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सियासत : पाकिस्तान की सियासत में आईएसआई, पहली बार पूर्व प्रमुख पर राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप

Fri, 13 Dec 2024 06:50 AM IST
mariana babar मरिआना बाबर
Updated Fri, 13 Dec 2024 06:50 AM IST
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सार
पाकिस्तानी राजनीति में आईएसआई के हस्तक्षेप की आलोचना होती रही है, लेकिन यह पहली बार है कि इसके किसी पूर्व प्रमुख पर राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगा है। जिन फैज हमीद पर आरोप लगे हैं, वह इतिहास में सबसे शक्तिशाली और सबसे खतरनाक आईएसआई प्रमुख रहे हैं।
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ISI in Pakistan's politics, for the first time former chief accused of involvement in political activities
पाकिस्तान (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : एएनआई

विस्तार

 इस हफ्ते बदलाव की बयार केवल सीरिया में ही नहीं बही, जहां एक राजवंश को जड़ से उखाड़ दिया गया, बल्कि न केवल पाकिस्तान में तेज हवाएं चलीं, अपितु भूकंपीय बदलाव हुआ, जिसके दीर्घकालीन परिणाम तय हैं, क्योंकि इतिहास में पहली बार इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के एक पूर्व प्रमुख को राजनीतिक गतिविधियों के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए पाया गया। पूर्व खुफिया प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद पर एक सैन्य अदालत ने तीन मामलों में आरोप लगाया है-राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होना, जासूसी विरोधी कानूनों का उल्लंघन करना और अपने पद का दुरुपयोग करना।



इस साल अगस्त में जब सेना ने फैज हमीद को गिरफ्तार करने की घोषणा की, तो किसी को भी यकीन नहीं हुआ। इसका मतलब था कि मौजूदा सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर एक उदाहरण पेश कर रहे थे और सेना के दूसरे वरिष्ठ जनरलों को यह संदेश दे रहे थे कि अगर उन्होंने सेना के नियमों और कानूनों का उल्लंघन किया, तो उन्हें भी नहीं बख्शा जाएगा। अतीत में घरेलू राजनीति में आईएसआई के हस्तक्षेप की हमेशा आलोचना होती रही है, लेकिन यह पहली बार है कि आईएसआई के किसी पूर्व प्रमुख पर राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।


फैज हमीद के खिलाफ सबसे महत्वपूर्ण आरोपों में से एक यह है कि नौ मई, 2023 की हिंसक घटनाओं में उनकी कथित भूमिका है, जिसमें भीड़ ने सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला किया और पूरे पाकिस्तान में सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट कर दिया। यह घटना तब हुई थी, जब इमरान खान को इस्लामाबाद की एक अदालत के परिसर से गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले इमरान खान पर भी नौ मई के हिंसक प्रदर्शन में उनकी कथित भूमिका के लिए आरोप लगे थे, जिसमें भीड़ ने रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय, लाहौर स्थित कोर कमांडर निवास और कई अन्य सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला किया था।  

फिलहाल सैन्य हिरासत में रहने के दौरान पूर्व आईएसआई प्रमुख को सभी कानूनी अधिकार दिए गए हैं और उन्होंने अपने लिए एक बचाव वकील भी चुन लिया है, जो इसका संकेत है कि वह कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। दुर्भाग्य से, पूरी कानूनी लड़ाई बंद दरवाजों के पीछे होगी, क्योंकि सैन्य मामले सार्वजनिक नहीं किए जाते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि फैज हमीद अपने खिलाफ लगे आरोपों के बारे में सैन्य अदालत को क्या बताएंगे और वह इस मौके का इस्तेमाल खुद को निर्दोष साबित करने और दूसरों पर आरोप लगाने के लिए कैसे करेंगे।

फैज हमीद न केवल इतिहास में सबसे शक्तिशाली आईएसआई प्रमुख थे, बल्कि सबसे खतरनाक भी थे, जिन्हें बॉस होने के बावजूद किसी सेना प्रमुख द्वारा नियंत्रित नहीं किया जा सकता था, वह स्वतंत्र निर्णय लेते थे और विशेष रूप से घरेलू राजनीति में हस्तक्षेप करते थे। आम तौर पर, खुफिया प्रमुखों की पहचान गुप्त रखी जाती है और न तो कोई उन्हें पहचान पाता है और न ही उनके बारे में कोई मीडिया कवरेज होती है। लेकिन फैज हमीद को अपने काम से जुड़ी लोकप्रियता बहुत पसंद थी। यहां तक कि जब उन्हें देश के शीर्ष खुफिया अधिकारी का पद छोड़ने के लिए बाध्य किया गया और उनकी इच्छा के विरुद्ध उन्हें पेशावर में कोर कमांडर बनाकर स्थानांतरित कर दिया गया, तो उन्होंने काबुल के सेरेना होटल पहुंच कर अपनी तस्वीर खिंचवाई। उनकी वह तस्वीर दुनिया भर में वायरल हो गई, जिसमें वह ग्रीन टी की चुस्की लेते हुए मीडिया से कह रहे थे, ‘सब ठीक हो जाएगा’।

यह कोई रहस्य नहीं था कि फैज हमीद काबुल में अफगान तालिबान से मिलने गए थे, क्योंकि वे भावी सरकार बना रहे थे। उस एक तस्वीर ने दुनिया को दिखा दिया कि पाकिस्तान एक विदेशी सरकार के कामकाज में शामिल था, जो सत्ता में आ चुकी थी और कैबिनेट गठन की प्रक्रिया में जुटी थी। सेना छोड़ने के बाद भी फैज हमीद राजनेताओं के संपर्क में रहे और वह इतने अहंकारी और आत्मविश्वासी थे कि उन्होंने सेना की चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख इमरान खान और उसी पार्टी के अन्य नेताओं से संपर्क बनाए रखा।

खबरें बताती हैं कि सेना से रिटायर होने के बाद फैज हमीद करीब 50 नेताओं के संपर्क में थे, जिनमें से ज्यादातर पीटीआई से थे। सेना जांच कर रही है कि क्या फैज हमीद का इमरान खान के साथ प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संपर्क था, जब वह जेल में थे। संशोधित सेना अधिनियम के अनुसार, फैज हमीद को रिटायरमेंट की तारीख से पांच साल तक किसी भी राजनीतिक गतिविधि में शामिल होने से रोक दिया गया था।

जब इमरान खान प्रधानमंत्री थे, फैज हमीद आईएसआई प्रमुख थे और दोनों के बीच में नजदीकी बहुत बढ़ गई थी। प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद इमरान खान ने एक इंटरव्यू में कबूल किया कि उन्होंने अपने आईएसआई प्रमुख का इस्तेमाल करके सांसदों को सत्ता पक्ष की इच्छा के अनुसार वोट देने के लिए मजबूर किया। सांसदों ने स्रोत का खुलासा किए बगैर कहा कि उन्हें कुछ शक्तिशाली लोगों से टेलीफोन कॉल आए थे और उन्होंने नेशनल असेंबली और सीनेट में सत्ता पक्ष के लिए वोट किया।

उस समय ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि इमरान खान ने जनरल कमर परवेज बाजवा की जगह फैज हमीद को नया सैन्य प्रमुख बनाने का वादा किया था। जब जनरल बाजवा को इस साजिश का पता चला, तो उन्होंने तुरंत फैज हमीद को पेशावर का कोर कमांडर बना दिया। इमरान खान और फैज हमीद, दोनों ने आईएसआई मुख्यालय से तबादले का विरोध किया, क्योंकि आईएसआई प्रमुख बहुत ताकतवर होता है। उस समय फैज हमीद के पास दो विकल्प थे, या तो वह इस्तीफा दे देते या पेशावर में कोर कमांडर का पद संभालते। अंततः उन्होंने पेशावर जाना स्वीकार किया।

उसके तुरंत बाद इमरान खान को संसद में सदन के नेता पद से हटा दिया गया। यह पहली बार था, जब किसी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को अविश्वास प्रस्ताव से हटाया गया। पीएमएल (एन) के शहबाज शरीफ और पीपीपी के आसिफ अली जरदारी के नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टियों द्वारा लाए गए इस अविश्वास प्रस्ताव को तत्कालीन सैन्य प्रमुख जनरल बाजवा का पूरा समर्थन प्राप्त था। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अगर फैज हमीद के मुकदमे के दौरान यह साबित हो जाता है कि इमरान खान 9 मई को सेना के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल थे, तो क्या उन पर भी सैन्य अदालत में मुकदमा चलेगा?    

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