फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   india services export growth fta gcc impact economic analysis

संकट में सेवा निर्यात का सहारा: FTA और GCC के दम पर उछाल, 2030 तक एक लाख करोड़ डॉलर का लक्ष्य

Wed, 22 Jul 2026 05:43 AM IST
Jayantilal Bhandari जयंतीलाल भंडारी
Updated Wed, 22 Jul 2026 05:43 AM IST
सार

भू-राजनीतिक तनावों और पश्चिम एशिया संकट के कारण जहां वैश्विक निर्यात में गिरावट आ रही है, वहीं भारत का सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत ढाल बनकर उभरा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, वैश्विक सेवा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी बढ़कर 4.3% हो चुकी है और भारत अब दुनिया में 7वें स्थान पर पहुंच गया है।

विज्ञापन
india services export growth fta gcc impact economic analysis
भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala

विस्तार

ऐसे समय में, जब पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक निर्यात का ग्राफ तेजी से गिर रहा है, भारत का निर्यात सेवा क्षेत्र के दम पर लगातार बढ़ रहा है। इसमें खासतौर पर मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) की अहम भूमिका लगातार बढ़ रही है।
विज्ञापन


हाल ही में, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की सेवा निर्यात पर प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक सेवाओं के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी वर्ष 2005 के 1.9 फीसदी से बढ़कर इस समय करीब 4.3 फीसदी हो गई है। साथ ही, वैश्विक सेवा निर्यात में भारत ने सातवां स्थान हासिल कर लिया है, जबकि 2001 में वह 24वें स्थान पर था। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, सेवा निर्यात में बढ़ोतरी के कारण अप्रैल-मई 2026 में भारत का चालू खाता अधिशेष 2.8 अरब डॉलर रहा है। देश की जीडीपी में सेवा क्षेत्र का योगदान करीब 53.6 प्रतिशत है। उल्लेखनीय है कि पिछले एक दशक में देश के सेवा निर्यात में ढाई गुना से भी ज्यादा की वृद्धि हुई है।
विज्ञापन


मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया और चार यूरोपीय देशों (आइसलैंड, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और लिकटेंस्टाइन) के समूह ‘यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन’ के साथ सफलतापूर्वक लागू हुए व्यापार समझौतों के कारण इन देशों को भारत से होने वाला सेवा निर्यात तेजी से बढ़ा है। हाल ही में भारत और ब्रिटेन के बीच लागू हुआ ‘व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता’ भारत से सेवा निर्यात बढ़ाने में एक अहम पड़ाव है। इस समझौते में सेवा क्षेत्र को विशेष महत्व दिया गया है। साथ ही, एक ऐतिहासिक सामाजिक सुरक्षा समझौता भी हुआ है। इसके तहत ब्रिटेन में राष्ट्रीय बीमा योगदान देने वाले भारतीय पेशेवरों को भारत लौटने पर दोबारा सामाजिक सुरक्षा कर नहीं देना होगा। इसी प्रकार, भारत और ओमान के बीच लागू ‘वृहद आर्थिक साझेदारी समझौता’ भारत से ओमान को सेवा निर्यात बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


भारत का ओमान को सेवा निर्यात मौजूदा 67 करोड़ डॉलर से अगले पांच वर्षों में 1.5-2 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। आगामी महीनों में भारत के न्यूजीलैंड व यूरोपीय संघ के साथ लागू होने वाले एफटीए तथा अमेरिका-भारत के प्रस्तावित व्यापार समझौते में भी सेवा निर्यात की अहमियत साफ दिख रही है।

इसमें कोई दो मत नहीं है कि भारत के वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) सेवा निर्यात के लिए गेम चेंजर साबित हो रहे हैं। जिनोव और नैसकॉम की रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2,177 जीसीसी के साथ दुनिया के सबसे बड़े और प्रमुख केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है। भारत के जीसीसी अब उद्यम तंत्रिका केंद्र (डिसीजन मेकिंग हब) और वैश्विक नवाचार के पावर हाउस के रूप में स्थापित हो चुके हैं। दुनिया के करीब 55 प्रतिशत से अधिक जीसीसी अकेले भारत में हैं। साथ ही, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इन केंद्रों का योगदान 1.5 प्रतिशत से अधिक है। ‘फॉर्ब्स ग्लोबल 2000’ कंपनियों में से 500 से अधिक कंपनियों के क्षमता केंद्र भारत में मौजूद हैं। 2024 में जहां भारत में हर हफ्ते औसतन एक नया केंद्र खुल रहा था, वहीं अब यह रफ्तार बढ़कर हर दिन एक नया केंद्र हो चुकी है।

निस्संदेह, सेवा निर्यात का वैश्विक महाशक्ति बनने के लिए भारत को और अधिक एआई क्षमता तथा सुदृढ़ डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ सेवा निर्यात को तेजी से बढ़ाने की रणनीति पर काम करना होगा। खासतौर से, भारत को मुक्त व्यापार समझौतों के व्यावहारिक कार्यान्वयन और निर्यातकों को इन समझौतों का लाभ उठाने में सहायता प्रदान करने पर ध्यान देना होगा। ज्ञातव्य है कि भारत वर्तमान में मुक्त व्यापार समझौतों का महज 25 प्रतिशत ही पूर्णतया उपयोग कर पा रहा है, जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह उपयोग 70-80 प्रतिशत तक है। अब भारत से सेवा निर्यात में निरंतर वृद्धि के लिए सेवाओं की गुणवत्ता, दक्षता, उत्कृष्टता तथा सुरक्षा को लेकर और अधिक प्रयास करने होंगे।

उम्मीद करें कि पश्चिम एशियाई संकट व वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच जीसीसी के साथ विभिन्न द्विपक्षीय व्यापार समझौते (एफटीए) भी सेवा निर्यात को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ऐसे में, देश को वर्ष 2030 तक एक लाख करोड़ डॉलर के सेवा निर्यात का लक्ष्य प्राप्त करने में कामयाबी मिलेगी। उम्मीद करें कि वर्ष 2047 तक वैश्विक सेवा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत के स्तर पर होगी और सेवा निर्यात देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।


यूएई, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और ओमान जैसे देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) और देश में तेजी से बढ़ रहे वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जीडीपी में 53.6% का योगदान देने वाला यह क्षेत्र भारत को वर्ष 2030 तक 1 लाख करोड़ डॉलर के सेवा निर्यात लक्ष्य की ओर मजबूती से ले जा रहा है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed