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कूटनीति : ईरान पर कब हमला करेगा अमेरिका, जंग के नए मैदान पर लगा कयासों का मोर्चा

Sat, 21 Jun 2025 07:05 AM IST
शिव शुक्ला ब्रेट स्टीफेंस, द न्यूयॉर्क टाइम्स
ब्रेट स्टीफेंस, द न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: शिव शुक्ला Updated Sat, 21 Jun 2025 07:05 AM IST
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सार
डोनाल्ड ट्रंप इतिहास में शांतिदूत और ईरान को बम बनाने से रोकने वाले व्यक्ति कहलाना चाहते हैं। और खामेनेई भी नहीं चाहेंगे कि उन्हें इतिहास में ईरान के अंतिम शासक के रूप में जाना जाए। ऐसे में यहां सभी पक्षों के लिए एक शानदार समझौते की गुंजाइश तो बनती ही है।
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Diplomacy: When will America attack Iran, speculations begin on new battlefield
बेंजामिन नेतन्याहू, डोनाल्ड ट्रंप, अयातुल्लाह अली खामेनेई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

 कोई भी, यहां तक कि खुद राष्ट्रपति ट्रंप भी, निश्चित रूप से नहीं जानते कि क्या अमेरिका, ईरान पर सैन्य हमला करने में इस्राइल के साथ शामिल होगा। उन्होंने बुधवार को कहा, ‘मैं ऐसा कर सकता हूं, मैं ऐसा नहीं भी कर सकता हूं।’ लेकिन तीसरे अमेरिकी विमानवाहक पोत के क्षेत्र में पहुंचने और राष्ट्रपति द्वारा ईरान के ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ के आह्वान के साथ, युद्ध की आशंका पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है-खास तौर पर अब, जबकि ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने ट्रंप की मांग को कठोरता से ठुकरा दिया है।



यदि अमेरिका हमला करता है, तो उसका सबसे स्पष्ट लक्ष्य फोर्दो परमाणु स्थल होगा, जो बहुत गहराई में है, जहां ईरान यूरेनियम संवर्धन करता है और जिसे, अधिकांश रिपोर्टों के अनुसार, केवल 15 टन के बम से ही नष्ट किया जा सकता है, जिसे मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (एमओपी) के नाम से जाना जाता है।

कम ज्ञात, लेकिन निश्चित रूप से अमेरिकी लक्ष्य सूची में ईरान के मुख्य (अब काफी हद तक नष्ट हो चुके) नतांज संवर्धन संयंत्र के दक्षिण में अब भी एक नई अधूरी भूमिगत सुविधा है। अमेरिकी पायलट भी ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर और ठिकानों पर हमला करने में अपने इस्राइली समकक्षों के साथ शामिल होंगे। किसी को संदेह नहीं है कि अमेरिका ईरान की परमाणु क्षमताओं को बहुत नुकसान पहुंचा सकता है और वह भी बेहद कम समय में।

हालांकि, उसके बाद क्या होगा, इसका अनुमान लगाना कठिन है। अमेरिकी हमले के समर्थकों का मानना है कि ट्रंप के पास इस्राइल की मदद करने के अलावा कोई और वास्तविक विकल्प नहीं है, जिससे कि वह ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को महीनों नहीं, बल्कि वर्षों पीछे धकेलेंगे और इसी दौरान ईरानियों द्वारा अपने व्यापक रूप से घृणास्पद शासकों को उखाड़ फेंकने की संभावना भी पैदा होगी। इसके विपरीत, संशयवादियों को डर है कि ईरान के नेता अमेरिकी हमले से यह सबक लेंगे कि उन्हें बहुत पहले ही बम बना लेना चाहिए था और ऐसे हमले का उचित जवाब यह होगा कि वे अपने देश में अधिक दमनकारी रवैया अपनाएं तथा विदेशी कूटनीतिक प्रस्तावों पर कम ध्यान दें। संशयवादियों को यह भी उम्मीद है कि ईरान इस हमले का जवाब अपनी घातक क्षेत्रीय गतिविधियों को बढ़ाकर देगा, जिससे अमेरिका को एक और पश्चिम एशियाई युद्ध में उलझाया जा सके, जिससे ट्रंप प्रशासन बचना चाहता है।

मैं हमले के समर्थकों के साथ हूं। परमाणु हथियारों से लैस ईरान, जिसकी मिसाइलें लगातार बढ़ती जा रही हैं, एक बड़ा खतरा है। ईरान के वर्षों के टालमटोल के बाद, जिसके कारण बाइडन प्रशासन को भी कूटनीति छोड़नी पड़ी (जिसका विस्तृत विवरण पिछले महीने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की एक रिपोर्ट में दिया गया था), दुनिया के पास ईरानी शासन को परमाणु कार्यक्रम से रोकने के लिए व्यावहारिक गैर-सैन्य विकल्प समाप्त हो गए थे।

संदेहवादियों की बात को खारिज करना भी मूर्खता है। अनपेक्षित परिणाम जीवन का एक स्वाभाविक तथ्य है। एक अमेरिकी हमला ईरान को भविष्य के हमलों के खिलाफ अपने परमाणु प्रयास को दोगुना करने के लिए प्रेरित कर सकता है, खासकर अगर ईरानी शासन को लगता है कि हमले बंद होने के बाद वह सुरक्षित प्रयास फिर से शुरू कर सकता है। हवाई हमलों के प्रभावों को बनाए रखने की कुंजी ईरानी शासन को अन्यथा सोचने पर मजबूर कर देने में है। तो फिर ट्रंप को क्या करना चाहिए। सबसे पहले, तो उन्हें फोर्दो और अन्य परमाणु ठिकानों पर बंकर बस्टर बम गिराना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ईरान जल्दी बम नहीं बना सकता है। इसके बाद तेहरान के सामने एक कूटनीतिक प्रस्ताव भेजना होगा, जिसे ईरान चाहकर भी ठुकरा नहीं सके।

इसे इस तरह किया जा सकता है कि ईरान को लालच देते हुए अमेरिका अधिकांश आर्थिक प्रतिबंधों से तत्काल राहत दे सकता है। साथ ही यह वचन भी दे सकता है कि न तो अमेरिका और न ही इस्राइल ईरान के महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे और अन्य आर्थिक परिसंपत्तियों पर हमला करेंगे। अमेरिका इस्राइल को अपनी बमबारी रोकने के लिए भी राजी कर सकता है। लेकिन इसके लिए ईरान को दो बातों पर सहमत होना होगा। पहला, स्थायी, सत्यापन योग्य, व्यापक और तत्काल परमाणु निरस्त्रीकरण, जिसमें उसके संवर्धन कार्यक्रमों का निरीक्षण करके उसे खत्म करना शामिल है।

 दूसरा, हिजबुल्ला, हमास और आतंक के अन्य विदेशी चेहरों के लिए अपने वित्तीय और सैन्य समर्थन का अंत। अगर ईरान सौदे की शर्तों से इन्कार करता है, तो ट्रंप इस्राइल को स्टील्थ बॉम्बर और एमओपी पट्टे पर देने की धमकी भी दे सकते हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता क्रोध या गर्व के कारण इस सौदे को अस्वीकार कर सकते हैं। लेकिन उन्हें इसके परिणामों के बारे में सावधानी से सोचना होगा।

दमन के अपने तंत्र सहित ईरानी शासन अब अपने लोगों के लिए कमजोर और असुरक्षित दिखता है; वे उन नेताओं के खिलाफ विद्रोह कर सकते हैं, जो प्रतिबंधों में राहत के बजाय यूरेनियम सेंट्रीफ्यूज का चयन करेंगे। जहां तक हिज्बुल्ला और हमास का सवाल है, वे अब थक चुके हैं, जिससे ईरान को कमजोर रणनीतिक लाभ मिल रहा है और उसे वित्तीय और राजनीतिक लागत नहीं दे पा रहा है। और अगर ईरानी शासन को अब भी लगता है कि वह अब भी गुप्त रूप से कुछ कर सकता है, तो उसे खुद से पूछना चाहिए कि इस्राइल उसके इतने सारे शीर्ष सैन्य कमांडरों और खुफिया अधिकारियों का पता करके मारने में कैसे सफल हुआ, जब वे सो रहे थे।

डोनाल्ड ट्रंप इतिहास में शांतिदूत और ईरान को बम बनाने से रोकने वाले व्यक्ति कहलाना चाहते हैं। और खामेनेई भी नहीं चाहेंगे कि उन्हें इतिहास में ईरान के अंतिम शासक के रूप में जाना जाए। ऐसे में यहां सभी पक्षों के लिए एक शानदार समझौते की गुंजाइश बनती है।

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