके समुदाय को वह स्थान नहीं मिला है, जिसके वे हकदार हैं।
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Kalbelia Indian folk dance challenge of social recognition struggle to save Intangible Cultural Heritage
Kalbelia Dance - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पुष्कर मेले या कोई भी राजस्थानी त्यौहार कालबेलिया नृत्य के बिना अधूरा माना जाता है। इस नृत्य को 1980 के दशक में राजस्थान की बंजारा समुदाय की प्रसिद्ध नर्तकी गुलाबो सपेरा की बदौलत प्रसिद्धि मिली। रंग-बिरंगे घाघरा में सजी कालबेलिया महिलाओं का नृत्य अपनी तेज चाल और लचीलेपन से लाखों स्थानीय व विदेशी पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। कई कालबेलिया महिलाएं आज दुनिया भर में अपनी इस कला का प्रदर्शन करती हैं। लेकिन वापस आकर फिर से उसी गरीबी और उपेक्षा का शिकार हो जाती हैं।


दुनिया भर में डांसिंग मास्टर के रूप में लोकप्रियता हासिल करने वाली इन प्रतिभाशाली नर्तकियों में से एक हैं राखी कालबेलिया, जो पुष्कर से सटे गनहारा की कालबेलिया कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहती हैं। राखी अपने जीवन में कभी स्कूल नहीं गई हैं, लेकिन अपने विदेशी छात्रों के साथ टूटी-फूटी, लेकिन आत्मविश्वास से भरी अंग्रेजी में बातचीत करते जरूर नजर आ जाएंगी। राखी कहती हैं, 'मैं 13 साल की उम्र से नृत्य सिखा रही हूं और बीते 16-17 वर्षों से पुष्कर के पुराने निगजी मंदिर के नृत्य विद्यालय में प्रशिक्षण दे रही हूं।'


राखी को किसी ने यह नृत्य नहीं सिखाया है, यह उनके खून में है। वह बताती हैं कि मेरी बड़ी बहनें यह नृत्य किया करती थीं और मैं उनकी नकल करती थी। उन्होंने नृत्य कार्यशालाओं के प्रदर्शन और संचालन के लिए इटली, फ्रांस, स्पेन, ऑस्ट्रिया, जर्मनी और इंग्लैंड सहित कई देशों का दौरा किया है। साथ ही हर साल उनके पास बड़ी संख्या में विदेशी छात्र नृत्य सीखने आते हैं, जिनमें पिछले सात साल से आ रहे एक अमेरिकी, चिली और मैक्सिको के छात्र शामिल हैं। राखी ने इसके लिए अपने देश में भी बड़े पैमाने पर दौरा किया है।

वह कालबेलिया समुदाय पर लिखी एक किताब दिखाती हैं और उत्साह से कवर की ओर इशारा करते हुए कहती हैं, 'देखो, मैं इस किताब में इटालियन भाषा में छपी हूं। मैं एक राजस्थानी भाषा की फिल्म का भी हिस्सा रही हूं। मेरी शादी 21 वर्ष की उम्र में हुई थी, मेरे पति साधु और उनका परिवार मेरे काम में सहयोग करता है।' राखी बताती हैं कि इतनी प्रसिद्धि के बावजूद हम अभी वहीं हैं, जहां पहले थे। हमारे जीवन में बहुत बदलाव नहीं आया है। कालबेलियों के लिए रहने को कॉलोनी तो मिल गई है, लेकिन सुविधाएं बहुत कम हैं।'

अपने प्रदर्शन में कालबेलिया नर्तकियां चरी नृत्य (सिर पर मटकी रखकर आग जलाना और नृत्य करना), प्रैट नृत्य (एक बड़े थाल के किनारे पर नृत्य करना), नाखूनों और दर्पणों पर नृत्य करना आदि शामिल है। इन खतरनाक नृत्यों में संतुलन की एक छोटी-सी चूक कलाकार को चोटिल कर सकती है। हालांकि आधिकारिक रूप से प्रतिबंध के बाद समुदाय अब सांपों को अपने खेल का हिस्सा नहीं बना सकते हैं, जैसा कि वे प्रतिबंध से पहले करते थे। नृत्य में पीढ़ीगत बदलाव के बारे में राखी कहती हैं कि पहले गांवों में स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन आयोजित किए जाते थे। लेकिन अब पेशेवर रूप से स्टेज शो, शादी समारोह आदि आयोजनों के लिए किए जाते हैं। राखी तीन बच्चों की मां हैं और अपनी सबसे छोटी दो साल की बेटी कोमल के कालबेलिया नृत्य सीखने को लेकर उत्साहित हैं। वह कहती हैं, 'जब मैं नृत्य करती हूं, तो कोमल पहले से ही वह स्टेप करना शुरू कर देती है। मुझे यकीन है कि वह पढ़ेगी भी और नृत्य भी सीखेगी।' वहीं उसके दोनों बेटे, सात वर्षीय दुर्गेश और पांच वर्षीय जैक लोक संगीत बजाना सीख रहे हैं।

आज राखी अपने समुदाय में मिली पहचान से संतुष्ट हैं। वह गर्व से कहती हैं, 'छोटी लड़कियां मेरा अनुकरण करती हैं। मैंने जो किया है, उसकी सराहना होती है। मैं केवल अपने परिवार ही नहीं, अपनी कॉलोनी के लिए भी काम करती हूं। वर्षों पहले यहां पहुंचने के लिए कोई सड़क नहीं थी। मैंने कुछ स्थानीय पत्रकारों से बात की, जिन्होंने इसके बारे में लिखा और यह रास्ता बन गया।' राखी कहती हैं कि मुझे अपने कालबेलिया नृत्य से प्यार है और मैं जीवन भर यह नृत्य करना चाहती हूं। दरअसल, यह एक विरासत है, जिसे वह अपने आने वाली पीढ़ी तक सफलतापूर्वक पहुंचाना चाहती हैं। (चरखा फीचर)
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