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चिंता: मशीन पर निर्भरता कम कर रही गिनने की क्षमता, रोजगार, शिक्षा और कला का भविष्य अधर में
Fri, 20 Jun 2025 06:52 AM IST
शिव शुक्ला
लीफ वेदरबी
लीफ वेदरबी
Published by: शिव शुक्ला
Updated Fri, 20 Jun 2025 06:52 AM IST
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सार
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चैटजीपीटी
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AI
विस्तार
चैटजीपीटी को ढाई साल पहले जारी किया गया था, और तब से हम सार्वजनिक रूप से दहशत में हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मनुष्यों की तरह लिख सकता है, जिससे यह डर पैदा होता है कि मशीन द्वारा तैयार पाठ पर बहुत अधिक निर्भर रहने से हमारी उच्च स्तर पर पढ़ने-लिखने की क्षमता कम हो जाएगी। हमने सुना है कि कॉलेजों में निबंध लिखने का चलन खत्म हो गया है और बड़ी संख्या में छात्र कॉलेजों में धोखाधड़ी करने के लिए एआई उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। इसमें नौकरियों, शिक्षा और कला के भविष्य को एक साथ कमजोर करने की क्षमता है।
स्थिति वास्तव में भयावहता की ओर बढ़ रही है, लेकिन फिलहाल सबसे बड़ी समस्या कॉलेज निबंध, उपन्यास या कार्यालय ज्ञापन नहीं है। यह कंप्यूटर कोड है। पिछले साल जब मैं एआई, भाषा और दर्शन पर एक कोर्स पढ़ा रहा था, तो मैंने छात्रों से पूछा कि वे चैटबॉट का उपयोग कैसे करते हैं, तो उनमें से एक छात्र ने मुझे बताया कि उसे हाईस्कूल में पढ़ाया गया था कि जब भी उसके पास डाटा से भरी स्प्रेडशीट होती है (जैसे कि लैब प्रयोग के परिणाम या सर्वेक्षण से एकत्रित जानकारी), तो उसे डाटा यानी वाक्य या पाठ को छोटे खंडों में तोड़ना होता था और उसके विश्लेषण के लिए त्वरित रूप से कोड लिखना होता था। लेकिन अब वह स्प्रेडशीट को चैटजीपीटी में डाल देता है, जो उसका बेहद तेजी से विश्लेषण करता है और उसे लगभग कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं होती। तभी मुझे यह बात समझ में आई कि एआई हमारे ज्ञान और गणित का उपयोग करने तथा मात्रात्मक तर्क करने की क्षमता के लिए भी उतनी ही बड़ी चुनौती है, जितनी कि साक्षरता के लिए।
फरवरी में, एआई इंजीनियर आंद्रेज कारपैथी ने एक्स पर बताया कि वह एक नए प्रकार का सॉफ्टवेयर विकसित करने में लगे हुए थे, जिसे उन्होंने ‘वाइब कोडिंग’ नाम दिया। चैटबॉट को दिए गए मौखिक संकेतों के अलावा कुछ भी उपयोग किए बिना वह डाटा पर तदर्थ प्रयोग कर रहे थे और ‘कीबोर्ड को मुश्किल से छूते थे।’ उन्होंने कहा कि इससे वह यह भूल गए कि कोड भी मौजूद है, और उन्होंने कठिन काम एआई पर छोड़ दिया। कारपैथी की पोस्ट वायरल हो गई और कई अन्य लोगों ने भी माना कि वे भी ऐसा ही कर रहे हैं। हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि वाइब कोडिंग ठीक से नहीं चल रही है। कारपैथी के प्रॉम्प्ट से जो कोड बनता है, उसे अक्षम और ठीक न किए जाने वाली गलतियों भरा बताया गया है। इस पद्धति का उपयोग करने वाले प्रोग्रामर कहते हैं कि वे न केवल यह भूल जाते हैं कि कोड मौजूद है, बल्कि यह भी भूल जाते हैं कि कोड कैसे लिखा जाता है। जिस तरह किसी भाषा का उपयोग करना छोड़ देने पर आप उसे खो देते हैं, उसी तरह कोड के साथ भी होता है। प्रारंभिक अध्ययनों से संकेत मिलता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करने वाले मनुष्य समय के साथ कम रचनात्मक हो सकते हैं।
वाइब कोडिंग से अलग कुछ और चीजें पहले ही बाजार में आ चुकी हैं। गूगल ने दावा किया है कि 2024 में कंपनी के सभी कोड का 25 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा एआई ने लिखा है, और हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट ने भी ऐसी ही संख्या बताई है, क्योंकि उसने हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है, जिनमें कई सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी शामिल हैं। अमेजन ने भी सुव्यवस्थित एआई कोडिंग प्रथाओं को अपनाया है, जिसके बारे में कर्मचारियों का कहना है कि इससे सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में मौलिक परिवर्तन आता है, तथा बौद्धिक प्रयास से परिभाषित कार्य कठिन औद्योगिक परिश्रम बन जाता है।
पिछले एक दशक से कंप्यूटर विज्ञान लगातार अमेरिका में शीर्ष विषयों में से एक रहा है। लेकिन एआई के कोड लिखने की क्षमता के साथ, स्टार्टअप और तकनीकी दिग्गज समान रूप से कम से कम प्रवेश स्तर के कंप्यूटर वैज्ञानिकों को काम पर रख रहे हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि प्रमुख एआई कंपनियों में, सॉफ्टवेयर इंजीनियर नौकरियों के लिए भर्ती दर 2024 के दौरान लगभग 3,000 प्रतिमाह से गिरकर लगभग शून्य हो गई है। यदि नौकरियां खत्म होने के कारण कंप्यूटर विज्ञान की डिग्री में नामांकन बंद हो गया, तो शिक्षा से लेकर रोजगार तक की पूरी प्रक्रिया ध्वस्त हो सकती है।
हैरानी की बात नहीं है कि परीक्षा पास कर मिलने वाली नौकरियों से पहले चैटबॉट तकनीकी नौकरियों को खतरे में डाल सकता है। वह परीक्षाओं और प्रश्नपत्रों पर बहुत से मानक प्रश्नों के उत्तरों की भविष्यवाणी करने में बहुत अच्छा है और बहुत सारा मात्रात्मक कार्य बहुत ही सरल कोड का इस्तेमाल करके कर सकता है। एआई इस व्यापक प्रकार की नौकरी तथा इसमें इस्तेमाल होने वाले बुनियादी मात्रात्मक कौशल के लिए संभावित रूप से बहुत बड़ा खतरा है। चिंता की बात यह है कि एक समाज के रूप में हम निरक्षर ही नहीं, बल्कि गणितीय कौशल में भी अक्षम हो जाएंगे। लगता है कि एआई एक और खतरनाक प्रवृत्ति को बढ़ा रहा है, और यह संकट शिक्षा के सबसे बुनियादी तत्वों पर है-पढ़ना, लिखना और अंकगणित के सवाल हल करना।
इसलिए आज के युवा छात्रों को मेरी सलाह है कि वे भाषा और गणित का अध्ययन करें। बाजारों में अप्रत्याशित परिणामों से निपटने के लिए तकनीकी कौशल पर्याप्त नहीं होंगे, इसलिए गणित और भाषा का व्यापक ज्ञान ही इससे निपटने का एकमात्र तरीका होगा। और जब एक क्षेत्र से नौकरियां गायब हो सकती हैं, तो हमें हमेशा ऐसे मनुष्यों की आवश्यकता होगी, जो एआई को समझ सकें। एआई के युग में अपनी संस्कृति को समझने के लिए हमें उच्च स्तरीय गणित की कक्षाओं और साहित्य तथा भाषा विज्ञान के गहन अध्ययन की आवश्यकता होगी।
हो सकता है कि छात्र को जिस महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि की आवश्यकता है, वह ‘डॉन क्विक्जोट’ पर एक पाठ्यक्रम से प्राप्त हो, भले ही यह सुनने में कितना भी विचित्र क्यों न लगे। दूसरे शब्दों में, मुझे लगता है कि हमें एआई के युग में आगे बढ़ने के लिए उदार कलाओं की ओर लौटना होगा। आज के छात्रों के लिए, गणित और भाषा का अध्ययन तेजी से बदलते बाजार (जिसमें कंप्यूटर विज्ञान की डिग्री अब नौकरी की गारंटी नहीं है) का सामना करने के लिए पर्याप्त लचीला होने का एकमात्र तरीका हो सकता है। यह हमारी मानवता को समझने का एक तरीका भी है, जो एआई कभी नहीं कर पाएगा।