फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   dialogue is must

बात से बात चले

Sun, 01 Apr 2018 07:58 PM IST
salman haidar सलमान हैदर
Updated Sun, 01 Apr 2018 07:58 PM IST
विज्ञापन
dialogue is must
भारत-पाकिस्तान

भारत और पाकिस्तान के राजनयिकों के बीच तनातनी की पृष्ठभूमि में पाकिस्तान के उच्चायुक्त सोहेल महमूद का भारत लौटना एक अच्छी खबर है। आते ही उन्होंने कहा है कि भारत के साथ पाकिस्तान विवादों को सुलझाना चाहता है। मैं समझता हूं कि उनके इस बयान का स्वागत किया जाना चाहिए और भारत को भी विवाद सुलझाने की दिशा में हाथ आगे बढ़ाना चाहिए।


loader

गौरतलब है कि हाल के दिनों में भारत और पाकिस्तान के बीच राजनयिक संबंधों को लेकर तल्खी बढ़ चली थी और दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति फिर से बढ़ने लगी थी। हाल ही मे भारत ने पाकिस्तान के समक्ष इस्लामाबाद स्थित भारतीय राजनयिकों को वहां के अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किए जाने और पीछा करने को लेकर विरोध जताया था। उसके बाद बदले में पाकिस्तान ने भी अपने राजनयिकों और उनके बच्चों के उत्पीड़न को लेकर एक नोट जारी कर दिया था। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव की वजह से पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने बैठक के नाम पर सोहेल महमूद को पाकिस्तान बुला लिया था। लेकिन अच्छी बात यह है कि महमूद एक हफ्ते बाद पाकिस्तान से लौट आए हैं। मुझे लगता है कि पाकिस्तान ने इन्हीं कथित घटनाक्रमों पर चर्चा के लिए अपने उच्चायुक्त को पाकिस्तान बुलाया होगा, अगर कोई दूसरी बात होती या पाकिस्तान इस तनाव को और बढ़ाना चाहता, तो संभवतः महमूद फिलहाल अभी नहीं लौटते। साफ है कि पाकिस्तान भी तनाव बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। पाकिस्तान के साथ हमारे तनावपूर्ण रिश्ते का कारण अक्सर आतंकवाद, घुसपैठ, सीमा विवाद रहा है।

दोनों देशों के बीच राजनयिकों को लेकर इस तरह की तनातनी पहले नहीं दिखी थी। बताया जाता है कि मार्च में भारतीय उच्चायोग के चार अधिकारी जब अपनी आधिकारिक गाड़ी में बैठकर बाजार जा रहे थे, तब मोटरसाइकिल पर सवार दो लोगों ने उनका पीछा किया और पीछा करते हुए मोबाइल से उनका वीडियो भी बनाया। इसके अलावा, भारत की यह भी शिकायत है कि भारतीय उच्चायोग की वेबसाइट को पाकिस्तान में लगातार ब्लॉक कर दिया जाता है, जिससे उच्चायोग के सामान्य कामकाज पर असर पड़ता है। इस तरह की घटनाएं बेहद दुखद हैं, पाकिस्तान सरकार को इस तरह के मामलों की जांच करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
 
स्वाभाविक रूप से दोनों पड़ोसी मुल्कों-भारत और पाकिस्तान को रिश्तों को सामान्य और सहज बनाने की दिशा में काम करना चाहिए, क्योंकि आपसी संबंधों में तनाव बढ़ाने में न तो हमारा राष्ट्रीय हित है और न ही पाकिस्तान का। तनाव बढ़ने और रिश्ते खराब होने से दोनों देशों का नुकसान ही होता है। संभवतः यही वजह है कि जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी कहा है कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत करनी चाहिए। महबूबा जिस राज्य की मुख्यमंत्री हैं, उस पर पाकिस्तान के साथ रिश्तों का सबसे ज्यादा असर पड़ता है। अगर दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब होते हैं, तो कश्मीर के लोगों का सीमा पार आना-जाना बाधित होता, व्यापारिक रिश्तों पर असर पड़ता है और सीमा पर गोलीबारी की स्थिति में जान-माल का नुकसान भी जम्मू-कश्मीर को ही सबसे ज्यादा झेलना पड़ता है। इसलिए अगर महबूबा ने दोनों देशों के बीच बातचीत बहाल करने की अपील की है, तो यह स्वाभाविक है और उस पर केंद्र सरकार को विचार करना चाहिए।

अब सवाल उठता है कि बातचीत हो, तो कैसे हो। भारत और पाकिस्तान के बीच कई बार बातचीत हुई है और मुझे भी अपने देश की तरफ से पाकिस्तान के साथ बातचीत का अवसर मिला है। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि पाकिस्तान हठधर्मिता पर उतर आता है और सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करता है। यह भी साबित हो चुका है कि भारत के खिलाफ आतंकी घटनाओं को बढ़ावा देने और भारत-विरोधी आतंकवादियों को सहयोग व समर्थन देने में पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान का हाथ रहा है। अगर वाकई पाकिस्तान भारत के साथ संबंध बेहतर करना चाहता है, तो उसे इन सब गतिविधियों से बाज आना चाहिए, क्योंकि इससे उसे ही सर्वाधिक नुकसान होने वाला है। इसके अलावा, दोनों देशों के राजनीतिक संबंध सुधारने के साथ व्यापारिक रिश्तों को भी आगे बढ़ाना चाहिए। दोनों देशों के बीच अगर व्यापारिक रिश्ते आगे बढ़ते हैं, तो इससे दोनों को फायदा होगा। लेकिन ऐसा तब होगा, जब दोनों देशों के बीच स्थिति सामान्य रहेगी। भारत ने हमेशा आत्मसंयम से काम लिया है। यहां तक कि पठानकोट और उड़ी हमले के बाद जब दोनों देशों के रिश्ते निचले धरातल पर पहुंच गए थे, तो भारत ने धैर्य और साहस के साथ न केवल पाकिस्तान को सबक सिखाया, बल्कि रिश्ते को बहुत ज्यादा बिगड़ने नहीं दिया।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकी समूहों को पनाह देने के लिए पाकिस्तान की तीखी आलोचना की है, जिसके चलते पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि खराब हुई है। लेकिन पाकिस्तान अब छोटे देशों के साथ दोस्ती के लिए हाथ बढ़ा रहा है। हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने नेपाल की यात्रा की थी। चूंकि पिछले कुछ समय से नेपाल में भारत- विरोधी माहौल को चीन ने हवा दी है, इसलिए पाकिस्तान भी भारत को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन पाकिस्तान और चीन, दोनों को समझना चाहिए कि नेपाल से हमारे रिश्ते बहुत गहरे हैं और हम दोनों को एक दूसरे की जरूरत है। बेशक अभी नेपाल में भारत को लेकर थोड़ी नाराजगी हो सकती है, लेकिन उम्मीद है कि हमारी सरकार नेपाल से रिश्ते को और बेहतर करने की दिशा में सक्रिय होगी और चीन तथा पाकिस्तान के नापाक मंसूबे को ध्वस्त कर देगी। भारत और पाकिस्तान, दोनों देशों को अपने राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए रिश्ते को बेहतर करने की दिशा मंे आगे बढ़ना चाहिए और आपसी मतभेद को बातचीत के जरिये हल करना चाहिए, क्योंकि बातचीत से बेहतर विकल्प कुछ नहीं है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed