फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Dynastic politics expansion

वंशवादी राजनीति का विस्तार

Thu, 12 Apr 2018 07:10 PM IST
मरिआना बाबर
मरिआना बाबर Updated Thu, 12 Apr 2018 07:10 PM IST
विज्ञापन
Dynastic politics expansion
मरियम एवं जुनैद

दक्षिण एशिया में वंशवादी राजनीति जारी है, जहां परिवार का नाम राजनीति में ब्रांड बन जाता है और वोट हासिल करने के लिए भुट्टो तथा शरीफ जैसे नामों का इस्तेमाल किया जाता है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। इस बार मैं वंशवादी राजनीति की चर्चा इसलिए कर रही हूं, क्योंकि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के 23 वर्षीय नाती मोहम्मद जुनैद सफदर ने, जो बेहद स्मार्ट और खूबसूरत हैं, हाल ही में राजनीति में प्रवेश किया है। इस बार गर्मियों में जैसे ही पाकिस्तान में चुनावी प्रक्रिया शुरू होगी, जुनैद को चुनाव प्रचार में देखा जा सकेगा। वंशवादी पात्रता की भावना मुल्क की राजनीतिक संस्कृति पर हावी है, जो संस्थागत लोकतंत्र के विकास को रोकती है।


loader

जुनैद पाकिस्तान की लोकप्रिय नेता और नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज तथा सांसद कैप्टन मोहम्मद सफदर के बेटे हैं। उन्होंने इंग्लैड के डरहम विश्वविद्यालय के ट्रेवलियन कॉलेज से 'राजनीति' में स्नातक और प्रथम श्रेणी में प्रतिष्ठा के साथ कला स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की है। पहले मरियम नवाज ने कहा था कि जुनैद की दिलचस्पी पाकिस्तानी सेना में शामिल होने की है, जबकि वह एक पोलो खिलाड़ी भी हैं। अब औपचारिक तौर पर राजनीति में शामिल होने के बाद जुनैद शरीफ परिवार की तीसरी पीढ़ी के पहले सदस्य बन गए हैं।

पाकिस्तान के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक परिवार के घर शरीफ निवास के आसपास के इलाकों में जुनैद के पोस्टर और तस्वीरें लगाई गई हैं। हालांकि इन दिनों रैली में जनता पाकिस्तान की वंशवादी राजनीति में मरियम नवाज और बिलावल भुट्टो जैसे युवा और नए चेहरे का समर्थन करती है, लेकिन परिवार के सदस्य को कमान सौंपे जाने के बारे में गंभीर सवाल भी पूछे जा रहे हैं। इस परिवार ने राजनीति को पारिवारिक उद्यम बना दिया है। हाल ही में जब सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ को अयोग्य घोषित कर दिया, तो उन्होंने अपनी पार्टी पीएमएल-एन का नेतृत्व करने के लिए अपने भाई शहबाज शरीफ का नाम मनोनीत किया। हालांकि अब भी असली शक्ति नवाज शरीफ के पास ही है, जो सारे फैसले लेंगे। शहबाज शरीफ अपनी जगह अपने बेटे हमजा को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाने के लिए तैयार कर रहे हैं, हालांकि हमजा को भी पहले अपने पिता के प्रांतीय विधानसभा सीट पर उपचुनाव में जीतना होगा। मरियम नवाज और हमजा शरीफ के बीच काफी प्रतिस्पर्धा है। शहबाज शरीफ को लगता है कि उनके बेटे को लंबा राजनीतिक अनुभव है, जबकि मरियम नवाज शरीफ की बेटी होने का फायदा उठा रही है, जिसकी सक्रिय राजनीति की पृष्ठभूमि नहीं है।

कुछ विश्लेषकों के अनुमान के मुताबिक, संसद से प्रांतीय विधानसभाओं तक आधी से ज्यादा सीटें पिता से पुत्र और भाई से भाई को गई हैं, ताकि राजनीति के उद्यम को परिवार के दायरे में मजबूती से पकड़कर रखा जाए। राजनीतिक विश्लेषक जाहिद हुसैन कहते हैं, 'व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बदलाव के बावजूद पिछले साठ साल से पाकिस्तान की चुनावी राजनीति बड़े पैमाने पर पारिवारिक व्यवसाय है। कुछ परिवारों ने पाकिस्तान की विधायिका पर अपना वर्चस्व बनाए रखा है और इसे कुलीनतंत्र बना दिया है।' वह आगे कहते हैं, पाकिस्तानी सेना भी, जिसने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सबसे ज्यादा पाकिस्तान पर राज किया है, वंशवाद की राजनीति के लिए जिम्मेदार है। अपनी सत्ता को वैध बनाने और बनाए रखने में सभी सैन्य शासकों ने शक्तिशाली राजनीतिक परिवारों से सहयोग की मांग की। उन्होंने यह भी बताया कि 'कुछ अपवादों को छोड़ दें, तो सभी प्रमुख राजनीतिक राजवंश अपने दीर्घकालीन राजनीतिक हितों और राज्य का संरक्षण प्राप्त करने के लिए लगातार सैन्य शासन का हिस्सा रहे हैं। सबसे शक्तिशाली राजनीतिक परिवारों में से कुछ को तो वास्तव में सैन्य शासकों द्वारा सामने लाया गया था।'

पाकिस्तान का पहला वंशवादी परिवार भुट्टो का परिवार है। इस परिवार के पूर्व मुखिया जुल्फिकार अली भुट्टो का नाती बिलावल भुट्टो जरदारी उस दौर में राजनीति में सक्रिय हैं, जब भुट्टो ब्रांड का नाम काम नहीं कर रहा और पंजाब प्रांत में उसका पूरी तरह से सफाया हो गया लगता है, क्योंकि उस प्रांत में इमरान खान ताकत हासिल कर रहे हैं, जो प्रधानमंत्रियों को बनाता और सत्ता से हटाता है। एक राजनीतिक लेखक उमर वराइच कहते हैं, 'पार्टियों की तुलना में नेता मजबूत ब्रांड होते हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की तुलना में बेनजीर हमेशा एक मजबूत ब्रांड थीं। पीएमएल-एन से ज्यादा मजबूत ब्रांड नवाज शरीफ हैं।' आज बेनजीर भुट्टो की एकमात्र बहन सनम भुट्टो जीवित हैं, जो लंदन में रहती हैं और तलाकशुदा हैं। सनम ने शुरू से ही राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और खुद को सार्वजनिक जीवन से अलग कर लिया। बेनजीर के तीनों बच्चे अपनी खाला (मौसी) से प्यार करते हैं। इसी तरह मुल्क की मुख्य विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ भी, जो खुद को जमीनी स्तर का आंदोलन बताती है, अंततः अपने नेता और क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान के व्यक्तित्व के इर्द-गिर्द केंद्रित है।

राजनेता जब मुश्किल में होते हैं, तो उनकी पत्नियां भी राजनीति में आती हैं। बेगम नुसरत भुट्टो को मार्शल प्रशासक जनरल जिया उल हक का सामना करना पड़ा था और उन्होंने अपने पति के जेल जाने के बाद पीपीपी का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया था। बेगम कुलसुम नवाज शरीफ ने भी जनरल परवेज मुशर्रफ के खिलाफ तब संघर्ष किया था, जब नवाज शरीफ जेल में थे। वराइच कहते हैं, इमरान खान की लोकप्रियता की एक वजह यह है कि उन्होंने वंशवादी राजनीति खत्म की है, लेकिन ऐसा वह अपने व्यक्तित्व के जादू के जरिये करते हैं। इमरान खान के दो बेटे लंदन में रहते हैं और अब तक उन्होंने राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। पर पाकिस्तान की वंशवादी राजनीति को देखते हुए भविष्य में वे राजनीति में उतर भी सकते हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed