फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   For those who are unable to exercise daily due to lack of time, idea of microdosing can prove to be panacea

माइक्रोडोजिंग: कुछ न करने से कुछ करना बेहतर है, फिटनेस की बदलती परिभाषा

Sun, 28 Sep 2025 06:39 AM IST
शिव शुक्ला हंटर बेनेट
हंटर बेनेट Published by: शिव शुक्ला Updated Sun, 28 Sep 2025 06:39 AM IST
विज्ञापन
सार
जो लोग समयाभाव से रोज कसरत नहीं कर पा रहे, माइक्रोडोजिंग का विचार उनके लिए रामबाण साबित हो सकता है।
 
loader
For those who are unable to exercise daily due to lack of time, idea of microdosing can prove to be panacea
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : freepic

विस्तार

माइक्रोडोजिंग का मूल अर्थ था कम मात्रा में साइकेडेलिक्स (जैसे मशरूम) लेना, ताकि खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहतर हो, और उसके दुष्प्रभाव भी कम हों। लेकिन अब इस शब्द का अर्थ है कि आप किसी चीज की बहुत कम खुराक लेते हैं, फिर भी उसके लाभ प्राप्त करते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आप रोज तीस मिनट दौड़ना चाहते हैं, लेकिन समय नहीं निकाल पाते, तो माइक्रोडोजिंग इसका समाधान हो सकता है।



विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी कहता है कि वयस्कों को हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाला एरोबिक व्यायाम करना चाहिए, जिसमें बातचीत करना मुश्किल हो या 75 मिनट जोरदार व्यायाम करना चाहिए, जिसके अंत में सांस फूलने लगे। या आप थोड़ी-थोड़ी देर दोनों तरह की गतिविधियां कर सकते हैं। इनमें तेज चलना, साइकिल चलाना, दौड़ना, तैरना या नौकायन जैसी गतिविधियां, और फुटबाल व बास्केटबाल जैसे खेल शामिल हो सकते हैं। अगर आप रोजाना व्यायाम करते हैं, तो आपको इन्हें 20-30 मिनट तक करना होगा। या आप हफ्ते में दो या तीन बार कुछ लंबे समय तक कर सकते हैं। डब्ल्यूएचओ मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाली गतिविधियों (जैसे वजन उठाना, या तेज गति वाले व्यायाम) को हफ्ते में कम से कम दो बार करने की सलाह देता है। दैनिक गतिविधियां (जैसे बच्चों के साथ खेलना या बस स्टॉप तक पैदल चलना) पूरे हफ्ते आपकी शारीरिक गतिविधि के स्तर को बढ़ा सकती हैं। घरेलू काम भी इनमें गिने जा सकते हैं। ये जोरदार व्यायाम नहीं माने जाएंगे, पर मध्यम तीव्रता वाले व्यायाम में योगदान दे सकते हैं।


2019 में 19 अध्ययनों की समीक्षा में, जिसमें 1,000 से अधिक प्रतिभागी शामिल थे, इसका अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि दिन में कई बार, छोटे-छोटे व्यायाम करने से हृदय और फेफड़ों की सेहत और रक्तचाप में उतना ही सुधार होता है, जितना कि एक लंबे सत्र से होता है। ऐसे भी सुबूत मिले कि इनसे वास्तव में वजन और कोलेस्ट्रॉल कम होता है। लेकिन शोध से पता चलता है कि आपका व्यायाम सत्र जितना छोटा होगा, आपको उतना ही अधिक प्रयास करना होगा। लंबे व्यायाम को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़ने से स्वास्थ्य और सामान्य फिटनेस को कोई नुकसान नहीं होता है। कुछ भी न करने से बेहतर है, कोई न कोई व्यायाम करना। यदि समय की कमी है, तो दिन में तीन मिनट भी, तीन सत्रों में, व्यायाम करने से सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। लेकिन यह न भूलें कि सत्र जितना छोटा होगा, उसमें उतना ही कठिन व्यायाम करना होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed