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हर नया ट्रेंड अपनाना जरूरी तो नहीं: जब तनाव बढ़ाने लगे, तो समझ जाएं कि संभलने का वक्त आ चुका है

Sun, 27 Sep 2026 06:26 AM IST
प्रशांत तिवारी एरिक एथास, (द न्यूयॉर्क टाइम्स)
एरिक एथास, (द न्यूयॉर्क टाइम्स) Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 27 Sep 2026 06:26 AM IST
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सार
नई तकनीक, गैजेट, ऐप और एआई टूल हमें जल्दी आकर्षित करते हैं, लेकिन उनका उत्साह अक्सर लंबे समय तक नहीं टिकता। मनोवैज्ञानिक शोध बताते हैं कि हमारा दिमाग नवीनता की ओर स्वाभाविक रूप से आकर्षित होता है। ऐसे में ‘नॉवेल्टी ऑडिट’ और छोटे-छोटे व्यवहारिक अवरोध अपनाकर हम अनावश्यक खरीदारी और डिजिटल आकर्षण पर नियंत्रण पा सकते हैं।
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It is not necessary adopt every new trend when it starts causing stress realize that to step back take stock
प्रतीकात्मक - फोटो : AI

विस्तार

कभी मुझे खुद को ‘अर्ली एडॉप्टर’ (नई-नई चीजें सबसे पहले आजमाने का शौक) कहने पर गर्व था। नया गैजेट हो, एप हो या कोई नया ट्रेंड, मैं उसे तुरंत इस्तेमाल करना चाहता था। लेकिन, धीरे-धीरे नई चीजों का यह शौक मेरे लिए परेशानी बनने लगा। नए गैजेट, सॉफ्टवेयर अपडेट और एआई के नए टूल कुछ समय तक तो अच्छे और रोमांचक लगते हैं, पर बाद में अक्सर घर के किसी कोने में पड़े रह जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जो चीजें हम अपनी खुशी और सुविधा के लिए खरीदते हैं, वे कुछ समय बाद हमारे लिए बोझ क्यों बन जाती हैं?



नई चीजों की चाह क्यों नहीं देती लंबे समय की खुशी?
येल यूनिवर्सिटी की मनोविज्ञान की प्रोफेसर और खुशी पर शोध करने वाली लॉरी सैंटोस के अनुसार, हम अक्सर नई-नई चीजें पाने की ऐसी दौड़ में फंस जाते हैं, जो हमें लंबे समय तक खुश नहीं रखतीं। स्टैनफोर्ड के न्यूरोसाइंटिस्ट डेविड ईगलमैन के मुताबिक, हमारा दिमाग नई चीजों की ओर जल्दी आकर्षित होता है। जब हमें कुछ नया दिखाई देता है, तो दिमाग उसे खास तौर पर नोटिस करता है और याद के रूप में दर्ज कर लेता है। पर, कुछ समय बाद वह चीज हमें उतनी खास नहीं लगती। फिर हमारा ध्यान दूसरी नई चीज की ओर चला जाता है।


डोपामाइन बढ़ाता है नई चीजों को आजमाने का आकर्षण
नई चीज मिलने या उसे देखने पर दिमाग में डोपामाइन नाम का रसायन सक्रिय होता है। इससे हमारे अंदर उस चीज को जानने, आजमाने या पाने की इच्छा बढ़ सकती है। यही वजह है कि नई चीजें हमें जल्दी आकर्षित करती हैं, पर उनका आकर्षण ज्यादा समय तक नहीं रहता।

‘नॉवेल्टी ऑडिट’ से पहचानें अपने आकर्षण के ट्रिगर
व्हार्टन की प्रोफेसर केटी मिल्कमैन के मुताबिक, इस आदत को कम करने का एक तरीका है-‘नॉवेल्टी ऑडिट’। यानी पहले पहचानें कि आपको किस आकर्षण पर नियंत्रण करना है-महंगी शॉपिंग, वायरल प्रोडक्ट्स या विज्ञापनों से भरा सोशल मीडिया। फिर, ऐसे नियम बनाएं, जो खरीदारी को मुश्किल बना दे। सेव किया हुआ कार्ड हटाएं, अनावश्यक सब्सक्रिप्शन रद्द करें और शॉपिंग एप्स फोन से हटा दें। मिल्कमैन इसे ‘कमिटमेंट डिवाइस’ कहती हैं, यानी ऐसे छोटे अवरोध, जो हमें तत्काल इच्छा के बजाय लंबे समय के फायदे को चुनने में मदद करें।

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नई चीजों से दूरी नहीं, जरूरत को समझना जरूरी
हालांकि, ऐसा करने का मतलब यह कतई नहीं कि नई चीजें खरीदना पूरी तरह बंद कर दें। बस अगली बार कोई चीज आकर्षित करे, तो पहले खुद से पूछें कि क्या मुझे सच में इसकी जरूरत है, या मैं सिर्फ इसके नए होने से प्रभावित हूं।

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