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ऑनर किलिंग से वनी तक
कुलदीप तलवार
Updated Mon, 01 Jan 2018 06:15 PM IST
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कुलदीप तलवार
पाकिस्तान की आबादी में आधी महिलाएं हैं। पाक की 342 सदस्यीय राष्ट्रीय एसेंबली में महिलाओं का सदन में पांचवां हिस्सा है। यानी 73 महिलाएं सदन में है। फिर भी वे असुरक्षित हैं। सुरक्षा को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। महिलाओं को उत्पीड़न से बचाने के लिए कोई कड़ा कानून नहीं बनाया गया है और जो कानून बनाया गया है, उस पर अमल नहीं हो सका। इसलिए इन दिनों पाकिस्तान में महिलाओं पर जुल्म ढाए जाने का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है।
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पाकिस्तान में ‘रिश्ता करने’,‘रिश्ते से इन्कार करने’ या ‘पसंद की शादी’ पर लड़कियों व महिलाओं को परिवार की शान रखने के लिए हत्या करने की प्रवृत्ति इस कदर बढ़ गई है कि पिछले नौ महीने में 280 महिलाओं की हत्या हो चुकी है। जबकि एक साल पहले ही पाकिस्तान में ऑनर किलिंग के खिलाफ नया कानून मंजूर हुआ था, लेकिन उस पर अमल न होने के कारण हालत बिगड़ी है। जिरगे व पंचायत के अन्यायपूर्ण फैसले भी जले पर नमक छिड़कने का काम करते हैं। पाकिस्तान में एक के किए की सजा दूसरे को देने के रिवाज का नाम वनी है। वनी पश्तो भाषा का शब्द है, जिसका मतलब खून है। अगर कोई शख्स कोई जुर्म करता है और उसके जुर्म के बारे में कबाइली नेताओं के जिरगे को पता चल जाता है, तो वे उसे अनोखी सजा देते हैं। इसमें जुर्म करने वाले मर्द के घर की लड़की की शादी पीड़ित खानदान के लड़के से करा दी जाती है। कई बार तो जुर्म करने वाले के खानदान की लड़की को पैदा होने से पहले वनी कर दिया जाता है। कई बार लड़कियां वनी से तभी बच पाती हैं, जब जुर्म करने वाला परिवार पैसे देकर इसकी भरपाई कर दे। यह कुप्रथा पहले पाकिस्तान के सिंध प्रांत में ‘कारो-कारी’ की सूरत में नजर आती थी, लेकिन अब यह पाकिस्तान के तमाम प्रांतों में फैल गई है। ऐसे ही अगर पति-पत्नी में यदि किसी को दूसरे के साथ अनैतिक संबंधों का शक हो जाए, तो उसे मार दिया जाता है।
पाकिस्तान में महिलाओं की दुर्दशा के लिए कुछ ओर पुराने रीति-रिवाज भी जिम्मेदार हैं। सिंध प्रांत के भीतरी इलाकों में जब लड़की मटका उठाने लगती है, तब समझ लिया जाता है कि वह अब शादी करने के योग्य हो गई है। बहुत से खानदानों में संपत्ति के बंटवारे के डर से लड़की की शादी नहीं की जाती। आम तौर पर कहा जाता है कि खुदा ने उनके मां-बाप और भाइयों को सब कुछ दिया है, इसलिए उसे घर में बैठा दिया जाता है। ऐसे ही कुछ खानदानों में पर्दे का कड़ा रिवाज है। यहां तक कि महिला का जनाजा भी दिन के बजाय रात को ले जाया जाता है, ताकि बेपर्दगी न हो। बीबी लड़कियों के कब्रिस्तान अलग होते हैं। सिंध प्रांत में किसी असरदार धार्मिक पीर को किसी खानदान की लड़की पसंद आ जाए, तो वह लड़की के पिता को खबर करता है। बेचारा पिता लड़की को दुल्हन की तरह सजाकर हवेली में छोड़ जाता है। पीर जब तक चाहे, लड़की को हवेली में रख सकता है और जब चाहे, उससे पीछा छुड़ा सकता है। ऐसी लड़कियों की शादी नहीं होती। अगर वह मां बन जाए, तो उसे पीर की जायदाद में से हिस्सा नहीं मिलता।
जब तक पाकिस्तान सरकार दोषपूर्ण महिला विरोधी कानूनों को रद्द नहीं करती है, अंधे रीति-रिवाजों पर पाबंदी नहीं लगाती, महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कानून नहीं बनाती और उस पर अमल सुरक्षित नहीं करती, तब तक महिलाओं का शोषण जारी रहेगा। ऑनलाइन स्टॉकिंग और साइबर क्राइम के इस दौर में महिलाओं के हितों का संरक्षण तो और भी जरूरी है।