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इसरो के 100: जीएसएलवी-एफ15 रॉकेट का सफल प्रक्षेपण स्वर्णिम अध्याय, 56 साल के सफर में कई मील के पत्थर स्थापित

Thu, 30 Jan 2025 06:34 AM IST
अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 30 Jan 2025 06:34 AM IST
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सार
1969 में स्थापित इसरो ने रॉकेट के पुर्जों को साइकिल और बैलगाड़ी पर ले जाने के युग से लेकर चंद्रमा तक अपनी पहुंच बनाने तक कई ऐतिहासिक उपलब्धियां अपने नाम की हैं। वैज्ञानिक प्रतिभा और काबिलियत की बदौलत धरती से लेकर अंतरिक्ष तक भारत के गौरवान्वित करने वाली इस संस्था ने अपने 100वें मिशन में भी शानदार कामयाबी पाई है।
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ISRO 100 mission Successful launch of GSLV-F15 rocket golden chapter many milestones after 1969
इसरो का 100वां मिशन लॉन्च - फोटो : इसरो यू-ट्यूब

विस्तार

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने सौवें मिशन के रूप में श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जीएसएलवी-एफ15 रॉकेट का सफल प्रक्षेपण कर भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ा है, जिस पर पूरा देश गर्व कर सकता है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश की बढ़ती ताकत को तो दिखाती ही है, अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और बढ़ती क्षमता को भी प्रमाणित करती है।



गौरतलब है कि इसरो के नए प्रमुख डॉ. वी नारायणन के कार्यकाल और वर्ष 2025 का यह पहला अभियान भी अब उस इतिहास का हिस्सा बन गया है, जो 1969 में स्थापित इसरो ने रॉकेट के पुर्जों को साइकिल और बैलगाड़ी पर ले जाने के युग से लेकर चंद्रमा तक अपनी पहुंच बनाने तक के सफर में रचा है। सीमित संसाधनों के बावजूद असाधारण सफलताएं अर्जित करने वाले इसरो ने हमेशा अपनी वैज्ञानिक दक्षता और नवाचार से दुनिया को चौंकाया है। कौन भूल सकता है कि भारत ने हॉलीवुड फिल्म ग्रेविटी  से भी कम बजट में मंगल मिशन को लॉन्च किया था।


दरअसल, बगैर किसी शोर के काम करना भारतीय मेधा की विशिष्टता रही है। डीपसीक के हालिया उभार को देखते हुए कोई आश्चर्य नहीं, अगर इसरो की यह उपलब्धि भविष्य में भारत में एआई क्षेत्र के उभार की  भी प्रेरणा बने। सौवें मिशन के रूप में जीएसएलवी- एफ15 की सफलता यही साबित करती है कि भारत की अंतरिक्ष एजेंसी अब वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में भी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। आज दुनिया भर के देश भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को स्वीकार रहे हैं और अपने इस सौवें मिशन के साथ इसरो ने अपनी विश्वसनीयता को और भी मजबूत किया है, जिससे उम्मीद की जानी चाहिए कि भविष्य में इसके ग्राहक यकीनन बढ़ेंगे।

इसरो ने पिछले करीब पचास वर्षों में यह शतक लगाया है, लेकिन अब इसरो प्रमुख का यह कहना वाकई अंतरिक्ष क्षेत्र के विकास की दृष्टि से भी आश्वस्त करने वाला है कि अगले पांच वर्षों में इसरो करीब सौ अभियान और पूरे कर चुका होगा। ताजा अभियान और इससे पहले के भी कई अभियान आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदमों की ओर इशारा करते हैं। उम्मीद है कि स्वदेशी तकनीक और वैज्ञानिक प्रतिभाओं की बदौलत मिली यह उपलब्धि देश की अंतरिक्ष ताकत को बढ़ाने के साथ अधिकाधिक युवाओं को भी इस क्षेत्र में आने या वैसे भी प्रेरित करेगी।

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