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अर्थव्यवस्था: कारोबारी बढ़त की संभावनाओं के बीच सतत विकास की राह पर अर्थ-तंत्र
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हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), फ्रांस और अमेरिका की यात्राओं के दौरान इन देशों के साथ जो महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं, उनसे भारत में कारोबार के तेजी से बढ़ने तथा टिकाऊ आर्थिक विकास व निवेश साख बढ़ने की अभूतपूर्व संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (यूएनईएससीएपी) की डिजिटल एवं टिकाऊ व्यापार सुविधा संबंधी रिपोर्ट-2023, इनवेस्को ग्लोबल की सोवरेन वेल्थ फंड निवेश रिपोर्ट-2023 और निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स की भारत की आर्थिक संभावना रिपोर्ट-2023 में भी भारत की बढ़ती हुई आर्थिक, वित्तीय और निवेश अहमियत को रेखांकित किया गया है।
यूएनईएससीएपी की रिपोर्ट में भारत 140 देशों को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में सबसे आगे पहुंच गया है। इनवेस्को ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक, सोवरेन वेल्थ फंड के निवेश को लेकर दुनिया के 142 मुख्य निवेश अधिकारियों ने भारत को पहली पसंद बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की कारोबारी व राजनीतिक स्थिरता में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो उसका मजबूत पक्ष है। भारत में विदेशी निवेश बढ़ रहे हैं, राजकोषीय घाटा कम हो रहा है और राजस्व संग्रह में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके अलावा, भारत की आबादी, नियामक पहल और सोवरेन निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल से भी भारत के निवेश के लिए पहली पसंद बनने में मदद मिली है। विकासशील देशों में निवेश के लिए अब चीन नहीं, बल्कि भारत निवेशकों की पहली पसंद बन गया है।
निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लिए नवाचार और बढ़ती श्रमिक उत्पादकता महत्वपूर्ण होने जा रही है। पूंजी निवेश भी भविष्य में विकास का एक महत्वपूर्ण चालक होगा। बढ़ती आय और गहरे वित्तीय क्षेत्र के विकास के साथ अनुकूल जनसांख्यिकी के कारण भारत की बचत दर बढ़ने की उम्मीद है।
निस्संदेह वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत तेजी से टिकाऊ विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। रिजर्व बैंक की वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट-2023 में कहा गया है कि देश में बैंकों की परिसंपत्ति की गुणवत्ता में लगातार सुधार हो रहा है। बैंक और कंपनियों के बही-खाते मजबूत हुए हैं। मार्च, 2023 में देश के बैंकों के फंसे हुए कर्ज का अनुपात घटकर 3.9 फीसदी और शुद्ध एनपीए अनुपात एक फीसदी रह गया है, जो विगत 10 साल का निम्नतम स्तर है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का मुनाफा निजी क्षेत्र के बैंकों की तुलना में तेजी से बढ़ा है। पिछले वित्त वर्ष में देश की विकास दर अनुमानों से अधिक 7.2 फीसदी रही है। दुनिया भर के वित्तीय संगठनों और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा वर्ष 2023-24 में भारत की विकास दर के छह से 6.5 फीसदी रहने की उम्मीदें जताई जा रही हैं।
भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता है और तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल मार्केट है। भारत का फार्मा उद्योग उत्पादित मात्रा के आधार पर दुनिया में तीसरे क्रम पर है। भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में नई शक्ति प्राप्त कर रहा है। देश में उद्योग-कारोबार को आसान बनाने के लिए विगत नौ वर्षों में करीब 1,500 पुराने कानूनों और 40 हजार अनावश्यक अनुपालन को समाप्त किया गया है। घरेलू मांग भारतीय अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत है। भारत में निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलता है। देश में प्रतिभाशाली नई पीढ़ी की कौशल दक्षता, आउटसोर्सिंग और बढ़ते हुए मध्यवर्ग की क्रयशक्ति के कारण भारत की आर्थिक अहमियत तेजी से बढ़ी है।
भारत को 2027 तक दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने के लिए टिकाऊ आर्थिक वृद्धि एवं निवेश साख को और मजबूत बनाना होगा, देश में लागू नई लॉजिस्टिक नीति व गति शक्ति योजना के कारगर अमल पर अधिक ध्यान देना होगा, सभी उत्पादों के कारोबार के लिए सिंगल विंडो मंजूरी, इन्फ्रास्ट्रक्चर और कुशल श्रमिकों की आपूर्ति के साथ-साथ विभिन्न आर्थिक और वित्तीय सुधारों की डगर पर आगे बढ़ना होगा तथा श्रमबल में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ानी होगी।