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संपत्ति बाजार : चुनावी वर्ष में रियल एस्टेट की चमक से रोजगार बढ़ने और अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद

Madhurendra Sinha मधुरेंद्र सिन्हा
Updated Fri, 01 Mar 2024 07:13 AM IST
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सार
प्रॉपर्टी की वैश्विक सेवा कंपनी जेएलएल के मुताबिक, पिछले साल हर तिमाही में औसतन 65,000 इकाइयां बिकीं और पहले नौ महीनों में 2,23,905 लॉन्च हुए, जो एक रिकॉर्ड है। यह संख्या साल के अंत तक लगभग 2,80,000 रही होगी। इन आंकड़ों के आधार पर कहा जा रहा है कि इस साल कुल 2,90,000 आवासीय इकाइयां लॉन्च हो सकती हैं।  
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glow of real estate in the election year is expected to increase employment and give impetus to economy
रियल एस्टेट - फोटो : a

विस्तार

वर्ष 2023 सही मायनों में रियल एस्टेट का साल था और वर्षों बाद उसने अपनी चमक बिखेरी। यह चमक इस साल भी बरकरार है। लगातार रियल एस्टेट कंपनियों के नए लॉन्च की खबरें सामने आ रही हैं। पिछले साल देसी-विदेशी निवेशकों ने इसमें जमकर पैसा लगाया, जिसका असर भी दिखा। आंकड़े बता रहे हैं कि पिछले साल कुल 5.1 अरब डॉलर का निवेश इस क्षेत्र में हुआ। इनमें से दो अरब डॉलर से भी ज्यादा रकम जमीन की खरीद में लगाई गई, यानी इस साल या अगले साल उनमें निर्माण कार्य होंगे। इससे बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में रोजगार मिलने की उम्मीद जताई जा सकती है।



प्रॉपर्टी की वैश्विक सेवा कंपनी जेएलएल के मुताबिक, पिछले साल हर तिमाही में औसतन 65,000 इकाइयां बिकीं और पहले नौ महीनों में 2,23,905 लॉन्च हुए, जो एक रिकॉर्ड है। यह संख्या साल के अंत तक लगभग 2,80,000 रही होगी। इन आंकड़ों के आधार पर कहा जा रहा है कि इस साल कुल 2,90,000 आवासीय इकाइयां लॉन्च हो सकती हैं। जेएलएल का कहना है कि होम लोन ब्याज दरों के ज्यादा होने तथा महंगाई में बढ़ोतरी के बावजूद ग्राहक नई इकाइयों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। यदि रिजर्व बैंक अपनी अगली बैठक में ब्याज दरों में कटौती करेगा, तो उसका असर मकानों तथा व्यावसायिक संपत्ति की खरीद पर भी पड़ेगा।


वर्ष 2023 में एक और बात देखने में आई कि ग्राहक बन रहे मकानों में भी निवेश कर रहे हैं। यह एक अच्छा ट्रेंड है, जो बताता है कि आने वाले समय में मकानों की बिक्री लगातार बढ़ेगी। इसके अलावा, महंगे और लग्जरी सेगमेंट के मकानों की बिक्री खूब बढ़ी है। डेढ़ करोड़ रुपये की कीमत तक के मकानों की बिक्री में 22 फीसदी तथा लग्जरी मकानों, जो तीन करोड़ रुपये से भी ज्यादा कीमत के हैं, की बिक्री में 83 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह देश की बेहतर आर्थिक स्थिति का संकेत है। मुंबई, दिल्ली, गुरुग्राम के अलावा नोएडा में भी महंगे मकान अब काफी बिक रहे हैं।

जिस गंभीरता से निवेशक रियल एस्टेट में धन लगा रहे हैं, उससे पता चलता है कि उनका भरोसा कायम है। रियल एस्टेट में सरकारी पहल के अलावा, टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल, विदेशी करार वगैरह इसे मजबूत बना रहे हैं। नई टेक्नोलॉजी के कारण अब स्मार्ट होम धड़ल्ले से बन रहे हैं। नए उपकरणों से ऊंचे-ऊंचे मकान कम समय में तैयार हो रहे हैं। ऐसे मकान बनाना भी संभव हो गया है, जहां ऊर्जा की खपत कम होती है और ग्राहकों को ये पसंद भी आते हैं।

अंतरराष्ट्रीय एजेंसी केपीएमजी का कहना है कि 2024 भारतीय रियल एस्टेट के लिए एक उत्साहपूर्ण वर्ष होगा और पिछले साल की तुलना में 10 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी होगी और आवासीय सेक्टर में तीन लाख यूनिट बिक सकते हैं। व्यावसायिक क्षेत्र में ऑफिस स्पेस की जो मांग कोविड के कारण घट गई थी, अब तेजी से बढ़ रही है तथा आगे और बढ़ने की उम्मीद है। अब न केवल वर्क प्लेस की मांग बढ़ी है, बल्कि मॉल तथा शॉपिंग कॉम्पलेक्सों की भी। यानी आने वाले समय में कमर्शियल रियल एस्टेट को और भी बढ़ावा मिलेगा। ई-कॉमर्स तथा लॉजिस्टिक्स में भी गतिविधियां तेज हो जाने से वेयर हाउसिंग में भी तेजी आएगी। बंगलूरू, चेन्नई, पुणे, दिल्ली-एनसीआर, कोलकाता, मुंबई-ये वे शहर हैं, जहां कमर्शियल स्पेस की मांग बढ़ी है और 2024 में भी बढ़ती रहेगी।

हालांकि 2024 चुनावी वर्ष है। इसके बावजूद उम्मीद है कि अर्थव्यवस्था छह फीसदी से भी ज्यादा रफ्तार से बढ़ेगी। इस भरोसे से रियल एस्टेट को गति मिलती है। तेजी से शहरीकरण के चलते नई पीढ़ी अब रियल एस्टेट में दिलचस्पी ले रही है। इससे यह संभावना दिख रही है कि न केवल 2024 में, बल्कि आगे भी रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 में रियल एस्टेट क्षेत्र का आकार 650 अरब डॉलर का होगा, जो देश की प्रगति में हाथ बंटाएगा। रियल एस्टेट का देश के कुल जीडीपी में 7.3 फीसदी का हिस्सा है और यह रेलवे के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है। इससे सरकार को टैक्स के रूप में बहुत बड़ी राशि मिलती है। इसके विकास से लोहा, सीमेंट, फर्निशिंग के सामान, बिजली के सामान, सैनिटरी गुड्स वगैरह उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।

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