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निहितार्थ : श्रीनगर में जी-20 बैठक का महत्व, पर्यटन के अलावा भी है एक बड़ी वजह

Sat, 20 May 2023 07:05 AM IST
K S Tomar केएस तोमर
Updated Sat, 20 May 2023 07:05 AM IST
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सार
श्रीनगर और लद्दाख में जी-20 बैठकें आयोजित करने की सबसे बड़ी उपलब्धि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को अंतरराष्ट्रीय मंजूरी मिलना है, जिससे कश्मीर के बारे में पाकिस्तान का दावा खत्म हो गया है। इसके अलावा इससे कश्मीर में पर्यटन के नए युग की शुरुआत हुई है।
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Importance of G-20 meeting in Srinagar, apart from tourism there is also a big reason
जी-20 (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : Twitter@Narendra Modi

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक और भाजपा के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी का 'एक राष्ट्र, एक कानून और एक प्रतीक' का सपना नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली राजग सरकार ने पांच अगस्त, 2019 को पूरा किया, जो अनुच्छेद 370 एवं 35ए के निरस्त होने के बाद हकीकत बन गया। जम्मू और कश्मीर राष्ट्रीय ध्वज के अलावा अपने स्वयं के लाल और सफेद झंडे का उपयोग करता था, जो देश के विभाजन का कारण रहे अंग्रेजों के अवशेषों को दर्शाता था। अंग्रेजों ने नफरत की आग को हवा दी, जो आज भी भारत और पाकिस्तान के बीच देखी जा सकती है।



कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने के तर्क और वैधता पर विचार किए बिना एक बात स्थापित हो गई है कि पाकिस्तान कश्मीर को भड़काता रहता था, लेकिन अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण ने इस अध्याय को बंद कर दिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस सच्चाई को स्वीकार कर लिया है, जिससे 22 से 24 मई, 2023 के बीच श्रीनगर में जी-20 की पर्यटन बैठक आयोजित करने पर भारत सरकार के कूटनीतिक कदम को और मजबूती मिलेगी।


विशेषज्ञों का मानना है कि जी-20 शिखर सम्मेलन कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के पक्ष को और कमजोर करेगा, क्योंकि विभिन्न राष्ट्रों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति इस विवाद को हमेशा के लिए बंद करने और जम्मू-कश्मीर के लोगों को आगे बढ़ने के नए अवसर देने के भारत सरकार के फैसले को मान्यता देने का सबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जी-20 की मौजूदा अध्यक्षता भारत को बड़ी संख्या में राष्ट्रों की मेजबानी करने का अवसर देती है, ताकि वे इस राज्य में सामान्य स्थिति का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकें और भारत वैश्विक स्वीकृति प्राप्त कर सके, जो पाकिस्तान के लिए झटका हो सकता है, क्योंकि वह इसे अशांत प्रदेश के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।

भारत देखने और मानने के सिद्धांत पर काम करता है, क्योंकि वह दुनिया से कुछ भी छिपाना नहीं चाहता है। जम्मू-कश्मीर की पचास प्रतिशत से अधिक आबादी पर्यटन में शामिल है, जिसने कोविड काल के बाद इस केंद्र शासित प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में 10 प्रतिशत से अधिक का योगदान दिया है। पाकिस्तान की भागीदारी से उसके प्रतिनिधि को जमीन पर सब कुछ देखने का मौका मिलता, लेकिन उसने दूर रहने का फैसला किया, जो सबसे दुर्भाग्यपूर्ण है। हाल ही में एससीओ की बैठक के बाद पाकिस्तान और चीन ने कश्मीर को लेकर विवादित बयान दिया था, जिसे भारत ने तीखे शब्दों में खारिज कर दिया था।

प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है। प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पी के मिश्रा ने भागीदारों की सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए वाणिज्य, पर्यटन, पर्यावरण, वित्त आदि मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हाल ही में बैठक की और श्रीनगर एवं लद्दाख में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करने को लेकर स्थिति का जायजा लिया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की, जिसमें गृह सचिव, आईबी के निदेशक, रॉ प्रमुख और जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे, ताकि कोई त्रुटि अगर हो, तो वह न रहे।

देवदार के पेड़ों और पहाड़ियों के शांत सौंदर्य के बीच भाग लेने वाले प्रतिनिधि एक नई गोंडोला सवारी (केबल कार) का आनंद लेंगे, जो एशिया में सबसे ऊंची है।
भारत ने यह कहते हुए पाकिस्तान की आपत्तियों को दरकिनार कर दिया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है और अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से यह अध्याय हमेशा के लिए बंद हो गया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी मान्यता दी है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि जी-20 अध्यक्ष के रूप में भारत देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसी 200 बैठकें आयोजित कर रहा है, जो इस साल सितंबर या उसके बाद होंगी।

अल्पसंख्यक मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत ने आरोप लगाया था कि जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है इसलिए जी-20 को ऐसी जगहों पर बैठकें नहीं करनी चाहिए, लेकिन भारत सरकार ने इसे अनुचित और निराधार बताया। हाल ही में पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने गोवा में विदेश मंत्रियों की बैठक से अलग इस मुद्दे को उठाया, लेकिन भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।

ऐसी आपत्तियों को लेकर भारत सरकार का रुख बिल्कुल स्पष्ट है, क्योंकि पाकिस्तान जैसे देश का जी-20 से कोई लेना-देना नहीं है और देश के सभी राज्यों में बैठकें हो रही हैं और जम्मू और कश्मीर उनमें से एक है। जयशंकर ने पाकिस्तान को फटकार लगाते हुए कहा कि इस पर बहस नहीं की जा सकती है, और खासकर ऐसे देश को, जिसका जी-20 से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अंग था, है और हमेशा रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही पाकिस्तान गृहयुद्ध के कगार पर है और मार्शल लॉ की ओर बढ़ रहा है, लेकिन वह टांग अड़ाने की आदत और नकारात्मक रवैये से बाज नहीं आएगा, जो श्रीनगर में जी-20 की बैठक आयोजित करने के भारत सरकार के फैसले के उसके रुख से स्पष्ट है।

पाकिस्तान ने श्रीनगर में जी-20 टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक आयोजित करने पर आपत्ति जताई है, क्योंकि इससे पूरी दुनिया का ध्यान इस जीवंत राज्य पर जाएगा। पाकिस्तान ने इसे संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन बताया। यहां तक कि पाकिस्तान के करीबी सहयोगी चीन ने भी पाकिस्तान की आपत्तियों का समर्थन किया और इसलिए इटानगर में अनुसंधान एवं नवाचार पर आयोजित जी-20 की बैठक से दूर रहा। चीन ने कहा कि किसी भी देश को एकतरफा कदम उठाकर क्षेत्र की स्थिति को नहीं बदलना चाहिए।

विश्लेषकों के अनुसार, श्रीनगर और लद्दाख में जी-20 बैठकें आयोजित करने की सबसे बड़ी उपलब्धि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को अंतरराष्ट्रीय मंजूरी मिलना है, जिससे कश्मीर के बारे में पाकिस्तान का दावा खत्म हो गया है। इसके अलावा इससे कश्मीर में पर्यटन के नए युग की शुरुआत हुई है। यह केंद्र शासित प्रदेश अकल्पनीय प्राकृतिक सुंदरता से समृद्ध है।      

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