फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   economic survey Domestic consumption powering the economy trade agreements key to finding new markets

सुधार और रफ्तार: घरेलू खपत अर्थव्यवस्था की ताकत, व्यापार समझौते नए बाजार ढूंढने में अहम

Fri, 30 Jan 2026 07:23 AM IST
नितिन गौतम अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 30 Jan 2026 07:23 AM IST
विज्ञापन
सार
टैरिफ और व्यापार युद्ध के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था भारी दबाव में है। भारत भी इससे अछूता नहीं है, लेकिन इसके बावजूद आर्थिक समीक्षा में भारत की विकास दर को मजबूत बताया गया है, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था की ताकत का पता चलता है।
loader
economic survey Domestic consumption powering the economy trade agreements key to finding new markets
निर्मला सीतारमण - फोटो : PTI

विस्तार

ऐसे दौर में, जब वैश्विक बाजार व्यापार युद्ध की आशंकाओं व भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रहे हैं और भारत वैश्विक अनिश्चितताओं, घरेलू अपेक्षाओं तथा क्षेत्रीय चुनौतियों के चौराहे पर खड़ा है, तब वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा में मौजूदा वित्त वर्ष में 7.4 फीसदी की मजबूत विकास दर और आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में वास्तविक आधार पर 6.8 से 7.2 फीसदी की अनुमानित वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित ताकत को रेखांकित करती है।


सर्वेक्षण के अनुसार, घरेलू खपत अर्थव्यवस्था को मुख्य गति प्रदान कर रही है। कृषि क्षेत्र के शानदार प्रदर्शन से ग्रामीण मांग में वृद्धि हुई है, जबकि कर सुधारों ने परिवारों की व्यय योग्य आय बढ़ाई, जिससे शहरी उपभोग में भी सुधार आया। महंगाई पर नियंत्रण भी उत्साहजनक है। अप्रैल से दिसंबर, 2025 के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 1.7 फीसदी तक गिर गई। सकारात्मक बात यह है कि आरबीआई और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, दोनों अनुमान लगा रहे हैं कि आने वाले वर्ष में मुद्रास्फीति धीरे-धीरे बढ़ेगी, पर यह आरबीआई के चार फीसदी के लक्ष्य के भीतर ही रहेगी। सर्वेक्षण स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि भू-राजनीति, टैरिफ व औद्योगिक नीतियां वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को नया आकार दे रही हैं।


मुक्त व्यापार पर संदेह और महत्वपूर्ण खनिजों की होड़ जैसी वैश्विक प्रवृत्तियां भारत के निर्यात व रुपये पर दबाव डाल रही हैं। वित्त वर्ष 2025 में राजकोषीय घाटा बढ़कर जीडीपी का 3.2 फीसदी हो गया, जो उभरते दबावों को दर्शाता है। इसके बावजूद, अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान वस्तु निर्यात में 2.4 प्रतिशत तथा सेवा निर्यात में 6.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। यूरोपीय संघ के साथ एफटीए तथा ब्रिटेन, न्यूजीलैंड व ओमान जैसे देशों के साथ हाल के समझौते अमेरिका पर निर्भरता कम करने तथा नए बाजार तलाशने की दिशा में अहम हैं।

जब अधिकांश वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं मंदी के दौर से गुजर रही हैं, तब भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का 701 अरब डॉलर से अधिक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना-जो करीब 11 महीनों के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है-बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, व्यापार घाटा अब भी चुनौती बना हुआ है, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में मामूली सुधार हुआ है। कुल मिलाकर, आर्थिक सर्वेक्षण वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यह संदेश देता है कि भारत की आर्थिक मजबूती घरेलू मांग, नियंत्रित मुद्रास्फीति व रणनीतिक व्यापार समझौतों पर टिकी है, पर वैश्विक जोखिमों से निपटने के लिए निरंतर सतर्कता और सुधार आवश्यक हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed